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अफ़ग़ानिस्तान: आम नागरिक चुका रहे हैं आईईडी विस्फोटों की बड़ी क़ीमत, नई रिपोर्ट

अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी काबुल का एक दृश्य.
© Unsplash/Mohammad Husaini
अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी काबुल का एक दृश्य.

अफ़ग़ानिस्तान: आम नागरिक चुका रहे हैं आईईडी विस्फोटों की बड़ी क़ीमत, नई रिपोर्ट

शान्ति और सुरक्षा

अफ़ग़ानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन (UNAMA) की एक नई रिपोर्ट दर्शाती है कि अगस्त 2021 में तालेबान के सत्ता के आने के बाद, हिंसा में हताहत होने वाले आम नागरिकों की संख्या में मोटे तौर पर कमी आई है. मगर, आईईडी विस्फोट की घटनाएँ अब भी एक बड़ी चिन्ता हैं. देश में उपासना स्थलों, शिक्षण केन्द्रों और अल्पसंख्यक हज़ारा समुदाय के विरुद्ध हमलों में उछाल दर्ज किया गया है. 

15 अगस्त 2021 को देश की सत्ता पर तालेबान का नियंत्रण स्थापित होने के बाद से 30 मई 2023 तक की अवधि में तीन हज़ार 774 आम लोगों के हताहत होने की पुष्टि हुई है. 

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इनमें से तीन-चौथाई आम नागरिक, उपासना स्थलों, स्कूलों, बाज़ारों समेत अन्य रिहायशी इलाक़ों में आईईडी विस्फोट का इस्तेमाल किए जाने से हताहत हुए. 

रिपोर्ट के अनुसार, अफ़ग़ानिस्तान की सत्ता तालेबान द्वारा हथिया लिए जाने के तुरन्त बाद, स्वयंभू संगठन आईसिल ख़ोरासन प्रान्त (आइसिल केपी) द्वारा किए जाने वाले आईईडी हमलों और उसमें हताहत होने वाले आम नागरिकों की संख्या में तेज़ी देखी गई.

आइसिल केपी और अन्य गुटों तत्वों द्वारा अंजाम दिए गए आत्मघाती हमले, आईईडी विस्फोटों से आम नागरिकों को पहुँचने वाले नुक़सान की एक बड़ी वजह थे. 

यूएन मिशन के आँकड़े दर्शाते हैं कि तालेबान के सत्ता में आने के पहले तीन वर्ष की अवधि की तुलना में, आईईडी हमलों में आम नागरिकों के हताहत होने के मामलों में बड़ी वृद्धि हुई है. 

शिया मुसलमानों के उपासना स्थलों पर आईईडी हमलों में हताहतों की संख्या, इस अवधि के दौरान उनकी कुल संख्या का लगभग एक-तिहाई थी.

शिया उपासना स्थलों पर हमलों के अलावा, मुख्यत: हज़ारा समुदाय के स्कूलों व अन्य शिक्षण केन्द्रों, भीड़भाड़ भरी सड़कों और सार्वजनिक परिवहन को निशाना बनाकर हमले किए गए हैं, जिनमें कम से कम 345 लोग हताहत (95 मौतें, 250 घायल) हुए हैं. 

जाँच व रोकथाम उपायों पर बल

यूएन मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय (OHCHR) की प्रवक्ता लिज़ थ्रोसेल ने मंगलवार को ज़ोर देकर कहा कि आम लोगों और नागरिक प्रतिष्ठानों पर इन हमलों को रोका जाना होगा.

उन्होंने तालेबान प्रशासन से आईईडी हमलों की तुरन्त स्वतंत्र, निष्पक्ष, विश्वसनीय व पारदर्शी जाँच कराए जाने और जीवन के अधिकार की रक्षा के दायित्व का निर्वहन सुनिश्चित करने का आग्रह किया.

रिपोर्ट में तालेबान प्रशासन से तत्काल संरक्षण उपायों को लागू किए जाने की सिफ़ारिश की गई है, ताकि ऐसे हमलों को फिर होने से रोका जा सके. 

इस क्रम में, उपासना स्थलों, शैक्षणिक केन्द्रों और हज़ारा समुदायों वाले इलाक़ों में मौजूदा जोखिमों व सम्वेदनशीलताओं का आकलन किया जाना होगा. 

अफ़ग़ानिस्तान में इन हमलों में ऐसे समय में वृद्धि दर्ज की गई है जब देश पहले से ही एक मानवीय संकट से जूझ रहा है. 15 अगस्त 2021 से पहले भी, सशस्त्र टकराव और हिंसा से पीड़ित लोगों के लिए अति-आवश्यक दवाओं, वित्तीय व मनोसामाजिक समर्थन पाना मुश्किल था.

लेकिन अब हिंसा पीड़ितों के लिए ये सेवाएँ और अभी अधिक कठिन हो गई हैं, और इसका एक बड़ा कारण अति-आवश्यक सेवाओं के लिए सहायता धनराशि का अभाव है.