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स्वच्छ व स्वस्थ महासागरों पर लक्षित, 11.5 करोड़ डॉलर की नई पहल

समुद्र में छोटी मछलियों के बीच तैरते हुए प्लास्टिक प्रदूषण का पानी के नीचे का दृश्य, जिसमें थैले और मलबा शामिल है।
Unsplash/Naja Bertolt Jensen विश्व भर में समुद्री तटों और महासागर की गहराइयों में प्लास्टिक प्रदूषण की भरमार है.

स्वच्छ व स्वस्थ महासागरों पर लक्षित, 11.5 करोड़ डॉलर की नई पहल

एसडीजी

संयुक्त राष्ट्र खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) और उसके चार साझीदार संगठन, अपनी एक नई संयुक्त पहल के ज़रिये तटीय इलाक़ों व समुद्री किनारों पर भूमि-आधारित प्रदूषण पर रोक लगाने में देशों को सहायता प्रदान करेंगे. 

इस नई पहल के तहत तटीय इलाक़ों में स्वच्छता अभियान के लिए साढ़े 11 करोड़ डॉलर की धनराशि अनुदान में दिए जाने की योजना है. वैश्विक पर्यावरण केन्द्र (GEF) की 64वीं, परिषद बैठक के दौरान ‘स्वच्छ व स्वस्थ महासागर’ नामक पहल को स्वीकृति दी गई.

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यूएन कृषि एजेंसी (FAO), एशियाई विकास बैंक (ADB), पुनर्निर्माण व विकास के लिए योरोपीय बैन्क (EBRD) और लातिन अमेरिका विकास बैन्क (CAF) के साथ, अन्तर-सरकारी महासागार विज्ञान आयोग इस पहल का हिस्सा होंगे.

FAO के महानिदेशक क्यू डोंग्यू ने बताया कि एक साथ मिलकर, बेहतर उत्पादन, बेहतर पोषण, बेहतर पर्यावरण और एक बेहतर जीवन के लिए प्रदूषण के बहाव का रुख़ मोड़ा जा सकता है. 

वर्ष 1950 के बाद से अब तक महासागर, अपनी लगभग दो फ़ीसदी ऑक्सीजन खो चुके हैं, जिसके कारण वहाँ मृत क्षेत्र (dead zones) पनपे हैं.

ऐसे क्षेत्रों में समुद्री जीवन के फलने-फूलने के लिए पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन नहीं होती है. 

उर्वरक के अत्यधिक इस्तेमाल, मवेशियों से होने वाला जैविक अपशिष्ट और दूषित जल समेत अन्य वजहों से भूमि-आधारित स्रोतों से प्रदूषण बढ़ रहा है. 

महासागरों के समक्ष चुनौतियाँ

लातिन अमेरिकी विकास बैंक के कार्यकारी अध्यक्ष सर्गियो डिएज़-ग्रैनाडोस ने बताया कि महासागरों के समक्ष एक गम्भीर समस्या है, जोकि मुख्यत: जलवायु परिवर्तन के कारण उपजी और उसी वजह से रफ़्तार भी पकड़ रही है.

समुद्री जल के बढ़ते तापमान व अम्लीकरण, समुद्री जलस्तर में वृद्धि, और समुद्री संसाधनों के अत्यधिक दोहन से एक संकट उत्पन्न हो गया है.

“यह वित्त पोषण, जलवायु परिवर्तन के विरुद्ध लड़ाई की अगुवाई के बहुपक्षीय संकल्प को फिर से पुष्टि प्रदान करता है और ब्लू इकॉनॉमी [समुद्री अर्थव्यवस्था] को बढ़ावा देता है.”

लम्बे समय तक पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन उपलब्ध ना होने की अवस्था (hypoxia) में प्रवाल भित्तियाँ नष्ट हो सकती हैं, तटीय मछलियों की मूल्यवान प्रजातियाँ भी अधिक ऑक्सीजन वाले इलाक़ों का रुख़ कर सकती हैं, और समुद्री प्रजनन दर में गिरावट दर्ज की जा सकती है. 

मानव व महासागर स्वास्थ्य की रक्षा

स्वच्छ व स्वस्थ महासागर की यह रणनीति, नीतियों व नियामन सम्बन्धी नवाचारी उपायों, बुनियादी ढाँचे में निवेश और प्रकृति-आधारित समाधानों के ज़रिये महासागरों से भूमि-आधारित प्रदूषण पर रोक लगाने पर लक्षित है. 

इस कार्यक्रम में महासागरों में प्रदूषण के भूमि-आधारित स्रोतों पर जानकारी जुटाई जाएगी, ताकि पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन उपलब्ध ना होने के प्रभावों को समझा जा सके.

साथ ही, महासागर विज्ञान के ज़रिये मानव व महासागरों के स्वास्थ्य में बेहतरी लाने के लिए समाधान विकसित किए जाएंगे.