बांग्लादेश: चक्रवात ‘मोका’ से प्रभावित रोहिंज्या शरणार्थियों को, दाइयों से मिली नई उम्मीद
बांग्लादेश में संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (UNFPA) कार्यालय, चक्रवात 'मोका' से प्रभावित रोहिंज्या शरणार्थी शिविरों में, प्रसव व प्रसवोत्तर देखभाल एवं मातृ व शिशु स्वास्थ्य सेवाएँ मुहैया कराने के लिए प्रयासरत है.
21 वर्षीय ख़दीजा*, बांग्लादेश के कॉक्सेस बाज़ार में स्थित रोहिंज्या शरणार्थी शिविर में रहती हैं. 14 मई को चक्रवाती तूफ़ान मोका के दौरान प्रसव के लिए जाते समय उन्हें पूरा अन्दाज़ा था कि उन्हें किस ख़तरे का सामना करना पड़ सकता था.
शक्तिशाली तूफ़ान के बाद आँधी और मूसलाधार बारिश शुरू हो गई, जिससे पूरे ज़िले में व्यापक स्तर पर बाढ़ आई और कई भूस्खलन हुए.
कॉक्सेस बाज़ार में नौ लाख 60 हज़ार से अधिक रोहिंज्या शरणार्थियों समेत लगभग 23 लाख लोग प्रभावित हुए – ख़ासतौर पर वे लोग जो पहले से ही ग़रीब, हाशिए पर धकेले हुए और अत्यधिक कमज़ोर हैं.
स्वास्थ्य केन्द्र, महिलाओं व लड़कियों के लिए सुरक्षित स्थान, और हज़ारों घर क्षतिग्रस्त हो गए हैं और मॉनसून के मौसम में अभी और बारिश आने का ख़तरा है.
तूफ़ान के दौरान प्रसव
ख़दीजा को तत्काल मदद की ज़रूरत थी, लेकिन बाढ़ के कारण एक प्रशिक्षित प्रसवकर्मी का उन तक पहुँचना मुश्किल था और निकटतम स्वास्थ्य केन्द्र बन्द थे.
उनके परिवार ने अन्तत: UNFPA द्वारा वित्तपोषित और एक स्थानीय भागेदार RTMi, द्वारा संचालित एम्बुलेंस बुलाई, जिससे उन्हें शीघ्रता से संगठन-समर्थित HOPE field hospital ले जाया गया. ख़दीजा भी यहीं काम करती हैं.
27 साल की नसरीन ख़ातून उस दिन ड्यूटी पर मौजूद दाइयों में से थीं. उन्होंने बताया कि ख़दीजा का रक्तचाप बहुत बढ़ गया था – जिससे प्रसव के दौरान उनका जीवन ख़तरे में पड़ सकता था. इसलिए भी, चूँकि घर पर ही प्रसव कराने के प्रयास के परिणामस्वरूप स्वास्थ्य जटिलताएँ पैदा हो गई थीं.
उन्होंने स्थिति की गम्भीरता देखते हुए शीघ्रता से, सुरक्षित तरीक़े से एक स्वस्थ बच्चे को जन्म देने में उनकी मदद की. लेकिन उनकी राहत बहुत देर नहीं टिक सकी.
माँ को जल्दी ही अत्यधिक रक्तस्राव होने लगा. प्रसवोत्तर रक्तस्राव की स्थिति में, कुशल दाइयों के हस्तक्षेप के बिना, गम्भीर स्थिति या फिर मौत भी हो सकती है.
ख़ातून ने कहा, "उसने मेरा हाथ पकड़कर पूरे दिल से मुझे धन्यवाद दिया. इस प्रकार के क्षण ही, मुझे अपने पेशे में बने रहने के लिए प्रेरित करते हैं."
गर्भावस्था के ख़तरे
लगभग 10 लाख विस्थापित लोगों का निवास स्थान, कॉक्सेस बाज़ार, दुनिया का सबसे बड़े शरणार्थी शिविर है, जिसकी मेज़बानी एक ऐसा देश करता है जो जलवायु आपदाओं के प्रति बेहद सम्वेदनशील है.
कॉक्सेस बाज़ार में शरणार्थियों और मेज़बान समुदायों के लिए बाढ़, चक्रवात व भूस्खलन का ख़तरा आम बात हो गई है. चक्रवात मोका जैसे अन्य संकटों के कारण कई लोग अपने जीवन, प्रियजनों और घरों को खो चुके हैं.
अब ख़दीजा अपने नवजात शिशु के साथ सुरक्षित घर वापस आ चुकी हैं. उन्हें अस्पताल से लगातचार प्रसवोत्तर देखभाल, परामर्श व टीकाकरण की सुविधाएँ मिलना जारी है.
पिछले दो दशकों में बांग्लादेश की मातृ मृत्यु दर में काफ़ी कमी आई है, लेकिन इसके बावजूद, संकट की स्थिति में प्रशिक्षित जन्म परिचारकों और दाइयों की कमी का मतलब है कि स्वास्थ्य केन्द्रों, आश्रयों, भोजन व पानी तक पहुँच बाधित होने के कारण गर्भावस्था एवं प्रसव जानलेवा साबित हो सकता है.
नसरीन ख़ातून ने बताया कि, “स्वास्थ्य सुविधा में कुशल दाइयों की कमी के कारण, मेरी बड़ी बहन को पहली दो बार गर्भपात हो गया था. मैं नहीं चाहती कि किसी भी माँ को अपने अनमोल क्षण में इस तरह का कष्ट सहना पड़े - इसलिए मैंने एक दाई बनने का निर्णय लिया.”
महिलाओं और लड़कियों के लिए सेवारत
म्याँमार में हिंसा और उत्पीड़न से विस्थापित रोहिंज्या महिलाओं व लड़कियों की यौन एवं प्रजनन स्वास्थ्य आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए, 2018 में शरणार्थी शिविर में HOPE अस्पताल स्थापित किया गया था.
यूएन जनसंख्या कोष का अनुमान है कि केन्द्र का संचालन शुरू होने से अब तक, इसमें 58 हज़ार से अधिक महिलाओं और लड़कियों को मदद प्रदान की जा चुकी है.
2022 में लगभग 300 दाइयों को बांग्लादेश में रोहिंज्या शरणार्थी शिविरों में तैनात किया गया था; अकेले कॉक्सेस बाज़ार में, शरणार्थी और मेज़बान समुदायों की 2 लाख 40 हज़ार से अधिक महिलाओं को यूएनएफ़पीए समर्थित सुविधाओं के कारण यौन एवं प्रजनन स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच हासिल हुई.
हालाँकि, विस्थापित महिलाओं और लड़कियों की ज़रूरतें और संकट की स्थिति में पीछे छूट जाने वाले लोगों की ज़रूरतें, तात्कालिक मातृ स्वास्थ्य आवश्यकताओं से बहुत अधिक होती हैं. सामाजिक समर्थन और सुरक्षा प्रणाली टूटने के कारण वे तेज़ी से लिंग आधारित हिंसा, तस्करी और यौन शोषण के प्रति सम्वेदनशील हो जाती हैं.
सेवा सुलभता के प्रयास
ख़दीजा के शिविर में भी यही हालात हैं: भीड़भाड़ वाले, कमज़ोर आश्रयों में एकान्त व सुरक्षा की कमी होती है, और इस नई आपदा ने अनुमानित 15 हज़ार महिलाओं व लड़कियों को हिंसा, यौन शोषण एवं दुर्व्यवहार के अधिक जोखिम में डाल दिया है.
जैसे-जैसे लोगों के घर एवं सामाजिक नैटवर्क टूटते हैं, जीवन के तनाव कई गुना बढ़ जाते हैं. ऐसे में, महिलाएँ व बच्चे, नज़दीक स्थित संरक्षण उपायों एवं प्रतिक्रिया सेवाओं तक भी नहीं पहुँच पाते.
कॉक्सेस बाज़ार में, UNFPA, 54 महिला-अनुकूल स्थानों का एक नैटवर्क चलाता है, जो लिंग आधारित हिंसा की रोकथाम और प्रतिक्रिया सेवाओं की सुविधा प्रदान करता है. इनमें से चार स्थानों में, चक्रवात के दौरान आपातकालीन आश्रय भी प्रदान किया गया है.
ऑस्ट्रेलिया सरकार और बांग्लादेश सरकार के साथ मिलकर, यूएनएफ़पीए यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहा है कि देश के सबसे दूरस्थ इलाक़ों में भी, महिलाओं और लड़कियों की यौन एवं प्रजनन स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच हो, विशेषकर इसलिए कि जलवायु परिवर्तन से होने वाली तबाही से उनके जीवन पर सर्वाधिक असर पड़ता है.
*गोपनीयता व सुरक्षा कारणों से नाम बदल दिए गए हैं.