‘भुखमरी की भयंकर ख़ामोशी - गगनभेदी व निरन्तर मौजूद’
संयुक्त राष्ट्र की अकाल रोकथाम और सहायता समन्वयक रीना ग़ेलानी ने गुरूवार को कहा है कि भुखमरी के कारण धीरे-धीरे लोगों को मौत के मुँह में धकेल रहे अकाल के जोखिम को, अन्तरराष्ट्रीय शान्ति व सुरक्षा के लिए लाल रेखा समझा जाना चाहिए. उन्होंने चेतावनी के शब्दों में कहा कि युद्धरत पक्ष, खाद्य अभार को, जान-बूझकर युद्ध के एक हथियार के रूप में इस्तेमाल करते हैं.
रीना ग़ेलानी ने सुरक्षा परिषद में ‘अकाल और युद्ध-जनित वैश्विक खाद्य असुरक्षा’ विषय पर आयोजित एक खुली चर्चा को सम्बोधित करते हुए कहा कि दुनिया भर में, वर्ष 2022 में 25 करोड़ से अधिक लोगों ने अत्यन्त गम्भीर खाद्य असुरक्षा का सामना किया, जोकि हाल के वर्षों में रिकॉर्ड संख्या है.
इसके अलावा सशस्त्र युद्ध या अति-स्तर वाली हिंसा से प्रभावित सात देशों में, तीन लाख 76 हज़ार लोग, अकाल जैसे हालात का सामना करने को विवश हैं.
उन्होंने कहा कि अन्य साढ़े तीन करोड़ लोग, अकाल के बेहद निकट हैं.
सुरक्षा परिषद में इस चर्चा का आयोजन स्थाई सदस्य संयुक्त राज्य अमेरिका ने किया था, जोकि अगस्त महीने के लिए सुरक्षा परिषद का अध्यक्ष है.
रीना ग़ेलानी ने कहा कि खाद्य-अभाव और टकराव, एक दूसरे को बढ़ावा देते हैं.
उन्होंने कहा, “सशस्त्र युद्ध खाद्य प्रणालियों को तबाह कर देते हैं, आजीविकाओं को बिखेर देते हैं और लोगों को उनके घरों से उजाड़ देते हैं, जिनसे बहुत से लोग निर्बल हालात और खाद्य-अभाव में रह जाते हैं.”
“कभी-कभी ये प्रभाव, युद्ध की देन होते हैं, मगर अक्सर उन्हें जानबूझकर और ग़ैर-क़ानूनी तरीक़े से थोपा जाता है जिसमें खाद्य-अभाव और भुखमरी को, युद्ध के एक हथियार के रूप में प्रयोग किया जाना भी शामिल है.”
रीना ग़ेलानी ने कहा कि खाद्य असुरक्षा, स्वयं ही, अस्थिरता को ईंधन देती है.
उन्होंने इस सम्बन्ध में एक ऐसे शोध का भी सन्दर्भ दिया जिसमें दिखाया गया है कि खाद्य-असुरक्षा अगर पहले से मौजूद परेशानियों, निर्धनता और असमानता के साथ मिल जाती है तो, किस तरह लोगों को शान्ति के ऊपर, हिंसा को चुनने के लिए उकसाती है.
मानवीय सहायता कर्मियों पर जोखिम
रीना ग़ेलानी ने कहा कि अकाल को टालने या उसे दूर करने के लिए सहायता पहुँचाते हैं और लोगों की मदद करते हैं, उन्हें भी युद्ध लड़ाई से नहीं बख़्शा जाता है.
हर साल युद्धक हालात में, सैकड़ों मानवीय सहायताकर्मी हताहत होते हैं और उनका अपहरण भी किया जाता है, अक्सर सहायता सुविधाओं और सामग्रियों पर भी हमले किए जाते हैं, या सैन्य उद्देश्यों के लिए उनका प्रयोग किया जाता है.
उन्होंने कहा, “संयुक्त राष्ट्र, ग़ैर-सरकारी संगठन और उसके साझीदार, सूडान में जिन कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं, वो प्रखर उदाहरण हैं.”
रीना ग़ेलानी ने, हाल के सप्ताहों में जान देने वाले 11 मानवीय सहायता कर्मियों के परिवारों के प्रति शोक-संवेदना भी प्रकट की.
जलवायु परिवर्तन एक बहुमुखी जोखिम
रीना ग़ेलानी ने कहा कि जलवायु परिवर्तन और आर्थिक झटके, संकटों को और जटिल बना रहे हैं. “जलवायु परिवर्तन लगातार एक बहुमुखी जोखिम बनता जा रहा है.”
उन्होंने कहा कि पानी और अन्य प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव बढ़ने से, कम होते प्राकृतिक संसाधनों पर प्रतिस्पर्धा, विस्थापन और अन्ततः युद्ध और भुखमरी बढ़ रहे हैं.
उसके साथ ही, युद्ध प्रभावित देशों में असुरक्षा, जलवायु अनुकूलन प्रयासों को बाधित कर रही है.
रीना ग़ेलानी ने कहा, “ये हालात पहले से ही निर्बल परिस्थितियों वाले समुदायों को, और अधिक निर्धन, खाद्य-असुरक्षित और कम सहनशील बना देते हैं.”
‘भयंकर ख़ामोशी गगनभेदी’
रीना ग़ेलानी ने निष्कर्षतः अपनी निजी अनुभव साझा करते हुए, ऐसे समुदायों का ज़िक्र किया, जो अकाल के बेहद नज़दीक जीवन गुज़ार रहे थे.
उन्होंने कहा, “मैं अनगिनत पोषण-स्थलों पर, अनगिनत विस्थापित शिविरों में, माताओं के पास बैठकर देखा है. ऐसे में जबकि उनके छोटे बच्चे अपनी ज़िन्दगियों के लिए संघर्ष कर रहे थे, वो इतनी कमज़ोर थीं कि रोने के लिए उनकी आवाज़ें भी नहीं निकल पा रही थीं […] वो भयंकर ख़ामोशी गगनभेदी है. वो कभी आपका पीछा नहीं छोड़ती.”