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जल, साफ़-सफ़ाई व स्वच्छता की बेहतर सुलभता से, हर साल 14 लाख ज़िन्दगियों की रक्षा सम्भव

एक माँ और बेटी अपने घर में एक नए नल का उपयोग करते हुए.
© UNICEF/Vinay Panjwani
एक माँ और बेटी अपने घर में एक नए नल का उपयोग करते हुए.

जल, साफ़-सफ़ाई व स्वच्छता की बेहतर सुलभता से, हर साल 14 लाख ज़िन्दगियों की रक्षा सम्भव

स्वास्थ्य

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की नवीनतम रिपोर्ट दर्शाती है कि विश्व की आधी आबादी की अब भी सुरक्षित पेयजलस्वच्छता और साफ़-सफ़ाई व्यवस्था (WASH) तक पहुँच नहीं हैजिनकी सुलभता के ज़रियेवर्ष 2019 में कम से कम 14 लाख मौतों को टाला जा सकता था.

यूएन स्वास्थ्य एजेंसी के पर्यावरण, जलवायु परिवर्तन और स्वास्थ्य विभाग की निदेशक, डॉक्टर मारिया नेयरा ने बताया कि असुरक्षित पेयजल, स्वच्छता और साफ़-सफ़ाई (WASH) से जुड़े जोख़िमों में वृद्धि हो रही है, जिनकी वजह हिंसक संघर्ष, रोगाणुरोधी प्रतिरोध का उभार, हैज़ा मामलों में बढ़ोत्तरी होने, और जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न दीर्घकालिक ख़तरे हैं.

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इस पृष्ठभूमि में, WASH सेवाओं में निवेश किए जाने की पहले से कहीं अधिक आवश्यकता बताई गई है.

Burden of disease attributable to unsafe drinking water, sanitation, and hygiene: 2019’ शीर्षक वाली इस रिपोर्ट में, विश्व स्वास्थ्य संगठन के 183 सदस्य देशों में सुरक्षित पेयजल, साफ़-सफ़ाई और स्वच्छता के अभाव के कारण होने वाली बीमारियों के बोझ का अनुमान व्यक्त किया गया है.

ये अनुमान मुख्यत: चार स्वास्थ्य नतीजों पर आधारित हैं: दस्त, श्वसन तंत्र सम्बन्धी संक्रमण, अल्पपोषण, और मृदा (soil) से फैलने वाले कृमि संक्रमण.

बीमारियों का बोझ

एक अन्य महत्वपूर्ण पैमाना, विकलांगता या बीमारी के बोझ के कारण किसी व्यक्ति की जीवन अवधि पर होने वाले असर है, जिसे ‘Disability-adjusted life years/DALYs कहा जाता है. 

इसके ज़रिये यह आंका जाता है कि कोई बीमारी और चिकित्सा अवस्था किस प्रकार व्यक्ति के जीवन की अवधि और जीवन गुणवत्ता को प्रभावित करती है.

सरल शब्दों में एक DALY का अर्थ है बीमारी या मौत के जोखिम से पूर्ण, स्वस्थ जीवन का एक वर्ष खोने की आशंका. बीमारी की गम्भीरता बढ़ने से ऐसे वर्षों की संख्या बढ़ जाती है.

रिपोर्ट बताती है कि दस्त रोग का बोझ सबसे अधिक देखा गया, जोकि 10 लाख से अधिक मौतों और स्वस्थ जीवन के साढ़े पाँच करोड़ वर्ष खोने (DALYs) के लिए ज़िम्मेदार था. 

हाथों की स्वच्छता का पर्याप्त ढंग से ध्यान ना रखे जाने से होने वाले श्वसन तंत्र सम्बन्धी संक्रमण दूसरे स्थान पर थे,  जिनकी वजह से तीन लाख 56 हज़ार मौतें हुईं और स्वस्थ जीवन के एक करोड़ 70 लाख वर्ष खो गए.

बाल स्वास्थ्य पर असर

पाँच साल से कम उम्र के बच्चों में, असुरक्षित WASH व्यवस्था के कारण तीन लाख 95 हज़ार मौतें हुई और स्वस्थ जीवन के तीन करोड़ 70 लाख वर्षों का नुक़सान हुआ.

इनमें दस्त से होने वाली दो लाख 73 हज़ार और श्वसन तंत्र सम्बन्धी संक्रमण से होने वाली एक लाख 12 हज़ार मौतें हैं.

विश्व भर में, पाँच वर्ष से कम उम्र के बच्चों की मौतों के लिए, ये दोनों संक्रामक बीमारियाँ बड़ी वजह हैं.

रिपोर्ट में विभिन्न क्षेत्रों और आय समूहों के बीच बड़ी असमानताएँ देखी गईं. WASH सेवाओं की क़िल्लत के कारण होने वाली कुल मौतों में से तीन-चौथाई से अधिक विश्व स्वास्थ्य संगठन के अफ़्रीकी और दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्रों में दर्ज की गईं, जबकि 89 प्रतिशत मौतें निम्न- और निम्नतर-मध्यम आय वाले देशों में थीं.

मगर, उच्च आय वाले देशों पर भी जोखिम मंडरा रहा है. विशेषज्ञों के अनुसार इन देशों में दस्त रोग के 18 फ़ीसदी बोझ को बेहतर साफ़-सफ़ाई और स्वच्छता उपायों के ज़रिये रोका जा सकता है.

अहम उपाय

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने सुरक्षित पेयजल, स्वच्छता और साफ़-सफ़ाई व्यवस्था के अभाव से होने वाली बीमारियों के बोझ को कम करने के लिए, यूएन एजेंसियों, बहुपक्षीय साझेदारों, निजी सैक्टर और नागरिक समाज संगठनों के समर्थन के साथ, देशों की सरकारों से निम्न क़दम उठाने का आग्रह किया है:

- सर्वजन के लिए सुरक्षित WASH सेवाओं को वास्तविकता में बदलने के लिए कार्रवाई में तेज़ी लानी होगी

- सर्वाधिक निर्धन और सबसे वंचित लोगों पर ध्यान केन्द्रित किया जाना होगा

- आम आबादी के लिए सुरक्षित सेवाओं की सुलभता पर बेहतर आँकड़ों के लिए राष्ट्रीय निगरानी प्रणालियों को आवश्यकता अनुसार ढालना होगा

विश्व स्वास्थ्य संगठन में वरिष्ठ अधिकारीब्रूस गॉर्डन ने कहा कि ये स्पष्ट है कि सुरक्षित जल, स्वच्छता और साफ़-सफ़ाई सेवाओं तक अपर्याप्त पहुँच, विशेष रूप से सबसे कमज़ोर आबादी के लिए एक बड़ा और रोकथाम योग्य स्वास्थ्य जोखिम पैदा कर रही है.

उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि इस रिपोर्ट में जिन स्वास्थ्य लाभों को प्रस्तुत किया गया है, उन्हें प्राथमिकता दिया जाना ना केवल नैतिक अनिवार्यता है, बल्कि निम्न- और मध्य-आय वाले देशों और उच्च-आय वाले देशों में हाशिए पर रह रहे समुदायों में बीमारियों के ग़ैरआनुपातिक बोझ से निपटने के लिए भी अहम है.