युद्ध प्रभावित बच्चों के संरक्षण के लिए 'साहसिक और प्रतिबद्ध' कार्रवाई पर ज़ोर
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को बुधवार को बताया गया है कि वर्ष 2022 के दौरान, दुनिया भर में अनेक स्थानों पर युद्धों में फँसे हुए बच्चों के विरुद्ध, गम्भीर मानवाधिकार हनन के 27 हज़ार 180 मामले हुए, जोकि संयुक्त राष्ट्र द्वारा पुष्ट अभी तक की सबसे ज़्यादा संख्या है.
बच्चों व सशस्त्र टकरावों पर यूएन महासचिव की विशेष प्रतिनिधि वर्जीनिया गाम्बा ने बुधवार को सुरक्षा परिषद में अपनी नवीनतम वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए, लड़कों व लड़कियों को, मृत्यु, युद्धक गतिविधियों के लिए भर्ती किए जाने, बलात्कार और अन्य अत्याचारों से बचाने की ख़ातिर, “साहसिक व प्रतिबद्ध” कार्रवाई किए जाने की अपील की.
इस रिपोर्ट में, दुनिया भर के पाँच क्षेत्रों में 26 परिस्थितियों को शामिल किया है, और ये संख्या भी स्वयं में उच्च है.
इथियोपिया, मोज़ाम्बीक़ और यूक्रेन जैसे देशों के नाम, रिपोर्ट में पहली बार शामिल हुए हैं. हेती और निजेर में नई परिस्थितियों का भी ज़िक्र किया गया है और उनके बारे में अधिक विवरण, वर्ष 2024 की रिपोर्ट में शामिल किए जाएंगे.
मौतें, भर्ती, अपहरण
संयुक्त राष्ट्र ने पुष्टि की है कि 18 हज़ार 890 बच्चों को, वर्ष 2022 में युद्धक हालात में गम्भीर मानवाधिकार उल्लंघन का सामना करना पड़ा है.
लगभग 8 हज़ार 630 बच्चे या तो मौत का शिकार हुए या अपंग हुए; 7 हज़ार 622 बच्चों को युद्धक गतिविधियों में भाग लेने के लिए भर्ती किया गया और उन्हें इस्तेमाल भी किया गया. इनके अलावा 3 हज़ार 985 बच्चों का अपहरण किया गया.
विशेष प्रतिनिधि वर्जानिया गाम्बा ने कहा कि मानवाधिकारों के इन तीन पुष्ट उल्लंघनों का स्तर उच्च बना हुआ है, जबकि वर्ष 2022 के दौरान इनमें वृद्धि भी हुई.
उन्होंने कहा, “बच्चों की मौतें, हवाई हमलों, विस्फोटक हथियारों के प्रयोग, जानलेवा बारूद के प्रयोग, गोलीबारी की चपेट में आने, या सीधे हमलों में हुई हैं. बहुत से मामलों में तो बच्चे, युद्ध की बची हुई विस्फोटक सामग्री की चपेट में आने से तकलीफ़ों में घिरे.”
बलात्कार और यौन दासता
इसके अलावा 1,165 बच्चे ऐसे थे, और उनमें अधिकतर लड़कियाँ थीं, जिनका बलात्कार और सामूहिक बलात्कार किया गया, उन्हें जबरन विवाह या यौन ग़ुलामी में धकेला गया, या उन पर यौन हमले किए गए. कुछ मामले तो इतने गम्भीर थे कि पीड़ितों की मृत्यु हो गई.
वर्जीनिया गाम्बा ने इन संख्याओं को कभी भी नहीं भुलाए जाने पर ज़ोर दिया क्योंकि ये संख्याएँ उन वास्तविक बच्चों का प्रतिनिधित्व करती हैं, जिनकी आपबीतियाँ कभी सामने ही नहीं आईं.
संख्याओं में छुपे चेहरे
विशेष प्रतिनिधि वर्जीनिया गाम्बा ने कहा, “इसलिए हमें ये अवश्य याद रखना होगा कि इन आँकड़ों के पीछे उन बच्चों के चेहरे छुपे हुए हैं जो दुनिया भर में सशस्त्र हिंसक टकरावों में तकलीफ़ें उठा रहे हैं. हमें बच्चों को सशस्त्र टकरावों के अभिशापों से बचाने के लिए, और ज़्यादा कार्रवाई करनी होगी.”
उन्होंने ध्यान दिलाया कि कुछ बच्चों को तो, संरक्षण उपलब्ध कराने के बजाय, उनकी परिस्थितियों के लिए उन्हें दंडित किया जाता है.
वर्ष 2022 में, टकराव पक्षों से कथित रूप में सम्बन्धित होने के लिए, लगभग ढाई हज़ार बच्चों को उनकी स्वतंत्रता से वंचित किया गया.
स्कूलों व अस्पतालों पर हमले
रिपोर्ट में ये भी पुष्ट जानकारी दी गई है कि वर्ष 2022 के दौरान, 1,163 स्कूलों और लगभग साढ़े छह सौ अस्पतालों पर हमले किए गए, जोकि उससे पिछले वर्ष यानि 2021 की तुलना में, 112 प्रतिशत वृद्धि को दर्शाते हैं. इनमें से आधे हमले तो, सरकारी सेनाओं ने किए.
उन्होंने कहा कि स्कूलों और अस्पतालों का सैन्य उद्देश्यों के लिए प्रयोग किया जाना, चिन्ता का एक प्रमुख कारण बना हुआ है.
इस बीच, टकरावों से प्रभावित बच्चों और समुदायों में आशा का संचार भरने वाली मानवीय सहायता को भी हमलों का निशाना बनाया गया है और इस चलन में वृद्धि हुई है.
संयुक्त राष्ट्र ने वर्ष 2022 के दौरान, मानवीय सहायता को नामंज़ूर किए जाने की 3 हज़ार 930 से ज़्यादा घटनाएँ दर्ज कीं.
सहायताकर्मियों की मौतें भी हुईं, उन्हें हमलों का निशाना बनाया गया और उनका अपहरण भी किया गया, जबकि मानवीय सहायता सामग्रियों को लूटा गया, व महत्वपूर्ण ढाँचों को ध्वस्त किया गया.
यूएन बाल एजेंसी – यूनीसेफ़ के उप कार्यकारी निदेशक ओमर आब्दी ने भी सुरक्षा परिषद में अपनी बात रखी.
उन्होंने कहा कि बच्चों के मानवाधिकारों के हनन के गम्भीर मामले, सबसे ज़्यादा उन स्थानों पर हुए, जहाँ टकराव लम्बे समय से जारी हैं. इनमें काँगो लोकतांत्रिक गणराज्य, इसराइल और फ़लस्तीन व सोमालिया भी शामिल हैं.