वैश्विक परिप्रेक्ष्य मानव कहानियां

अनेक देशों में निर्धनता उन्मूलन में तेज़ी, मगर एक अरब जन अब भी ग़रीबी की चपेट में

भारत के वड़ोदरा शहर में एक बच्ची कचरे से लकड़ी एकत्र कर रही है.
© ILO
भारत के वड़ोदरा शहर में एक बच्ची कचरे से लकड़ी एकत्र कर रही है.

अनेक देशों में निर्धनता उन्मूलन में तेज़ी, मगर एक अरब जन अब भी ग़रीबी की चपेट में

आर्थिक विकास

संयुक्त राष्ट्र और ऑक्सफ़र्ड यूनिवर्सिटी के एक नए अध्ययन के अनुसार, भारत और चीन सहित, 25 देशों को बड़ी संख्या में लोगों को निर्धनता के गर्त से बाहर निकालने और बहुआयामी निर्धनता सूचकांक (Multidimensional Poverty Index (MPI) को आधा करने में सफलता मिली है. मगर, समुचित डेटा उपलब्ध ना होने की वजह से कोविड-19 महामारी के प्रभावों का पूर्ण आकलन कर पाना फ़िलहाल सम्भव नहीं है. 

अनुमानों के अनुसार, एक अरब 10 करोड़ लोग अब भी निर्धनता में जीवन गुज़ार रहे हैं.

संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) और ऑक्सफ़र्ड यूनिवर्सिटी की निर्धनता व मानव विकास पर पहल ने, मंगलवार को अपना वैश्विक बहुआयामी निर्धनता सूचकांक जारी किया है.

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वैश्विक बहुआयामी निर्धनता सूचकांक के ज़रिेए, निर्धनता में आई गिरावट को आँका जाता है और यह नीति-निर्माण के लिए जानकारी प्रदान करता है. 

यह सूचकांक आम लोगों के दैनिक जीवन में विभिन्न पहलुओं, जैसेकि शिक्षा, स्वास्थ्य आवास, बुनियादी सेवाओं की सुलभता समेत अन्य क्षेत्रों में निर्धनता का आकलन किया जाता है. 

2000 से 2022 के रुझानों के विश्लेषण में 81 देशों पर ध्यान केन्द्रित किया गया, जो बताता है कि 25 देशों ने केवल 15 वर्षों के भीतर बहुआयामी निर्धनता सूचकांक को आधा करने में सफलता दर्ज की है. 

इन देशों में भारत, कम्बोडिया, चीन, कांगो, होंडुरस, इंडोनेशिया, मोरक्को, सर्बिया और वियत नाम समेत अन्य देश हैं. 

इस विश्लेषण के अनुसार, भारत में निर्धनता उन्मूलन प्रयासों में विशेष रूप से बड़ी प्रगति दर्ज की गई, जहाँ पिछले 15 वर्षों में साढ़े 41 करोड़ लोग ग़रीबी से बाहर आए हैं. 

चीन में छह करोड़ 90 लाख और इंडोनेशिया में 80 लाख लोग अब निर्धनता से बाहर हैं.

यूएन विकास कार्यक्रम में मानव विकास रिपोर्ट कार्यालय के निदेशक पेड्रो कोंसेइकाओ ने बताया कि टिकाऊ विकास के 2030 एजेंडा के आधे पड़ाव पर, हम यह स्पष्टता से देख सकते हैं कि कोविड-19 महामारी से पहले बहुआयामी निर्धनता उन्मूलन में निरन्तर प्रगति दर्ज की जा रही थी. 

कोविड-19 का असर

इस सूचकांक में 110 से अधिक देशों पर ध्यान केन्द्रित किया गया, मगर डेटा के अभाव में यह पूर्ण रूप से समझ पाना कठिन है कि वैश्विक महामारी ने कितनी गहराई तक लाखों-करोड़ों लोगों को प्रभावित किया है.

इसके मद्देनज़र, तत्काल डेटा जुटाए जाने की अहमयित को रेखांकित किया गया है.

यूएन विकास कार्यक्रम का मानना है कि कोविड-19 महामारी का शिक्षा समेत अन्य आयामों पर नकारात्मक असर हुआ है, जिसके नतीजे लम्बे समय तक सामने आ सकते हैं. 

इन परिस्थितियों में यह अनिवार्य है कि नकारात्मक ढंग से सर्वाधिक प्रभावित आयामों के प्रति समझ विकसित करने के प्रयासों में तेज़ी लाई जाए.

डेटा जुटाने और नीतिगत उपायों के ज़रिेए निर्धनता में कमी लाने के प्रयासों को फिर से पटरी पर लाना होगा. 

वैश्विक निर्धनता पर नवीनतम डेटा की उपलब्धता सुनिश्चित करना, मौजूदा चुनौतियों से निपटने की दिशा में पहला क़दम है और इससे एक अधिक समानतापूर्ण विश्व की ओर क़दम बढ़ाए जा सकते हैं.