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अफ़ग़ानिस्तान के जलालाबाद शहर के गवर्नर कम्पाउंड में सत्तारूढ़ प्रशासन के झंडे.

अफ़ग़ानिस्तान और अन्तरराष्ट्रीय समुदाय के बीच की खाई पाटने के प्रयास, ‘अलगाव कोई विकल्प नहीं’

UN News / Ezzat El-Ferri
अफ़ग़ानिस्तान के जलालाबाद शहर के गवर्नर कम्पाउंड में सत्तारूढ़ प्रशासन के झंडे.

अफ़ग़ानिस्तान और अन्तरराष्ट्रीय समुदाय के बीच की खाई पाटने के प्रयास, ‘अलगाव कोई विकल्प नहीं’

शान्ति और सुरक्षा

अफ़ग़ानिस्तान की सत्ता पर अगस्त 2021 में तालेबान की वापसी के बाद, देश बाकी दुनिया से अलग-थलग हो गया था. तालेबान प्रशासन ने मानवाधिकारों, विशेष रूप से महिलाओं व लड़कियों पर पाबन्दियाँ लगाई है, जिससे अफ़ग़ानिस्तान, दुनिया से और दूर होता गया है. 

तालेबान की वापसी को सन्देह की नज़र से देखे जाने के कारण अन्तरराष्ट्रीय सहायता धनराशि का प्रवाह रुक गया. इन परिस्थितियों में संयुक्त राष्ट्र ही अफ़ग़ानिस्तान में दुनिया की "आँख और कान" बना हुआ है. 

मानवीय कार्यों में जुटी संयुक्त राष्ट्र एजेंसियाँ ​​और साझेदार, लम्बे समय से पीड़ित स्थानीय आबादी की बुनियादी ज़रूरतें पूरा करने और कड़ी मेहनत से हासिल किए गए विकास लाभों को संरक्षित करने के प्रयास कर रहे हैं.

हाल ही में, यूएन न्यूज़ ने अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी काबुल का दौरा किया और यह जानने की कोशिश की कि मादक पदार्थों एवं अपराध पर यूएन कार्यालय (UNODC) ने, नशीली दवाओं से प्रभावित समुदायों की ज़रूरतों को पूरा करने और ड्रग्स उपचार सुविधाओं को सुचारू ढंग से चलाने हेतु, राष्ट्रीय भागीदारों का समर्थन करने के लिए क्या क़दम उठाए हैं.

अफ़ग़ानिस्तान के दौरे के दौरान, यूएन न्यूज़ ने संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन, UNAMA के लिए विशेष उपप्रतिनिधि, मार्कस पॉटज़ेल से भी बात की.

इस विशेष साक्षात्कार में, मार्कस पॉटज़ेल ने, अफ़ग़ानिस्तान में मादक पदार्थों के दुरुपयोग और तस्करी से निपटने के मिशन के प्रयासों के अलावा, देश में बुनियादी अधिकारों, विशेष रूप से महिलाओं एवं लड़कियों के अधिकारों की बहाली व उनकी रक्षा के बारे में चर्चा की.

उन्होंने यूएन न्यूज़ को बताया कि महिलाओं और लड़कियों की शिक्षा के मुद्दे पर "कोई बीच का रास्ता सम्भव नहीं है" और व्यापक मानवाधिकार व समाज में महिलाओं की भागीदारी पर प्रतिबन्ध लगाने वाले आदेशों को "जल्द से जल्द उलट दिया जाना चाहिए."

इस साक्षात्कार को स्पष्टता और संक्षिप्तता के लिए सम्पादित किया गया है.

अफ़ग़ानिस्तान के लिए संयुक्त राष्ट्र के उप विशेष प्रतिनिधि, मार्कस पोट्ज़ेल काबुल में यूएन न्यूज से बात करते हुए.
UN News / David Mottershead
अफ़ग़ानिस्तान के लिए संयुक्त राष्ट्र के उप विशेष प्रतिनिधि, मार्कस पोट्ज़ेल काबुल में यूएन न्यूज से बात करते हुए.

मार्कस पॉटज़ेल: अफ़ग़ानिस्तान अभी भी दुनिया का सबसे बड़ा (अफ़ीम) उत्पादक है. हाल ही में [तालेबान द्वारा] पोस्ता की खेती, उत्पादन और तस्करी पर प्रतिबन्ध लगाया गया है. प्रारम्भिक क्षेत्रीय रिपोर्टों से पता चलता है कि पोस्ता की खेती में गिरावट आई है, जिसकी हम सराहना करते हैं.

ड्रग पुनर्वास केन्द्रों के लिए किए जा रहे प्रयास भी स्पष्ट हैं. सत्तारूढ़ अधिकारी, इन केन्द्रों में दवा, भोजन और कपड़ों के लिए अधिक [बजटीय धनराशि] आवंटित कर सकते हैं. लेकिन, मैं अन्तरराष्ट्रीय समुदाय से भी अपनी कोशिशें बढ़ाने का आहवान करता हूँ. हम इस क्षेत्र के उन देशों के साथ सहयोग करते हैं जो वास्तव में नशीली दवाओं के पुनर्वास पर, सत्तारूढ़ अधिकारियों का समर्थन करने के इच्छुक हैं.

आजीविकाओं के लिए, अन्तरराष्ट्रीय समुदाय द्वारा अधिक समर्थन मिलना चाहिए क्योंकि यह सभी के हित में है - अफ़ग़ानों के हित में, साथ ही पश्चिमी दानदाता देशों व क्षेत्रीय देशों के भी, जो ख़ुद भी इन मादक पदार्थों के दुरुपयोग व तस्करी का शिकार हैं.

UNAMA यहाँ के राजनीतिक नेतृत्व के साथ मिलकर [इस मुद्दे] पर काम कर रहा है, और हम नशीली दवाओं के दुरुपयोग व नशीली दवाओं की तस्करी से लड़ने एवं वैकल्पिक आजीविका के साधन प्रदान करने के लिए समान आधार खोजने की कोशिश कर रहे हैं.

यूएन न्यूज़: अफ़ग़ानिस्तान में आप, ज़मीनी स्तर पर काम करने की आवश्यकता व उस प्रशासन के साथ काम करने के बीच सन्तुलन कैसे बना पाते हैं, जो कई लोगों की नज़र में नाजायज़ हैं?

मार्कस पॉटज़ेल: यहाँ हमारी गतिविधि का आधार वह जनादेश है, जो सुरक्षा परिषद ने हमें दिया है, जो हमें सत्तारूढ़ प्रशासन समेत समस्त राजनैतिक वार्ताकारों के साथ सम्वाद के लिए प्रोत्साहित करता है.

हमें ज़मीनी हक़ीकत का सामना करना होगा. तालेबान का नियंत्रण...लगभग पूरे देश पर है. और यह तालेबान के लिए देश को स्थिर और शान्त करने का एक अवसर है. यह एक ज़िम्मेदारी भी है क्योंकि उन्हें लोगों को सेवाएँ प्रदान करनी हैं. उन्हें सुशासन और क़ानून का शासन प्रदान करना होगा. यहीं पर ख़ामी दिखती है. अधिकारियों को हमसे बात करने में दिलचस्पी है क्योंकि वे हमें मतभेद पाटने के ज़रिये के रूप में देखते हैं. 

हम अफ़ग़ानिस्तान से बाहरी दुनिया तक सन्देश पहुँचाने में मदद कर सकते हैं और बाहरी दुनिया से अफ़ग़ानिस्तान तक भी. पूरे देश में हमारे 11 क्षेत्रीय कार्यालय हैं. तो, हम यहाँ हैं. हम अन्तरराष्ट्रीय समुदाय की आँखें और कान, व एंटीना हैं. हम सन्देश देते हैं, और सत्तारूढ़ अधिकारियों से बात करके, सहयोग को बढ़ावा देने और उन्हें इस अलगाव से बाहर निकलने में मदद करने का भी प्रयास करते हैं.

हमारा मानना ​​है कि अफ़ग़ानिस्तान के भविष्य के लिए अलगाव कोई विकल्प नहीं है, कम से कम अच्छा विकल्प तो बिल्कुल नहीं है.

15 जून 2022 को, अफ़ग़ानिस्तान के हेरात में स्थित यूनीसेफ़ समर्थित फ़तह गर्ल्स स्कूल में प्रवेश करते हुए छात्र.
UNICEF / Mark Naftalin
15 जून 2022 को, अफ़ग़ानिस्तान के हेरात में स्थित यूनीसेफ़ समर्थित फ़तह गर्ल्स स्कूल में प्रवेश करते हुए छात्र.

यूएन न्यूज़: महिलाओं और लड़कियों की शिक्षा पर प्रतिबन्ध देश के विकास के लिए विनाशकारी रहा है. यहाँ रहते हुए, हमने यही बात तालेबान द्वारा संचालित संस्थानों में काम करने वाले लोगों से भी सुनी है. ऐसे मुद्दे पर बीच का रास्ता कैसे निकाला जा सकता है?

मार्कस पॉटज़ेल: इस मुद्दे पर कोई बीच का रास्ता नहीं है. अफ़ग़ानिस्तान दुनिया का एकमात्र ऐसा देश है जो लड़कियों को छठी कक्षा के बाद स्कूल या विश्वविद्यालय जाने की अनुमति नहीं देता है. इस बारे में चर्चा की कोई बात ही नहीं है; यह कोई सौदेबाजी की चीज़ नहीं है. इसे उलटना ही होगा.

मुझे यकीन है कि तालेबान सहित अधिकांश अफ़ग़ान आबादी इन फ़रमानों के ख़िलाफ़ है. वे लड़कियों की शिक्षा के पक्षधर हैं. मुझे सत्तारूढ़ प्रशासन का ऐसा कोई अधिकारी नहीं मिला है, जो लड़कियों के स्कूल या विश्वविद्यालय जाने पर प्रतिबंध लगाने वाले आदेशों के पक्ष में हो.

[ये फ़रमान] आर्थिक प्रगति के लिए हानिकारक हैं. लड़कियों को अपने अधिकार मिलने चाहिए. इस समाज में महिलाओं को अपनी बात कहने का हक़ होना चाहिए. 

[सत्तारूढ़ अधिकारियों] को यथाशीघ्र प्रतिबन्ध रद्द करने चाहिए. अन्यथा, अफ़ग़ानिस्तान के अन्तरराष्ट्रीय समुदाय के साथ सम्बन्धों पर हमेशा के लिए काली छाया छा जाएगी.

यूएन न्यूज़: यदि विशाल बहुमत में अफ़ग़ान, जिसमें उनके अपने लोग भी शामिल हैं, इस प्रतिबन्ध से असहमत हैं, तो तालेबान प्रशासन इन्हें क्यों लागू करता जा रहा है?

मार्कस पॉटज़ेल: कन्दाहार के आमीर और उनका आन्तरिक गुट, धार्मिक तर्कों और सांस्कृतिक आख्यानों का मिलाजुला तर्क देते हैं [फ़रमानों को लागू करने के लिए]. लेकिन, धार्मिक तर्क का आधार लिया जाए तो दुनिया भर के इस्लामी देशों में यह प्रतिबंध नहीं है. 

दुनिया के किसी अन्य देश में यह प्रतिबन्ध नहीं है. कुरान में "इकरा" का उल्लेख है, जिसका अर्थ है "पढ़ो." यह सभी लोगों - पुरुषों, महिलाओं, लड़कों व लड़कियों - को पढ़ने, लिखने, सीखने के लिए प्रोत्साहित करता है.

और संस्कृति की दृष्टि से इस देश में लड़के-लड़कियों, दोनों के सीखने की परम्परा है. गणतंत्र के तहत, हर लड़की स्कूल नहीं जाती थी. दूरदराज़ के इलाक़ों में उन्हें अवसर नहीं मिलता था, लेकिन सम्विधान और क़ानून में उन्हें यह अधिकार दिया गया था, जो उन्हें अब हासिल नहीं है.

यूएन न्यूज़: क्या तालेबान तक यह सन्देश पहुँचाने में आपको इस्लामी देशों से किसी तरह का सहयोग मिला है?

मार्कस पॉटज़ेल: हाँ, बिल्कुल. इस्लामी सहयोग संगठन (OIC) का एक प्रतिनिधिमंडल यहाँ आया था और उसने यह समझाने की कोशिश की कि शिक्षा इस्लाम का हिस्सा है. 

हालाँकि अभी तक उससे कोई लाभ नहीं हुआ है, लेकिन वे वापस आएँगे. ये सऊदी अरब, पाकिस्तान, क़तर और इंडोनेशिया जैसे इस्लामी देशों के विद्वान थे. 

[पिछली यात्रा के दौरान] एक महिला भी, विद्वानों के प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा थीं. इस्लामी देशों के पास शायद बेहतर पहुँच है और वे तालेबान को बेहतर तरीक़े से आश्वस्त कर सकते हैं. हमें उम्मीद है कि आख़िरकार हमारे सभी प्रयास सफल होंगे.

काबुल और जलालाबाद के बीच स्थित एक पर्वत श्रृँखला और घुमावदार सड़क.
UN News/Ezzat El-Ferri
काबुल और जलालाबाद के बीच स्थित एक पर्वत श्रृँखला और घुमावदार सड़क.

यूएन न्यूज़: राजनैतिक परिवर्तन से पहले, तालेबान, संयुक्त राष्ट्र के कामकाज के लिए सबसे बड़ा ख़तरा थे. अगस्त 2021 के बाद अब अफ़ग़ानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र के काम के लिए सबसे बड़ी चुनौती क्या है?

मार्कस पॉटज़ेल: सुरक्षा सन्दर्भ में, निश्चित रूप से यह आइसिल - ख़ोरासान प्रान्त (दाएश) होगा.

संयुक्त राष्ट्र के लिए परिस्थितियाँ और भी कठिन होती जा रही हैं क्योंकि अफ़ग़ान महिलाओं को अब गैर-सरकारी संगठनों (NGOs)  के लिए काम करने की अनुमति नहीं है, ना ही उन्हें संयुक्त राष्ट्र के लिए काम करने की अनुमति है. 

इससे हालात अधिक जटिल हो रहे हैं, क्योंकि हमारे काम में महिलाओं की अहम भूमिका होती है. महिलाओं के बिना, सहायता संगठनों को चालू रखना बहुत कठिन है... हमें महिलाओं तक पहुँचने के लिए, महिलाओं की आवश्यकता है.

इस देश में महिलाओं के नेतृत्व वाले हज़ारों घर हैं क्योंकि परिवारों के बहुत से पुरुषों ने युद्ध में अपनी जान गँवाई है. महिलाओं के बिना, ग़ैर- सरकारी संगठन और संयुक्त राष्ट्र संगठन ठीक से काम नहीं कर पाते हैं [जिससे] कम लोगों तक सहायता पहुँच पाती है.

यूएन न्यूज़: सत्तारूढ़ प्रशासन के लिए आपका क्या सन्देश है?

मार्कस पॉटज़ेल: मेरा मानना ​​है कि अफ़ग़ानिस्तान के सत्तारूढ़ अधिकारियों को, लड़कियों को छठी कक्षा के आगे भी स्कूल जाने देना चाहिए. उन्हें लड़कियों को विश्वविद्यालय जाने देना चाहिए. 

उन्हें महिलाओं को अन्तरराष्ट्रीय एनजीओ, राष्ट्रीय एनजीओ और संयुक्त राष्ट्र संगठनों में काम करने देना चाहिए. और उन्हें महिलाओं को सामाजिक जीवन में भाग लेने देना चाहिए. 

यदि ऐसा होता है, तो मैं कल्पना कर सकता हूँ कि अफ़ग़ानिस्तान दोबारा अन्तरराष्ट्रीय समुदाय का हिस्सा बन सकेगा, और अन्तरराष्ट्रीय दानदाता भी पुनर्विचार कर, अफ़ग़ानिस्तान के लिए कार्रवाई मज़बूत करेंगे. 

अफ़ग़ानिस्तान को अन्तरराष्ट्रीय मदद की ज़रूरत है. और संयुक्त राष्ट्र के रूप में, हम उन्हें, ख़ुद अपनी सहायता करने में मदद करना चाहते हैं.