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म्याँमार में अत्याचार और दंडमुक्ति बन्द हों, टर्क

म्याँमार की एक महिला अपने छोटे बच्चे के साथ, सुरक्षा की ख़ातिर थाईलैंड की तरफ़ जाने वाले रास्ते पर.
© UNOCHA/Siegfried Modola
म्याँमार की एक महिला अपने छोटे बच्चे के साथ, सुरक्षा की ख़ातिर थाईलैंड की तरफ़ जाने वाले रास्ते पर.

म्याँमार में अत्याचार और दंडमुक्ति बन्द हों, टर्क

मानवाधिकार

संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर टर्क ने गुरूवार को मानवाधिकार परिषद को बताया है कि म्याँमार में शासन द्वारा आम लोगों के विरुद्ध, क्रूर हिंसा किया जाना और जीवनरक्षक मानवीय सहायता नहीं पहुँचने देना, दरअसल मानवता के लिए अपार असम्मान दर्शाता है.

वोल्कर टर्क ने कहा कि यूएन मानवाधिकार कार्यालय ने, मानवाधिकार हनन के लगातार होने वाले और अत्यन्त गम्भीर मामले दर्ज किए हैं, जिनमें सामूहिक हत्याएँ, न्यायेतर मृत्युदंड और सिर धड़ से अलग कर देने जैसे अत्यन्त क्रूर मामले शामिल हैं.

उन्होंने कहा कि म्याँमार की सेना ने राख़ीन प्रान्त में भी अत्याचार जारी रखे हैं, जहाँ रोहिंग्या अल्पसंख्यकों को नागरिकता से वंचित रखा गया है.

वोल्कर टर्क ने मानवाधिकार परिषद को सम्बोधित करते हुए, म्याँमार की सत्तारूढ़ सैन्य सरकार में व्याप्त दंडमुक्ति को समाप्त किए जाने का आहवान किया, जिसने देश की लोकतांत्रिक सरकार को, फ़रवरी 2021 में बेदख़ल करके सत्ता पर क़ब्ज़ा किया था.

मानवाधिकार उच्चायुक्त ने कहा, “मैं देशों को, म्याँमार की स्थिति को, अन्तरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) को सौंपने पर विचार करने के लिए प्रोत्साहित करना चाहूंगा. हमें, विभिन्न सशस्त्र गुटों द्वारा अंजाम दिए गए सम्भावित अपराधों के लिए भी जवाबदेही निर्धारित करनी होगी.”

घातक हिंसा का गर्त

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यूएन मानवाधिकार उच्चायुक्त ने कहा कि म्याँमार, हिंसा और दिल दहला देने वाले गर्त में बहुत तेज़ी से धँसता जा रहा है.

जहाँ कभी आशावाद और एक अधिक शान्तिपूर्ण व समृद्ध भविष्य की उम्मीदें मौजूद थीं, वहाँ अब आम लोग, एक क्रूर सैन्य सत्ता के नियंत्रण में जीने को विवश हैं, जो व्यवस्थागत नियंत्रण-चालबाज़ियों, भय और आतंक के दम पर टिकी हुई है.

वोल्कर टर्क ने कहा कि अर्थव्यवस्था का पतन हो रहा है क्योंकि सैनिक जनरल, प्राकृतिक संसाधनों का अपने स्वार्थ के लिए बहुत तेज़ी से दोहन कर रहे हैं, जिससे पर्यावरण को भी अपरिवर्तनीय हानि पहुँच रही है.

सिविल सोसायटी और पत्रकारों की आवाज़ें को, मनमाने तरीक़े से की जा रही गिरफ़्तारियों, जबरन गुमशुदगी और उत्पीड़न के ज़रिए दबाई गई हैं.

उन्होंने कहा कि विश्वसनीय सूत्रों से संकेत मिले हैं कि फ़रवरी 2021 में सैन्य तख़्तापलट के बाद से, सेना के हाथों 3,747 लोगों की मौत हुई है और लगभग 24 हज़ार लोगों को गिरफ़्तार किया गया है.

जीवनरक्षक सहायता में बाधाएँ

वोल्कर टर्क की रिपोर्ट में आम लोगों तक जीवनरक्षक सहायता पहुँचने देने में, व्यवस्थागत बाधाओं पर भी ध्यान केन्द्रित किया गया है. उन्होंने सैन्य सत्ता पर, क़ानूनी, वित्तीय और प्रशासनिक बाधाओं का पुलिन्दा लागू करने का आरोप लगाया है.

उन्होंने कहा कि देश की लगभग एक तिहाई आबादी को मानवीय सहायता की आवश्यकता है और इस सहायता को, ज़रूरमन्द लोगों तक पहुँचने देने में बाधाएँ खड़ी करना, बुनियादी मानवाधिकारों का सोचा-समझा, लक्षित और इरादतन उल्लंघन है.

मानवाधिकार उच्चायुक्त ने, मूर्खतापूर्ण हिंसा को तत्काल रोके जाने और बन्दी बनाए गए लगभग 19 हज़ार राजनैतिक क़ैदियों को रिहा किए जाने की पुकार लगाई है, इनमें स्टेट काउंसलर आंग सान सू ची और राष्ट्रपति विन मिंट भी शामिल हैं.

बच्चों पर भीषण असर

म्याँमार के लिए विशेष रैपोर्टेयर थॉमस एंड्रयूज़ ने भी, मानवाधिकार परिषद के सामने, म्याँमार के साहसिक लोगों के समर्थन में, केवल बयानबाज़ी करने के बजाय, ठोस कार्रवाई किए जाने की हिमायत की है.

उन्होंने म्याँमार के सैन्य शासन – जुंटा को इन तीन प्रमुख चीज़ों से वंचित करने के लिए कहा, जिनके दम पर उसका दमन चलता है – हथियार, धन और वैधता.

उन्होंने बताया कि फ़रवरी 2021 में सैन्य तख़्तापलट होने के बाद से, वर्ष 2022 के अन्त तक 800 से ज़्यादा बच्चे मारे गए थे या अपंग हुए थे. उनमें से अधिकतर बच्चे, जुंटा सेना के अन्धाधुन्ध हमलों का शिकार हुए.

संयुक्त राष्ट्र के स्वतंत्र मानवाधिकार विशेषज्ञ थॉमस एंड्रयूज़ ने जिनीवा में एक प्रैस वार्ता में कहा कि मारे गए बच्चों के अलावा, 3,087 बच्चों को, राजनैतिक क़ैदियों के रूप में, जेलों में रखा गया है.

उन्होंने बताया, “म्याँमार में इस समय लगभग छह लाख 60 हज़ार बच्चे विस्थापित हैं और क़रीब 58 लाख बच्चों को मानवीय सहायता की आवश्यकता है.”

“यह स्थिति संकट के ऊपर संकट की है, और इस स्थिति का बहुत भीषण असर, कमज़ोर हालात वाले लोगों पर हो रहा है, और वो हैं म्याँमार के बच्चे.”

विशेष रैपोर्टेयर ने हाल ही में अपनी एक रिपोर्ट में विस्तार से बताया था कि सैन्य जुंटा ने, फ़रवरी 2021 में तख़्तापलट करने के बाद से, किस तरह एक अरब डॉलर की रक़म के बराबर हथियारों और हथियार सम्बन्धी सामग्री का आयात किया था. 

सैन्य सत्ता ने, इन हथियारों का आयात इस स्पष्ट इरादे के साथ किया था कि उनका प्रयोग हज़ारों निर्दोष लोगों को मारने, सम्भावित युद्धापराधों और मानवता के विरुद्ध अपराधों को अंजाम देने के लिए किया जाएगा.