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अफ़ग़ानिस्तान: ड्रग्स की चुनौती से निपटने के लिए ज्ञान-आधारित उपायों का सहारा

अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी काबुल के ऐविसेन्ना ड्रग उपचार केन्द्र में एक व्यक्ति.
UN News / David Mottershead
अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी काबुल के ऐविसेन्ना ड्रग उपचार केन्द्र में एक व्यक्ति.

अफ़ग़ानिस्तान: ड्रग्स की चुनौती से निपटने के लिए ज्ञान-आधारित उपायों का सहारा

क़ानून और अपराध रोकथाम

अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी काबुल की हलचल भरी सड़कों से कुछ ही दूर, यूँ तो परछाइयों में अनेक जोखिम मंडराते हैं. मगर, पूरे देश को बर्बाद कर देने वाले मादक पदार्थों (ड्रग्स) संकट जितना ख़तरनाक कोई नहीं है. काबुल में सर्वोत्तम मानक के रूप में देखे जाने वाले एक ड्रग उपचार केन्द्र से होकर गुज़रना हृदय-विदारक अनुभव है.

इस एक हज़ार बिस्तर वाले केन्द्र में परिस्थितियाँ बहुत चुनौतीपूर्ण हैं. अफ़ग़ानिस्तान की सत्ता तालेबान द्वारा हथिया लिए जाने के बाद, इन केन्द्रों के लिए अन्तरराष्ट्रीय सहायता में बड़ी गिरावट आई है. 

इसके परिणामस्वरूप, यहाँ कर्मचारियों को ना तो पर्याप्त वेतन मिलता है और ना ही मरीज़ों की देखभाल करने के लिए उपयुक्त प्रशिक्षण.

यहाँ भोजन की उपलब्धता भी एक बड़ी चुनौती है और उससे उचित पोषण नहीं मिलता है. दवाओं की दराज़ लगभग खाली है.

इस केन्द्र पर मरीज़ों को लगभग 45 दिन की उपचार योजना को पूरा करना पड़ता है, जहाँ उन्हें चिकित्सा व परामर्श सेवाएँ मुहैया कराई जाती हैं, और उसके बाद उनकी समीक्षा की जाती है. 

यह इसलिए ज़रूरी है ताकि उन्हें घर-परिवार में वापिस लौटने के सम्बन्ध में निर्णय लिया जा सके.

एक व्यक्ति ने यूएन न्यूज़ को बताया कि वो यहाँ पिछले छह महीने से रह रहा है. “मेरे बच्चों का पेट भरने के लिए कोई नहीं है.”

तालेबान प्रशासन ने इन लोगों को यहाँ स्वैच्छिक रूप से रहने के लिए प्रोत्साहित किया है, जिनमें से अधिकाँश कुपोषण का शिकार और बेघर हैं. 

यह देखना दुखद है कि इस उपचार केन्द्र की बन्दीगृह जैसी दीवारों से बाहर भी हालात बेहद कठिन हो सकते हैं. गहरी निर्धनता और असुरक्षा से जूझने के अलावा, सड़कों पर जीवन व्यतीत करने वाले लोगों को कठोर सर्दी व चिलचिलाती गर्मी का सामना करना पड़ता है.

उनकी पीड़ा का मानो कोई अन्त ही नहीं है.

उज़्बेकिस्तान की राजधानी ताशकन्त में UNODC सूचना केन्द्र का प्रवेश द्वार.
UN News / Ezzat El-Ferri
उज़्बेकिस्तान की राजधानी ताशकन्त में UNODC सूचना केन्द्र का प्रवेश द्वार.

ज्ञान का केन्द्र

मगर, सीमा-पार उज़्बेकिस्तान में आशा का एक पुँज टिमटिमा रहा है.

देश की ऐतिहासिक राजधानी ताशकन्त में, मादक पदार्थों एवं अपराध पर यूएन कार्यालय (UNODC) का मध्य एशिया के लिए क्षेत्रीय कार्यालय है, जहाँ समर्पित पेशेवरों का एक समूह साथ मिलकर एक महत्वपूर्ण केन्द्र को तैयार करने में जुटा है.

यह ड्रग्स और अपराधों से पार-राष्ट्रीय ख़तरों का विश्लेषण व उन पर शोध करने के लिए एक सूचना केन्द्र है. 

इस केन्द्र की प्रमुख सलोमे फ़्लोरेस ने बताया कि उनकी टीम का मिशन स्पष्ट है: सही व्यक्तियों के लिए सही समय पर निष्पक्ष, वस्तुपरक और एकीकृत ज्ञान को गढ़ना.  

उन्होंने यूएन न्यूज़ बताया कि उचित जानकारी के साथ निर्णय लेने के लिए यह अहम है और इससे क्षेत्र में ड्रग समस्या के दायरे के प्रति बेहतर समझ विकसित करने में मदद मिलेगी, विशेष रूप से अफ़ग़ानिस्तान में.

अफ़ग़ानिस्तान में वर्ष 2022 में अफ़ीम का उत्पादन, देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 9 से 14 प्रतिशत था, और सिन्थेटिक ड्रग का उत्पादन भी तेज़ी से बढ़ रहा है. 

इस केन्द्र में सरकार, सोशल मीडिया, ओपन सोर्स, शोध, सांख्यिकी, और अफ़ग़ानिस्तान में कर्मचारियों समेत विभिन्न स्रोतों से डेटा प्राप्त होता है.

लेकिन, इनमें सबसे महत्वपूर्ण उपाय एक ऐसी कार्यप्रणाली है, जिसे यूएन कार्यालय ने पिछले तीन दशकों में तैयार किया है, और जिसका इस्तेमाल फ़सलों की पहचान करने में किया जाता है. 

यूएन एजेंसी ने ज़मीन सर्वेक्षण, अत्याधुनिक टैक्नॉलॉजी और सैटेलाइट तस्वीरों के मिश्रण से कुछ ऐसे हस्ताक्षर (signature) तैयार किए हैं, जिससे फ़सलों के बीच भेद कर पाना सम्भव होगा. 

इससे बेहद सटीकता से यह बताया जा सकता है कि पोस्ता अफ़ीम (poppy opium) का उत्पादन व उसकी फ़सल कहाँ तैयार की जा रही है.  

इन हस्ताक्षरों को पिछले कई वर्षों में विकसित किया गया है, जिसमें सैटेलाइट तस्वीरों की तुलना ज़मीनी सच्चाई (ground truths) के ज़रिये की जाती है. 

यूएन विशेषज्ञों को इस पद्धति के सहारे ऐसे सैकड़ों हस्ताक्षर तैयार करने में मदद मिली है, जिसमें सर्वेक्षणकर्ताओं को विशिष्ट जीपीएस स्थलों पर जाकर अपने आरम्भिक विश्लेषण को सत्यापित करना होता है. 

यूएन एजेंसी के पास अब उच्च सटीकता के साथ विभिन्न फ़सलों की शिनाख़्त करने की क्षमता है, जिनमें गेहूँ, कपास और पोस्ता अफ़ीम के साथ अन्य फ़सलों की पहचान की जा सकती है. 

इस टीम का कामकाज बहुत सम्वेदनशील और तकनीकी है. अफ़ग़ानिस्तान में मौजूदा राजनैतिक हालात के कारण डेटा की रक्षा करना बहुत आवश्यक है, ताकि किसानों के लिए दुष्परिणामों को टाला जा सके. 

यूएन एजेंसी के अनुसार, आरम्भिक डेटा को कभी भी इन्टरनैट पर साझा नहीं किया जाता और इसलिए इसकी हैकिंग नहीं की जा सकती है.

वैयक्तिक जानकारी मुहैया कराने के बजाय, डेटा को ज़िलों और प्रान्तों के आधार पर साझा किया जाता है.

UNODC के अहमद ऐस्माती अफ़ग़ानिस्तान से प्राप्त सैटेलाइट तस्वीरों का विश्लेषण कर रहे हैं.
UN News / David Mottershead
UNODC के अहमद ऐस्माती अफ़ग़ानिस्तान से प्राप्त सैटेलाइट तस्वीरों का विश्लेषण कर रहे हैं.

‘ए टीम’

इस सूचना केन्द्र में मुख्यत: चार अफ़ग़ान नागरिक हैं, जिनके पास दशकों का ज़मीनी अनुभव है. वे पहले अफ़ग़ानिस्तान में UNODC टीम के तौर पर ज़मीनी दौरे और सर्वेक्षण का हिस्सा रह चुके हैं. 

यूएन एजेंसी ने तालेबान के सत्ता में आने के बाद अपनी उन गतिविधियों को रोक दिया, लेकिन वे नियमित रूप से अफ़ग़ानिस्तान में अपने सहकर्मियों के सम्पर्क में हैं, जिनसे महत्वपूर्ण डेटा प्राप्त होता है, विशेष रूप से ड्रग क़ीमतों पर.

ज़मीनी सर्वेक्षणकर्ताओं और विश्लेषकों के रूप में, अफ़ग़ान सहकर्मियों ने अफ़ीम की खेती की निगरानी करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. 

अफ़ग़ान नागरिकों के लिए ज़मीनी स्तर पर काम करना बेहद ख़तरनाक साबित हो सकता है. 

सद्दीक़ी (वास्तविक नाम नहीं) ऐसे ही एक कर्मचारी हैं, जिनके लिए अपनी पहचान गुप्त रखना आवश्यक है.

उन्होंने अपना तकनीकी काम होने और यूएन स्टाफ़ सदस्य के तौर पर मिले संरक्षण का उल्लेख करते हुए बताया कि अफ़ग़ानिस्तान में हालात बहुत अलग हैं. 

सद्दीक़ी ने कहा कि UNODC के लिए काम करते हुए वह बेहद गर्वित महसूस करते हैं, जोकि देश के लिए बहुत लाभकारी है, और उन्हें उम्मीद है कि धीरे-धीरे सब कुछ बेहतर हो जाएगा. 

सद्दीक़ी की तरह, अहमद ऐस्माती भी यूएन एजेंसी के लिए पिछले 16 वर्ष से काम कर रहे हैं. उन्होंने एक सर्वेक्षणकर्ता के तौर पर शुरुआत की थी और अपने परिवार को अफ़ग़ानिस्तान से बाहर निकाल पाना उनके लिए सम्भव रहा. 

ऐस्माती ने बताया कि उनके कई सहकर्मी सर्वेक्षण पूरा करने की अपनी ज़िम्मेदारी निभाते समय अपना जीवन गँवा चुके हैं.

उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि सैटेलाइट तस्वीरों को सत्यापित करने और ज़मीनी वास्तविकताओं को प्रदान करने पर आधारित उनका काम बहुत महत्वपूर्ण है और इससे UNODC के लिए सुदूर सम्वेदन गतिविधियों (remote sensing) को संचालित करने की क्षमता का निर्माण हुआ है. 

अफ़ग़ानिस्तान के कापिसा प्रान्त में पोस्ता अफ़ीम का खेत. (फ़ाइल)
UNODC
अफ़ग़ानिस्तान के कापिसा प्रान्त में पोस्ता अफ़ीम का खेत. (फ़ाइल)

डेटा की तटस्थता

अफ़ग़ानिस्तान, विश्व में अफ़ीम का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता देश है, और वैश्विक बाज़ार में इसका हिस्सा लभग 80 फ़ीसदी है. देश में ड्रग सेवन एक बड़ी समस्या है. 

इसके मद्देनज़र, यूएन केन्द्र ने अपना ध्यान मुख्य रूप से बेहद मुनाफ़े वाले पदार्थ के उत्पादन व उपज की निगरानी करने पर केन्द्रित किया है, जोकि हेरोइन बनाने के काम में लाया जाता है.

मध्य एशिया के लिए यूएन एजेंसी की क्षेत्रीय प्रतिनिधि आशिता मित्तल ने बताया कि अफ़ग़ानिस्तान में अगस्त 2021 में राजनैतिक बदलाव होने के बाद, UNODC ने अपने ज़मीनी सर्वेक्षणों को रोक दिया है और सूचना केन्द्र को आकार दिया जा रहा है.

“यूएन के तौर पर, हम डेटा और अपने स्थान की तटस्थता में विश्वास करते हैं, चूँकि हमारी यह ज़िम्मेदारी है कि यदि आपको नीतियों व तौर-तरीक़ों के लिए तथ्य चाहिएं, तो आपको सत्यापन योग्य, गुणवत्तापरक डेटा की आवश्यकता होगी.”

बाज़ार में बदलाव

अफ़ीम की खेती व उत्पादन में वर्षों की वृद्धि के बाद, तथ्य दर्शाते हैं कि तालेबान द्वारा लागू की गई सख़्त पाबन्दियों की वजह से 2023 में तेज़ गिरावट दर्ज की गई है. 

विश्व ड्रग रिपोर्ट 2023 का यह एक मुख्य निष्कर्ष है. UNODC ने अवैध ड्रग की रिकॉर्ड आपूर्ति और तस्करी नैटवर्क की बढ़ती मज़बूती का उल्लेख किया है. 

UNODC सर्वेक्षण टीम अफ़ग़ानिस्तान के सुखरुद में अफ़ीम पैदावार का सत्यापन कर रही है.
UNODC
UNODC सर्वेक्षण टीम अफ़ग़ानिस्तान के सुखरुद में अफ़ीम पैदावार का सत्यापन कर रही है.

मगर, सचेत किया है कि इस वर्ष अफ़ग़ानिस्तान में ग़ैरक़ानूनी अफ़ीम की खेती में कमी से विश्व भर में लाभ तो होंगे लेकिन इसकी क़ीमत स्थानीय किसानों को चुकानी पड़ेगी, जिनके पास आय का कोई वैकल्पिक स्रोत नहीं है.

इस क्रम में, क्षेत्रीय प्रतिनिधि आशिता मित्तल ने इस सूचना केन्द्र की अहमियत को रेखांकित किया है. संयुक्त राष्ट्र, क्षेत्र, अन्तरराष्ट्रीय समुदाय के साथ-साथ तालेबान प्रशासन के लिए भी. 

उन्होंने कहा कि अभी यह कह पाना जल्दबाज़ी होगी कि पोस्ता अफ़ीम पर पाबन्दी के नतीजे क्या आगे भी जारी रहेंगे, चूँकि इसके लिए सूचना केन्द्र को आगामी वर्षों में विश्लेषण करना होगा.

जिस तरह से तालेबान प्रशासन ने अफ़ीम की खेती पर सख़्ती की है, उससे यह संकेत मिलता है कि बाज़ार में बदलाव आ रहे हैं. क्षेत्र में ज़ब्त की जा रही सिन्थेटिक ड्रग और मेथमफ़ेटामिन की मात्रा में उछाल देखा गया है. 

ताजिकिस्तान में यह आँकड़ा चार गुना, और किर्गिज़्स्तान में 11 गुना वृद्धि दर्ज की गई है.  

वैकल्पिक विकास, एक समाधान 

अगस्त 2021 में अफ़ग़ानिस्तान की सत्ता पर तालेबान की वापसी के बाद से ही, संयुक्त राष्ट्र द्वारा देश में संक्रमणकालीन फ़्रेमवर्क (Transitional Engagement Framework) के अन्तर्गत अपना कामकाज संचालित किया जा रहा है. 

इसके तहत, देश में मुख्यत: यूएन प्रयास, बुनियादी आवश्यकताओं को पूरा करने पर लक्षित हैं जबकि तालेबान को प्रत्यक्ष समर्थन दिए बिना, सहयोगी साझेदार संगठनों के साथ विकास गतिविधियों को भी नवाचारी तौर-तरीक़ों से आगे बढ़ाया जा रहा है.  

अफ़ग़ानिस्तान के नांगरहार प्रान्त में पहले अफ़ीम की खेती करने वाला एक किसान अब टमाटर उगा रहा है.
UN News / David Mottershead
अफ़ग़ानिस्तान के नांगरहार प्रान्त में पहले अफ़ीम की खेती करने वाला एक किसान अब टमाटर उगा रहा है.

UNODC ने अफ़ग़ानिस्तान में अपने साझेदार संगठनों के साथ मिलकर स्थानीय किसानों और निर्बल समुदायों में क्षमता निर्माण पर ध्यान केन्द्रित किया है. 

आमतौर पर एक किसान को यहाँ सात किलोग्राम टमाटर के लिए 0.30 डॉलर ही मिलते हैं जबकि एक किलोग्राम अफ़ीम की मौजूदा क़ीमत 360 डॉलर है. 

इसलिए, किसानों के लिए अफ़ीम की खेती बहुत मुनाफ़े वाला सौदा है.

इसके मद्देनज़र, सूचना केन्द्र वैकल्पिक विकास कार्यक्रमों की आवश्यकता वाले क्षेत्रों में शिनाख़्त करने में अहम भूमिका निभा रहा है.

इससे किसानों के लिए उपयुक्त आय का प्रबन्ध करना और ग़ैरक़ानूनी फ़सल के बजाय एक वैध फ़सल को उगाना सम्भव होगा. 

यूएन एजेंसी के अनुसार, भौगोलिक स्थल की पहचान के बाद, लक्षित संसाधनों के साथ व्यावहारिक विकल्पों को अमल में लाने के लिए प्रयास किए जा सकते हैं 

क्षेत्रीय प्रतिनिधि आशिता मित्तल ने कहा कि अन्तरराष्ट्रीय समुदाय द्वारा, स्थानीय समुदायों की निर्बलताओं व सम्वेदनशील परिस्थितियों मे कमी ला कर अहम निवेश किया जा सकता है. 

उन्होंने सचेत किया कि आम तौर पर तस्कर, कमज़ोर और सम्वेदनशील परिस्थितियों से जूझ रहे लोगों की तलाश करते हैं, और इसलिए अफ़ीम की खेती व इस्तेमाल में कमी लाने के लिए और अधिक क़दम उठाए जाने की ज़रूरत है. 

इस प्रकार के निवेश के अभाव में, ग़ैरक़ानूनी अर्थव्यवस्थाओं का फलना-फूलना यूँ ही जारी रहेगा. 

“अगर आप एक ग़ैरक़ानूनी गतिविधि को रोकते हैं, तो इसके स्थान पर दूसरे को अमल में लाना होगा, चूँकि लोगों को अपने परिवार के लिए भोजन का प्रबन्ध करना होता है.”

मुनाफ़े की जुगत में अपराधी

पिछले अनेक दशकों से अफ़ीम, अफ़ग़ानिस्तान से मध्य एशिया और उत्तरी मार्ग के ज़रिये योरोप समेत अन्य बाज़ारों में पहुँची है, और दक्षिणपूर्व एशिया, मध्य पूर्व व अफ़्रीका तक पहुँच रही है.

ड्रग व्यापार की निगरानी करना बहुत अहम है, चूँकि तस्कर स्मगलिंग के लिए अक्सर नई तौर-तरीक़ें ढूंढ लेते हैं और अब सिन्थेटिक ड्रग का बढ़ता व्यापार एक बड़ी चुनौती है. 

अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी काबुल का एक दृश्य.
UN News / David Mottershead
अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी काबुल का एक दृश्य.

आशिता मित्तल के अनुसार, इन ग़ैरक़ानूनी गतिविधियों की एक बड़ी वजह उनसे होने वाला मुनाफ़ा है और सबसे अधिक मुनाफ़ा अफ़ग़ानिस्तान जैसे उत्पादक देशों के बाहर कमाया जाता है. 

पाबन्दी के बावजूद, इस साल वसन्त के मौसम में एक किलोग्राम अफ़ीम की क़ीमत 368 डॉलर थी, जबकि एक किलो हेरोइन लन्दन की सड़कों पर 48 डॉलर के आँकड़े को भी पार कर सकती है. 

क्षेत्रीय प्रतिनिधि ने आगाह किया कि अफ़ग़ानिस्तान को दोषी ठहराया जा सकता है, मगर इस चुनौती से निपटना हम सभी का साझा दायित्व है.

उभरते ख़तरे

ताशकन्त में सूचना केन्द्र की प्रमुख सलोमे फ़्लोरे ने बताया कि उनकी टीम क्षेत्र में सभी पार-राष्ट्रीय ख़तरों की निगरानी व विश्लेषण करती है, जिनमें मानव तस्करी भी है.

यह जोखिम अफ़ग़ानिस्तान से बाहर जाने वाले लोगों की संख्या के साथ निरन्तर बढ़ रहा है. साथ ही, हथियारों, ग़ैरक़ानूनी ख़नन, वन्यजीवों की तस्करी, फ़र्जी दवाओं की तस्करी के रुझान भी उभर रहे हैं. 

सलोमे फ़्लोरेस के अनुसार, पार-राष्ट्रीय जोखिम बदलते और उभरते हैं और संगठित अपराध हालात के अनुरूप ढाल लिए जाते हैं. जैसे ही प्रशासनिक एजेंसियाँ इन मुद्दों से निपटती हैं, ग़ैरक़ानूनी बाज़ारों में बदलाव आ सकता है. 

अन्तरराष्ट्रीय समुदाय और अफ़ग़ानिस्तान में तालेबान प्रशासन के बीच एक कूटनैतिक समाधान की सम्भावना क्षीण है और देश में मानवाधिकारों का संकट इसकी एक बड़ी वजह है. 

अफ़ग़ानिस्तान में वास्तविक टिकाऊ विकास के बिना, ये ग़ैरक़ानूनी गतिविधियाँ, देश को एक प्लेग की तरह अपनी चपेट में लेती रहेंगी और इनसे दुनिया भी संक्रमित होती रहेगी. 

इस पृष्ठभूमि में, इन उभरती हुई चुनौतियों से निपटने में सूचना केन्द्र का कामकाज और अधिक मायने रखता है.