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रूस से, विपक्षी नेता कारा-मुर्ज़ा को, तत्काल रिहा करने का आग्रह

रूसी पत्रकार और प्रमुख विपक्षी कार्यकर्ता व्लादिमीर कारा-मुर्ज़ा, रूस में ही जेल में बन्द हैं.
Daria Kornilova
रूसी पत्रकार और प्रमुख विपक्षी कार्यकर्ता व्लादिमीर कारा-मुर्ज़ा, रूस में ही जेल में बन्द हैं.

रूस से, विपक्षी नेता कारा-मुर्ज़ा को, तत्काल रिहा करने का आग्रह

मानवाधिकार

संयुक्त राष्ट्र की एक स्वतंत्र मानवाधिकार विशेषज्ञ मारियाना कत्ज़रोवा ने शुक्रवार को, रूस से, पत्रकार और प्रमुख विपक्षी कार्यकर्ता व्लादिमीर कारा-मुर्ज़ा को, उनके बिगड़ते स्वास्थ्य के कारण उनके जीवन के लिए उत्पन्न जोखिम को देखते हुए, तत्काल रिहा कर दिए जाने की अपील की है.

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41 वर्षीय कारा-मुर्ज़ा, रूस सरकार और यूक्रेन में युद्ध के प्रखर आलोचक रहे हैं और उन्हें 11 अप्रैल 2022 को, मॉस्को में मनमाने तरीक़े से गिरफ़्तार कर लिया गया था.

उन्हें देशद्रोह, रूसी महासंघ की सेना के बारे में झूठी सूचना फैलाने और एक अवांछित संगठन में भाग लेने के आरोपों में, एक वर्ष बाद, 25 साल की जेल की सज़ा सुनाई गई थी.

आवाज़ बुलन्द करने के लिए दंडित

रूसी महासंघ में मानवाधिकार स्थिति पर संयुक्त राष्ट्र की विशेष रैपोर्टेयर मारियाना कत्ज़रोवा ने शुक्रवार को कहा है, “मैं चिन्तित हूँ कि व्लादिमीर कारा-मुर्ज़ा का केवल अपराध सत्ता के सामने सत्य बोलना रहा है, जिसके लिए उन्हें 25 वर्ष की क़ैद के साथ दंडित किया जा रहा है.”

उन्होंने ध्यान दिलाया कि उनकी चिकित्सा स्थिति, बीमारियों की उस सूची में शामिल है जिसके लिए, रूसी क़ानून के तहत, लोगों को क़ैद से छूट मिली हुई है. 

उनकी मौजूदा स्वास्थ्य स्थिति, वर्ष 2015 और 2017 में उन्हें ज़हर देने के प्रयासों के परिणामस्वरूप बताई गई है.

यूएन मानवाधिकार विशेषज्ञ मारियाना कत्ज़रोवा ने कहा कि कारा-मुर्ज़ा की गिरफ़्तारी, रूसी महासंघ में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और राजनैतिक विपक्ष पर बढ़ते दमन का हिस्सा है. यह चलन फ़रवरी 2022 में, यूक्रेन पर रूसी आक्रमण होने के समय से और भी बढ़ा है.

यूएन मानवाधिकार विशेषज्ञ

मारियाना कत्ज़रोवा जैसे यूएन मानवाधिकार विशेषज्ञों की नियुक्ति, जिनीवा स्थित यूएन मानवाधिकार परिषद, किसी देश की स्थिति या किसी ख़ास मुद्दे पर निगरानी करने और उसके बारे में रिपोर्ट सौंपने के लिए करती है. 

यूएन मानवाधिकार विशेषज्ञ अपनी निजी हैसियत में काम करते हैं और किसी सरकार या संगठन से स्वतंत्र होते हैं. 

वो यूएन स्टाफ़ नहीं होते हैं और उन्हें उनके कामकाज के लिए, संयुक्त राष्ट्र से कोई वेतन भी नहीं मिलता है.