2022: सशस्त्र संघर्षों में फँसे बच्चों पर गम्भीर असर, स्कूलों व अस्पतालों पर बढ़े हमले
संयुक्त राष्ट्र की एक शीर्ष अधिकारी ने आगाह किया है कि सशस्त्र टकरावों के दौरान अन्तरराष्ट्रीय क़ानून के उल्लंघन मामलों का बच्चों पर विनाशकारी असर हो रहा है. वर्ष 2022 के दौरान स्कूलों व अस्पतालों पर हुए हमलों में 112 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है.
बच्चों और सशस्त्र संघर्ष पर यूएन की विशेष प्रतिनिधि वर्जीनिया गाम्बा ने मंगलवार को यूएन महासचिव की नवीनतम वार्षिक रिपोर्ट जारी की.
रिपोर्ट के अनुसार, 2022 में गम्भीर उल्लंघन के 27 हज़ार 180 मामलों को दर्ज किया गया, जोकि उससे पहले के साल की तुलना में वृद्धि को दर्शाता है.
ये आँकड़ा केवल उन हनन मामलों पर आधारित है, जिनकी पुष्टि सम्भव हो पाई है, और इसलिए वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक होने की आशंका है.
रिपोर्ट में मुख्यत: चार प्रमुख श्रेणियों पर ध्यान केन्द्रित किया गया है.
- सशस्त्र गुटों और बलों में बच्चों की भर्ती व उनका इस्तेमाल
- बच्चों को जान से मारना या अपंग बनाना
- बलात्कार व यौन हिंसा
- अपहरण
यह रिपोर्ट 24 विभिन्न सशस्त्र टकरावों में हालात के आकलन पर आधारित है और इसके अनुसार, दो-तिहाई से अधिक उल्लंघन मामलों में पीड़ित लड़के हैं.
कुल आठ हज़ार 831 बच्चे या तो मारे गए या फिर वे अपंग हो गए. सात हज़ार 622 को हथियारबन्द गुटों व बलों द्वारा भर्ती किए जाने की पुष्टि हुई.
विशेष प्रतिनिधि वर्जीनिया गाम्बा ने न्यूयॉर्क में पत्रकारों को जानकारी देते हुए बताया कि अन्तरराष्ट्रीय क़ानून के उल्लंघन के सबसे अधिक मामले काँगो लोकतांत्रिक गणराज्य, इसराइल, फ़लस्तीन, सोमालिया, सीरिया, यूक्रेन, अफ़ग़ानिस्तान और यमन में दर्ज किए गए.
रिपोर्ट के अनुसार, गम्भीर उल्लंघनों की निगरानी व सत्यापन प्रक्रिया अब भी बेहद चुनौतीपूर्ण है, और सीमित पहुँच होने के कारण अक्सर ऐसे मामलों की वास्तविक संख्या का पता नहीं चल पाता है.
म्याँमार, दक्षिण सूडान और बुरकिना फ़ासो में हालात सबसे अधिक ख़राब हुए हैं.
स्कूलों व अस्पतालों पर निशाना
बताया गया है कि स्कूलों पर एक हज़ार 163 हमले और अस्पतालों पर 647 हमलों की पुष्टि हुई, जोकि 112 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है.
विशेष प्रतिनिधि ने कहा कि सशस्त्र सेनाओं और हथियारबन्द गुटों ने बड़े पैमाने पर स्कूलों का सैन्य उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल किया, जोकि एक बेहद चिन्ताजनक रुझान है.
लगभग ढाई हज़ार बच्चों को हिरासत में लिया गया, जबकि ऐसा बहुत कम अवधि के लिए और केवल अन्तिम विकल्प के रूप में ही किया जाना चाहिए.
यूक्रेन युद्ध
यूएन प्रतिनिधि ने कहा कि यूक्रेन में रूसी सैन्य बलों और उसके सहयोगी सशस्त्र गुटों का नाम इस रिपोर्ट में विशेष रूप से जोड़ा गया है.
इसकी एक वजह, यूक्रेन पर रूसी आक्रमण के दौरान स्कूलों व अस्पतालों पर बड़ी संख्या में किए गए हमले और सैन्य अभियानों के दौरान बच्चों के मारे जाने की घटनाएँ हैं.
उन्होंने कहा कि रूस ने रॉकेट प्रणालियों, हवाई हमलों और रिहायशी इलाक़ों में गोलाबारी का इस्तेमाल किया, जिससे बड़ी संख्या में लोग हताहत हुए.
वर्जीनिया गाम्बा ने बताया कि यूक्रेन के सशस्त्र बलों को भी इस रिपोर्ट के ज़रिये, महासचिव गुटेरेश की ओर से एक चेतावनी जारी की गई है, जिसकी वजह युद्ध के दौरान स्कूलों व अस्पतालों पर हुए हमले हैं.
उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि रक्षात्मक कार्रवाई के दौरान भी अन्तरराष्ट्रीय मानव कल्याण क़ानून का ख़याल रखे जाने की आवश्यकता है. इस क्रम में, उन्होंने यूक्रेन सरकार द्वारा बेहतरी के लिए क़दम उठाए जाने की सराहना की है.
इसराइल, फ़लस्तीन का नाम नहीं
विशेष प्रतिनिधि ने कहा कि दोषियों की वैश्विक सूची में इसराइल और फ़लस्तीन का नाम नहीं जोड़ा जाएगा. उन्होंने बताया कि मई 2021 में ग़ाज़ा पर की गई कार्रवाई और जवाबी मिसाइल हमलों को फिर से ना दोहराए जाने की चेतावनी को सुना गया है.
उनके अनुसार, वर्ष 2022 में इसराइली हवाई कार्रवाई में अहम गिरावट दर्ज की गई.
विशेष प्रतिनिधि ने कहा कि इस रिपोर्ट को प्रकाशित करने का मूल उद्देश्य ही व्यवहार में परिवर्तन लाना और संरक्षण उपायों को मज़बूती प्रदान करना है.
मगर, रिपोर्ट में पश्चिमी तट और अन्य क़ाबिज़ इलाक़ों में इस साल अब तक हिंसा का ऊँचा स्तर जारी रहने पर चिन्ता जताई है.
दोषियों की सूची में जोड़े गए नामों में डीआरसी में सक्रिय एम23, माइ-माइ ज़ायरे और कोडेको समेत अन्य हथियारबन्द गुट हैं. बुरकिना फ़ासो में भी दो ग़ैर-सरकारी गुटों का नाम शामिल किया गया है.
वर्जीनिया गाम्बा ने कहा कि म्याँमार में सैन्य शासकों का नाम सूची में आने को रेखांकित किया, जिन्हें स्कूलों व अस्पतालों पर हमलों की वजह से जोड़ा गया है.