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निजेर में सम्भावित सत्ता विद्रोह के प्रयास की तीखी निन्दा

यूएन महासचिव एंतोनियो गुटेरेश (बाएँ) निजेर की राजधानी नियामे में राष्ट्रपति मोहम्मद बज़ोम से मुलाक़ात कर रहे हैं.
UN Photo/Eskinder Debebe
यूएन महासचिव एंतोनियो गुटेरेश (बाएँ) निजेर की राजधानी नियामे में राष्ट्रपति मोहम्मद बज़ोम से मुलाक़ात कर रहे हैं.

निजेर में सम्भावित सत्ता विद्रोह के प्रयास की तीखी निन्दा

शान्ति और सुरक्षा

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने पश्चिम अफ़्रीकी देश निजेर में, सत्ता पर क़ब्ज़ा करने के एक सम्भावित प्रयास की तीखी निन्दा की है. ऐसी ख़बरें आई थीं कि लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित राष्ट्रपति को, उनके सरकारी आवास पर, उनके ही सुरक्षा गार्डों ने बन्धक बनाकर रखा हुआ है.

समाचारों के अनुसार, अधिकारियों ने राष्ट्रपति मोहम्मद बज़ौम को बन्धक बना लिया और बुधवार को राजधानी नियामेय में उनके निवास की भी घेराबन्दी कर ली. 

यह कार्रवाई करने वालों को, सेना के अन्य धड़ों या सुरक्षा बलों से किसी तरह का समर्थन नहीं मिला है, मगर राष्ट्रपति की रिहाई के लिए हुई अभी तक की बातचीत, विफल रही है.

यूएन प्रमुख एंतोनियो गुटेरेश के प्रवक्ता ने बुधवार को जारी एक संक्षिप्त वक्तव्य में कहा है कि वो निजेर में तेज़ी से बदलती परिस्थितियों पर, नज़दीकी नज़र रखे हुए हैं.

लोकतंत्र को कमज़ोर करना

प्रवक्ता के वक्तव्य के अनुसार, “उन्होंने निजेर में सत्ता पर ताक़त के बल पर क़ब्ज़ा करने और देश में लोकतांत्रिक सरकार, शान्ति व स्थिरता को कमज़ोर करने के किसी भी प्रयास की, कड़े शब्दों में निन्दा करते हैं.”

वक्तव्य में कहा गया है, “महासचिव, इस गतिविधि में संलिप्त सभी पक्षों से संयम बरतने और संवैधानिक व्यवस्था सुनिश्चित करने का आहवान किया है.”

संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि ये विश्व संगठन, निजेर के लोगों और वहाँ की सरकार के साथ, सदैव मुस्तैदी से खड़ा है.

ड्यूटी का ‘धोखा’

इस घटनाक्रम के बाद, अफ़्रीकी संघ आयोग के अध्यक्ष मूसा फाकी को, इस कार्रवाई को “सत्ता विद्रोह का एक प्रयास” कहना पड़ा है. अलबत्ता, अभी तक गोलीबारी होने की कोई ख़बर नहीं है.

मूसा फाकी मूसा फ़ाकी ने, सेना पर अपनी गणतांत्रिक ड्यूटी के साथ पूर्ण धोखा करते हुए ये कार्रवाई करने के लिए निन्दा की है, और “दोषी सैनिकों” से अपनी बैरकों में लौट जाने का आग्रह किया है.

मुख्य क्षेत्रीय गुट – ECOWAS ने भी, सत्ता विद्रोह के इस प्रयास की निन्दा की है और राष्ट्रपति को बन्धक बनाकर रखने वाले अधिकारियों से, उन्हें तत्काल रिहा करने का आहवान किया है.

पड़ोसी देशों – माली और बुर्कीना फ़ासो में, गत पाँच वर्षों के दौरान, बढ़ती जिहादी उपद्रवी गतिविधियों के बीच, सैनिक विद्रोह देखे गए हैं. इन हालात में, पूरा क्षेत्र अस्थिर हुआ है.

निजेर ने 1960 में स्वतंत्रता प्राप्त की थी, तब से देश में चार बार सत्ता-विद्रोह हो चुके हैं, जिनमें से, पिछला विद्रोह 2010 में हुआ था.