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जलवायु 'विनाश' टालने के लिए, जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता हटाने की पुकार

कोयले जैसे जीवाश्म ईंधनों का इस्तेमाल, जलवायु परिवर्तन की एक वजह है.
© Unsplash/Amir Arabshahi
कोयले जैसे जीवाश्म ईंधनों का इस्तेमाल, जलवायु परिवर्तन की एक वजह है.

जलवायु 'विनाश' टालने के लिए, जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता हटाने की पुकार

जलवायु और पर्यावरण

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने दुनिया को जलवायु परिवर्तन के प्रति आगाह करते हुए कहा है कि हम खुली आँखों के साथ एक आपदा की ओर बढ़ते चले जा रहे हैं, जबकि यह समय जागने और आगे बढ़कर क़दम उठाने का है.

शीर्षतम यूएन अधिकारी ने विश्व भर में जलवायु परिवर्तन पर नागरिक समाज की अग्रणी हस्तियों के साथ, गुरूवार को एक बैठक की, जिसके बाद उन्होंने न्यूयॉर्क स्थित यूएन मुख्यालय में पत्रकारों से बातचीत की.

महासचिव ने कहा कि देशों को चरणबद्ध ढंग से कोयले और अन्य जीवाश्म ईंधनों के इस्तेमाल को रोकना होगा, ताकि जलवायु विनाश को टाला जा सके. 

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उन्होंने बताया कि वैश्विक तापमान में वृद्धि को 1.5 डिग्री सैल्सियस तक सीमित रखना अब भी सम्भव है, मगर इसके लिए वर्ष 2030 तक कार्बन उत्सर्जन में 45 प्रतिशत की कटौती की आवश्यकता होगी.

अगर मौजूदा नीतियाँ जारी रखी गईं तो सदी के अन्त तक वैश्विक तापमान में 2.8 डिग्री सैल्सियस की बढ़ोत्तरी हो सकती है, जोकि विनाश की वजह होगी.

इसके मद्देनज़र, यूएन प्रमुख ने तत्काल नैट-शून्य उत्सर्जनों के लिए वैश्विक कार्रवाई का आहवान किया है, जिसकी शुरुआत जलवायु संकट के प्रदूषित केन्द्र, जीवाश्म ईंधन उद्योग से की जानी होगी. 

कोयला, ज़मीन में ही रहने दें

यूएन प्रमुख ने कहा कि देशों को चरणबद्ध ढंग से जीवाश्म ईंधन के इस्तेमाल में कमी लानी होगी, और तेल, कोयले व गैस को ज़मीन में ही रहने देना होगा. 

उन्होंने, इसके बजाय, नवीकरणीय ऊर्जा में विशाल निवेश किए जाने का आग्रह किया है.

उन्होंने ‘जलवायु एकजुटता पैक्ट’ का उल्लेख किया, जिसके अन्तर्गत सम्पन्न देशों द्वारा उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं को उत्सर्जन कटौती में समर्थन प्रदान करने का सुझाव दिया गया है.

एक अन्य प्रस्ताव में, देशों की सरकारों से वर्ष 2040 तक चरणबद्ध ढंग से कोयले पर निर्भरता हटाने, सार्वजनिक व निजी स्तर पर अन्तरराष्ट्रीय कोयले के वित्त पोषण का अन्त करने, और जीवाश्म ईंधन को मिलने वाले अनुदान को, नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों को दिए जाने की अपील की गई है.

एक विशेष दायित्व 

यूएन प्रमुख ने सचेत किया कि जीवाश्म ईंधन उद्योग और उसे सामर्थ्य प्रदान करने वालों का एक विशेष दायित्व है, जिन्हें वर्ष 2022 में, रिकॉर्ड चार हज़ार अरब डॉलर की कमाई हुई.

इसके बावजूद, तेल व गैस खनन और उनकी तलाश में निवेश किए जाने वाले हर एक डॉलर के मुक़ाबले, केवल चार फ़ीसदी हिस्सा, स्वच्छ ऊर्जा और कार्बन संग्रहण को प्राप्त होता है. 

बदलाव की अगुवाई

महासचिव ने ज़ोर देकर कहा कि जीवाश्म ईंधन उद्योग को अपने विशाल संसाधन, नवीकरणीय ऊर्जा की दिशा में बढ़ने के लिए लगाने होंगे, नाकि रास्ते में अवरोध खड़े करने के लिए.

उनके अनुसार, फ़िलहाल यह उद्योग संचालन उत्सर्जन में कटौती के लक्ष्यों के नज़दीक भी नहीं हैं, जिन्हें पहले ही बहुत कम स्तर पर रखा गया है.

उन्होंने जीवाश्म ईंधन कम्पनियों से विश्वसनीय, व्यापक और विस्तृत योजनाएँ तैयार करने का आग्रह किया, जिनमें शोधन, वितरण और इस्तेमाल, यानि वैल्यू चेन के हर बिन्दु पर उत्सर्जन में कटौती के प्रयास किए जाएँ.

साथ ही, हरित ऊर्जा की ओर बढ़ने के लिए स्पष्ट, अल्पकाल के लिए लक्ष्य भी स्थापित किाए जाने होंगे.

 संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यUNDP) ने बेलारूस में, देश का सबसे बड़ा वायु ऊर्जा फॉर्म स्थापित करने में मदद की है. जलवायु आपदा का मुक़ाबला करने के लिये नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन पर ज़ोर दिया जा रहा है
Sergei Gapon / UNDP Belarus

बाधा खड़ी करने से बचें

यूएन प्रमुख ने ज़ोर देकर कहा कि जीवाश्म ईंधन कम्पनियों को अपने प्रभाव का इस्तेमाल करने से बचना होगा, और क़ानूनी धमकियों को रोकना होगा, जिनसे प्रगति मार्ग में अवरोध खड़े किए जाते हैं. 

इस क्रम में, उन्होंने हाल ही में नैट-शून्य गठबन्धन के रास्ते में क़ानूनी अवरोध खड़े किए जाने का उदाहरण दिया.

महासचिव के अनुसार, स्पष्टता प्रदान करने में सरकारों की भूमिका अहम है. उन्हें स्पष्ट तरीक़े से आश्वासन देने होंगे. सामूहिक जलवायु कार्रवाई से भरोसे का हनन नहीं होता है, बल्कि इससे सार्वजनिक भरोसे को बल मिलता है.

यूएन प्रमुख ने वित्तीय संस्थानों से विस्तृत योजनाएँ प्रदान किए जाने का आग्रह किया, जिनसे वैश्विक ऊर्जा स्रोतों में रूपान्तरकारी परिवर्तन को प्रोत्साहन दिया जा सके.

कम्पनियों को इन योजनाओं में नैट-शून्य के लक्ष्य के अनुरूप, अपने पोर्टफ़ोलियो में जीवाश्म ईंधन सम्पत्तियों को हटाना होगा.

नीतिगत मामलों में किया जाने वाले सम्पर्क और लॉबिइंग के बारे में जानकारी प्रदान करनी होगी. इसके अलावा, वित्तीय संस्थानों को हर स्थान पर नए कोयला संयंत्रों, खदानों, तेल व गैस फ़ील्ड की तलाश समेत अन्य बुनियादी ढाँचे में निवेश और क़र्ज़ देने से रोकना होगा.