भारत: सपनों को हक़ीकत बनातीं महिला उद्यमी
भारत में यूएनडीपी, भारत सरकार के साथ मिलकर, रोज़गार कौशल, आजीविका के अवसर, युवा नवाचार, उद्यमशीलता उत्थान व सामाजिक सुरक्षा तक पहुँच को बढ़ावा देने के लिए प्रयासरत है. इसके लिए, करियर मार्गदर्शन और परामर्श, 21वीं सदी के कौशल प्रशिक्षण, उद्यमिता विकास कार्यक्रम और युवा उद्यमिता चुनौतियों जैसी पहलों के ज़रिए, 5 लाख लोगों के जीवन में आर्थिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त किया है.
दुनिया की सबसे बड़ी युवा आबादी का घर - भारत देश, ऊर्जा और क्षमता से भरपूर है. ऐसे में, कौशल में निवेश की आवश्यकता भी बहुत अहम हो जाती है.
भारत की आधी आबादी 30 साल से कम उम्र की है, जो आर्थिक विकास, नवाचार और सामाजिक प्रगति को आगे बढ़ाने की कुंजी हैं. हालाँकि, इस क्षमता के दोहन के लिए उन्हें उचित कौशल व अवसर प्रदान करने के लिए ठोस प्रयास की आवश्यकता है.
इस ज़रूरत को समझते हुए, भारत में यूएनडीपी, भारत सरकार के कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय (MSDE) द्वारा समर्थित ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में रोज़गार कौशल, आजीविका के अवसर, युवा नवाचार, उद्यमशीलता उत्थान व सामाजिक सुरक्षा तक पहुँच को बढ़ावा देने के प्रयासों में सबसे आगे रहा है.
करियर मार्गदर्शन और परामर्श, 21वीं सदी के कौशल, उद्यमिता विकास कार्यक्रम और युवा उद्यमिता चुनौतियों जैसी पहलों के ज़रिए, ऐक्सेल, कोड उन्नति और यूथ को-लैब जैसी परियोजनाओं ने, 5 लाख लोगों के जीवन को आर्थिक रूप से प्रभावित किया है, जिससे पूरे भारत में अधिक मज़बूत कौशल एवं रोज़गार पारिस्थितिकी तंत्र बनाने में योगदान हुआ है.
हाल ही में प्रोजेक्ट ऐक्सेल के तहत यूएनडीपी ने युवा उद्यमिता चुनौती का आयोजन किया. यह चुनौती, आकांक्षी उद्यमियों को अपने विचार प्रदर्शित करने व अपने उद्यम शुरू करने के लिए महत्वपूर्ण समर्थन हासिल करने का एक मंच प्रदान करती है.
उद्यमिता चुनौती
इस चुनौती में 400 से अधिक युवा महत्वाकांक्षी उद्यमियों ने भाग लिया, जिनमें किफ़ायती व आकर्षक कपड़े बनाने के लिए समर्पित, काजल अंबालिया और काजल रावलिया जैसे फ़ैशन डिज़ाइनरों से लेकर, टिकाऊ खेती को बढ़ावा देने का लक्ष्य रखने वाली सवित्री कंजारिया तक शामिल थीं.
इस चुनौती में छह महिलाएँ, सहनसक्षमता, रचनात्मकता और महत्वाकांक्षा का प्रदर्शन करते हुए विजयी हुईं.
देवभूमि द्वारका के मध्य में बसे छोटे से गाँव मोटा कलावड की 23 वर्षीय काजल, वंचित वर्गों का फ़ैशन डिज़ाइनर बनने का सपना देखती हैं.
एक कृषि-व्यापारी के घर जन्मीं, छह बेटियों में से एक होने के नाते, काजल जानती थीं कि उनकी आकांक्षाओं को साकार करने का मार्ग चुनौतीपूर्ण रहेगा, लेकिन उन्होंने आगे बढ़ने की ठानी.
काजल ने, अर्थशास्त्र में डिग्री हासिल करते समय, चुपचाप फ़ैशन डिज़ाइनर का अपना हुनर निखारा. अपने घर में लटके एक पुराने पर्दे को अपनी पहली फ़ैशन रचना में बदलकर बहुत ही साधारण शुरुआत की.
उनका मानना है कि हर महिला, चाहे वो समाज के किसी भी वर्ग या स्थान से आती हो, फ़ैशनेबल और किफ़ायती कपड़ों तक उनकी पहुँच होनी चाहिए. काजल ने अपनी माँ की पुरानी साड़ियों, कुर्ते और चादरों का उपयोग करके कपड़ों की सिलाई शुरू की. उनके उत्पाद दो तरह के होते हैं - अपसयइकल और बिल्कुल नए.
उनकी नई कम्पनी का लक्ष्य लोगों की ‘पॉकेट-फ्रेंडली’ डिज़ाइनर परिधानों तक पहुँच बनाना है. वह कहती हैं, ''मैं एक ऐसे डिज़ाइनर के रूप में पहचानी जाना चाहती हूँ, जो सामान्य लोगों को असाधारण बनाते हैं." और काजल की प्रतिभा और समर्पण बेकार नहीं गई.
मई 2023 में, वो प्रतिष्ठित युवा उद्यमिता चुनौती के चार अन्तिम स्थानों में से एक के रूप में चुनी गईं और उन्हें अपना उद्यम शुरू करने के लिए मूल धन के रूप में एक लाख रुपए से सम्मानित किया गया था. काजल ने रणनैतिक रूप से अपनी प्रारम्भिक पूंजी को सामान प्रबन्धन और स्टोर ब्रैंडिंग के लिए आवंटित किया है.
पारम्परिक कला व उद्यमिता का संगम
एक और युवा उद्यमी हैं काजल रावलिया. इन्हें भी फ़ैशन का शौक है. एक साधारण परिवार से आने वाली काजल रावलिया, हमेशा से गुजराती कढ़ाई से आकर्षित होती थीं. इस चुनौती में काजल रावलिया को 50 हज़ार रुपए की प्रारम्भिक धनराशि से सम्मानित किया गया.
काजल ने, इस पारम्परिक कला को जीवित रखने के लिए दृढ़ संकल्प लेकर, फ़्यूज़न डिज़ाइन बनाने शुरू किए और पारम्परिक रूपांकनों को आधुनिक कपड़ों पर उकेरना शुरू किया. उनके अनूठे फ़्यूज़न डिज़ाइन और सौन्दर्यबोध ने तुरन्त लोगों का ध्यान आकर्षित किया. अब वह पुरस्कार की धनराशि से, अन्य महिलाओं को यह कला सिखाने के लिए अपना ख़ुद का प्रशिक्षण केन्द्र शुरू करने का सपना देख रही हैं.
वहीं देवभूमि द्वारका के पश्चिम की ओर, सूर्यावदर गाँव की बीए हिन्दी की छात्रा, सावित्री कंजरिया खेती में गहरी रुचि रखती हैं. इससे प्रेरित होकर उन्होंने भूमि के अत्यधिक दोहन एवं अस्वास्थ्यकर कृषि पद्धतियों पर ध्यान केन्द्रित किया.
उन्होंने अपने चाचा की मदद से वर्मीकम्पोस्ट की ओर रुख़ किया, जोकि केंचुओं के ज़रिए, खाद बनाने और मिट्टी की उर्वरता में सुधार करने की एक वैज्ञानिक विधि है. सावित्री, पुरस्कार में प्राप्त प्रारम्भिक धनराशि से, टिकाऊ खेती को बढ़ावा देने और मिट्टी के क्षरण को रोकने हेतु, अपने गाँव में एक वर्मीकम्पोस्ट संयंत्र स्थापित करने की इच्छा रखती हैं.
नज़मीन नाया, वाडिनार गाँव की 19 वर्षीय युवती हैं, जिन्होंने सौन्दर्य और कल्याण क्षेत्र के प्रति अपने जुनून को आगे बढ़ाने के लिए सामाजिक बाधाओं को पार किया. नाज़मीन ने, यूएनडीपी के 'ब्यूटी एंड वैलनेस' प्रशिक्षण कार्यक्रम के ज़रिए, सौंदर्य उपचार और सैलून प्रबन्धन में कौशल प्रशिक्षण प्राप्त किया. उन्होंने आवश्यक उद्यमिता कौशल के विकास में सहायक, यूएनडीपी के '21वीं सदी कौशल विकास कार्यक्रम' में भी सक्रिय रूप से भाग लिया था.
नाज़मीन हर महीने 15 से 20 हज़ार रुपए तक की आय अर्जित कर लेती हैं. उन्होंने अब शुरुआती धनराशि से एक छोटी सी जगह किराए पर ली है, और उत्पाद ख़रीदकर अपना ब्यूटी सैलून शुरू किया है, जिससे उनके समुदाय की महिलाओं को आवश्यक सेवाएँ मिल रही हैं.
अपने परिवार की उद्यमशीलता की भावना से प्रेरित, 29 वर्षीय कविता गुसानी, मांग के अनुसार उपहार आइटम बनाती हैं. ऑनलाइन पाठ्यक्रमों और रचनात्मक प्रतिभा से ओतप्रोत कविता ने, व्यक्तिगत चाभी रखने का गुच्छा, राखी व फ़ोटो फ़्रेम बनाना शुरू किया. उन्होंने इंस्टाग्राम की शक्ति का लाभ उठाते हुए अपने उत्पादों का सफलतापूर्वक विपणन किया. वो अपनी पुरस्कार धनराशि से, उपहारों की एक विस्तृत श्रृंखला प्रदर्शित करने के लिए अपना स्टोर खोलना चाहती हैं.
प्रियांशी खेतानी 18 वर्षीय डी-फ़ार्मा की छात्रा हैं, जो आयुर्वेद के उपचार महत्व पर बहुत विश्वास रखती हैं. उन्होंने, अपने परिवार के कोविड के बाद के स्वास्थ्य संघर्षों से प्रेरित होकर, एक घरेलू तेल विकसित किया जो जोड़ों व घुटनों के दर्द से राहत प्रदान करता है. अब प्रियांशी ने, यूएनडीपी-भारत के सहयोग से, समग्र कल्याण को बढ़ावा देने के लिए उत्पादों की एक श्रृंखला पेश करने वाला एक आयुर्वेदिक फ़ार्मेसी स्टोर खोलने की योजना बनाई है.
गुजरात के जामनगर और द्वारका ज़िलों की ये युवा उद्यमी, बाधाओं को चुनौती दे रहे हैं, और साबित कर रहे हैं कि दृढ़ संकल्प व थोड़ी सी मदद से सपनों को हक़ीकत में बदला जा सकता है.
यूएनडीपी इंडिया, युवा उद्यमिता चुनौती और प्रोजेक्ट ऐक्सेल के ज़रिए इन उल्लेखनीय व्यक्तियों को आगे आने और अपने समुदायों पर स्थाई प्रभाव डालने के लिए एक मंच प्रदान कर रहा है. भविष्य उज्ज्वल है, और इन महिलाओं की प्रेरक कहानियाँ, परिवर्तन एवं सशक्तिकरण की एक नई लहर की शुरुआत हैं.