एसडीजी प्राप्ति के लिए, खाद्य प्रणालियों में विशाल बदलाव अहम
संयुक्त राष्ट्र ने, खाद्य प्रणालियों में रूपान्तरकारी बदलावों की रफ़्तार तेज़ करने के लिए, बुधवार को एक पहल शुरू की है. यूएन उप महासचिव आमिना जे मोहम्मद ने, इस मौक़े पर, टिकाऊ विकास लक्ष्यों (SDGs) प्राप्ति की रफ़्तार बढ़ाने में मदद करने वाले अहम उद्देश्यों को रेखांकित किया है.
विकास संकेतकों के अनुसार, लगभग आधे टिकाऊ विकास लक्ष्य, मध्यम स्तर से गम्भीर स्तर तक पटरी से उतरे हुए हैं, और 37 प्रतिशत लक्ष्यों में कोई बदलाव ही नहीं नज़र आ रहा है.
यूएन उप महासचिव आमिना जे मोहम्मद ने, बुधवार को रोम में यूएन खाद्य प्रणाली +2 सम्मेलन के समापन अवसर पर कहा, “हमारी खाद्य प्रणालियों में रूपान्तरकारी बदलाव करने, दुनिया को टिकाऊ विकास लक्ष्य प्राप्ति की पटरी पर फिर से वापिस लाने और इन चिन्ताजनक रुझानों को पलटने के लिए, एक अहम कुंजी है.”
निवेश का अभाव
अलबत्ता, समुचित धनराशि की अनुपलब्धता, बहुत से देशों के लिए, अपनी खाद्य प्रणालियों को बेहतर बनाने और हर किसी के लिए पोषक ख़ुराकें सुनिश्चित करने के लिए, अब भी प्रमुख बाधा बनी हुई है.
आमिना जे मोहम्मद ने, संसाधनों की कमी का सामना करने और स्थिति का रुख़ पलट देने में मदद के लिए एक नया कार्यक्रम शुरू करने की घोषणा की है.
इस कार्यक्रम का नाम है - Joint SDG Fund’s Window on Food Systems.
उन्होंने बताया कि ये कार्यक्रम खाद्य प्रणालियों में एक निवेश रणनीति में जान फूँकेगा.
अन्तरिक्ष से खाद्य समाधान
यूएन उप महासचिव ने बुधवार को ही कृषि आधारित खाद्य प्रणालियों में रूपान्तरकारी बदलावों के लिए, अन्तरिक्ष प्रौद्योगिकी का प्रयोग विषय पर आयोजित एक कार्यक्रम में भी अपने विचार व्यक्त किए.
उन्होंने कहा कि अन्तरिक्षि में इस समय व्यापक परिवर्तन हो रहे हैं, विशेष रूप में निम्न-पृथ्वी-कक्षा तक बढ़ती पहुँच और उसके प्रयोग के बारे में, जोकि 2030 विकास एजेंडा के लिए असाधारण रूप से लाभकारी साबित हो सकते हैं.
आमिना जे मोहम्मद ने कहा, “अगर हम, अन्तरिक्ष प्रौद्योगिकी की सम्भावनाओं का दोहन कर सकें तो ये, कृषि और उस पर आधारित खाद्य प्रणालियों के लिए अति महत्वपूर्ण नवीन प्रौद्योगिकियाँ साबित हो सकती हैं, और अन्ततः अधिक टिकाऊ, सहनशील, और कृषि पर आधारित कुशल खाद्य प्रणालियों का मार्ग प्रशस्त कर सकती हैं.”
अन्तरिक्ष प्रौद्योगिकियाँ कृषि की उत्पादकता और कुशलता पहले ही बढ़ रही हैं और अगर इनका पूर्ण उपयोग किया जाए तो, ये किसानों को अपनी उपज, 10 प्रतिशत बढ़ाने में मदद कर सकती हैं.
अन्तरिक्ष समाधानों से, लागत में भी 20 प्रतिशत तक की कमी आ सकती है जिनमें उर्वरक, ईंधन और कीट-नाशकों की लागत शामिल है.
इन समाधानों में भूमि का क्षय से संरक्षण, मिट्टी की गुणवत्ता को बेहतर बनाने और पृथ्वी के प्राकृतिक संसाधनों का अधिक टिकाऊ प्रयोग करके, जलवायु कार्रवाई में योगदान मिलेगा.