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काला सागर अनाज निर्यात पहल से पीछे हटा रूस, यूएन प्रमुख ने जताया गहरा खेद

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश न्यूयॉर्क स्थित यूएन मुख्यालय में रूसी महासंघ के निर्णय के बाद की स्थिति पर पत्रकारों को जानकारी दे रहे हैं.
UN Photo/Mark Garten
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश न्यूयॉर्क स्थित यूएन मुख्यालय में रूसी महासंघ के निर्णय के बाद की स्थिति पर पत्रकारों को जानकारी दे रहे हैं.

काला सागर अनाज निर्यात पहल से पीछे हटा रूस, यूएन प्रमुख ने जताया गहरा खेद

मानवीय सहायता

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने रूसी महासंघ द्वारा 'काला सागर अनाज निर्यात पहल' में अपनी भागेदारी समाप्त करने के निर्णय पर गहरा खेद व्यक्त किया है. उन्होंने कहा है कि इस घोषणा से, विश्व भर में भूख और ऊँची खाद्य क़ीमतों की मार झेल रहे करोड़ों लोगों के लिए जीवनरेखा भी ख़त्म हो गई है.

कई सप्ताहों तक चली वार्ताओं के बाद लागू की गई इस पहल के ज़रिए, यूक्रेनी बन्दरगाहों से विश्व के अनेक देशों में तीन करोड़ 20 लाख मीट्रिक टन खाद्य वस्तुओं का सुरक्षित निर्यात किया गया.

इस पहल की अवधि, अनेक बार नवीनीकृत किए जाने के बाद, 17 जुलाई को समाप्त हो रही थी. 

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महासचिव गुटेरेश ने गुरूवार को, न्यूयॉर्क स्थित यूएन मुख्यालय में पत्रकारों से बातचीत के दौरान निराशा जताई कि रूसी महासंघ का निर्णय, हर स्थान पर ज़रूरतमन्दों लोगों पर एक चोट है.

काला सागर पहल पर रूस, यूक्रेन, तुर्कीये और संयुक्त राष्ट्र के बीच, जुलाई 2022 में इस्तान्बूल शहर में सहमति बनी थी. इसके समानान्तर, संयुक्त राष्ट्र और रूस के बीच, अनाज और उर्वरक के निर्यात के लिए एक अन्य समझौता हुआ था.

रूस ने, अपने इस ताज़ा निर्णय के साथ ही, काला सागर के पश्चिमोत्तर हिस्से में, जहाज़ों की आवाजाही के लिए दी गई सुरक्षा गारंटी को भी वापिस ले लिया है.

“अन्तत: इन समझौतों में हिस्सेदारी एक चयन है. लेकिन हर स्थान पर संघर्ष करते लोगों और विकासशील देशों के पास कोई विकल्प नहीं है.”

‘आशा का पुंज’

यूएन प्रमुख ने कहा कि “काला सागर पहल, और रूसी खाद्य उत्पादों व उर्वरकों के निर्यात पर सहमति पत्र, ये दोनों समझौतों वैश्विक खाद्य सुरक्षा के लिए बेहद अहम साबित हुए हैं और मुश्किलों से जूझ रही दुनिया में एक आशा का पुंज है.”

महासचिव गुटेरेश ने ध्यान दिलाया कि हिंसक टकराव, जलवायु परिवर्तन, ऊर्जा क़ीमतों और अन्य चुनौतियों के कारण विश्व भर में खाद्य उत्पादन व उपलब्धता पर असर पड़ा है.

इस पृष्ठभूमि में इन समझौतों के ज़रिए पिछले साल मार्च के बाद से अब तक खाद्य क़ीमतों में 23 प्रतिशत की कमी ला पाना सम्भव हुआ है.

विश्व खाद्य कार्यक्रम ने मानवीय सहायता अभियानों के लिए 7 लाख 25 हज़ार मीट्रिक टन अनाज की खेप रवाना की है, जिससे अफ़ग़ानिस्तान, हॉर्न ऑफ़ अफ़्रीका और यमन में विशाल राहत ज़रूरतों को पूरा करने में मदद मिली है.

महासचिव ने बताया कि रूसी खाद्य वस्तुओं और उर्वरक उत्पादों के विदेशी व्यापार के रास्ते में कुछ अवरोध बरक़रार हैं, और उन्होंने इसे जारी रखने के लिए राष्ट्रपति व्लादीमीर पुतिन के नाम अपने एक पत्र में कुछ नए प्रस्तावों का उल्लेख किया था. 

राष्ट्रपति पुतिन के नाम पत्र

यूएन प्रमुख ने उस पत्र के कुछ अहम बिन्दुओं के बारे में जानकारी में बताया कि सहमति पत्र पर हस्ताक्षर के बाद और रूसी महासंघ द्वारा उपाय लागू किए जाने के बाद, रूसी अनाज व्यापार ने रिकॉर्ड निर्यात मात्रा को छुआ है. 

साथ ही, उर्वरक बाज़ारों में भी स्थिरता दर्ज की जा रही है, जहाँ रूसी निर्यात पूर्ण रूप से बहाल होने के क़रीब हैं. 

ख़त में रूस पर प्रतिबन्धों के बीच व्यापार को सुलभ बनाने के लिए यूएन द्वारा किए जा रहे प्रयासों पर भी जानकारी दी गई, जैसेकि अमेरिका, ब्रिटेन और योरोपीय संघ से लाइसेंस की व्यवस्था करना, और निजी सैक्टर को स्पष्टीकरण व दिशानिर्देश प्रदान करना.

यूएन महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने काला सागर अनाज निर्यात पहल को कूटनीति की एक बड़ी सफलता क़रार दिया है.
UN Photo/Mark Garten
यूएन महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने काला सागर अनाज निर्यात पहल को कूटनीति की एक बड़ी सफलता क़रार दिया है.

यूएन प्रमुख के अनुसार, उन्होंने राष्ट्रपति पुतिन को बताया कि संयुक्त राष्ट्र ने बैंकिंग और निजी सैक्टर में समाधानों को ढूंढने के प्रयास जारी रखे हैं, जिसमें रूसी कृषि बैंक के लिए SWIFT अन्तरराष्ट्रीय बैंकिंग नैटवर्क से इतर भुगतान व्यवस्था भी है.

मगर, उन्होंने गहरी निराशा जताई कि उनके प्रस्तावों को अनसुना कर दिया गया है.

यूएन की प्रतिबद्धता 

यूएन प्रमुख ने कहा कि रूसी महासंघ ने काला सागर पहल को समाप्त करने की घोषणा करके, काला सागर में यूक्रेनी नियंत्रण वाले बन्दरगाहों से भोजन, सूरजमुखी के तेल के निर्बाध निर्यात के लिए अपने संकल्प को भी ख़त्म कर दिया है.   

“करोड़ों लोग भूख की मार झेल रहे हैं और उपभोक्ताओं को वैश्विक जीवन-व्यापन की क़ीमतों का सामना करना पड़ रहा है. उन्हें इसकी भारी क़ीमत चुकानी होगी.”

यूएन प्रमुख ने सचेत किया कि सोमवार सुबह ही गेहूँ की क़ीमतों में उछाल दर्ज किया गया है. “मगर, यह स्थिति, यूक्रेन और रूसी महासंघ से खाद्य उत्पादों व उर्वरकों के लिए वैश्विक बाज़ारों की निर्बाध सुलभता के लिए हमारे प्रयासों को नहीं रोकेगी.”

इस क्रम में, उन्होंने तुर्कीये सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना की है.

उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि उनका लक्ष्य वैश्विक खाद्य सुरक्षा और वैश्विक खाद्य क़ीमतों में स्थिरता को बढ़ावा देना है. “आज के इस निर्णय से मानवीय पीड़ा में वृद्धि होगी और उसके मद्देनज़र, ये हालात, मेरे प्रयासों के केन्द्र में रहेंगे. हम समाधानों के लिए रास्ता तलाश करने पर अपनी नज़र बनाए रखेंगे.”