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सीरिया: ज़रूरतमन्दों की सहायता के लिए संकल्प सम्मेलन, एकजुटता पर ज़ोर

सीरिया में एक ढही हुई इमारत के मलबे के बीच एक लड़का कंक्रीट की पटिया पर बैठा है और भूकंप के बाद चल रहे खुदाई के काम को देख रहा है।
© UNICEF/Hasan Belal पश्चिमोत्तर सीरिया के जबलेह शहर में फ़रवरी 2023 में आए भूकम्प के बाद प्रभावित इलाक़ों से मलबा साफ़ किया जा रहा है. (फ़ाइल)

सीरिया: ज़रूरतमन्दों की सहायता के लिए संकल्प सम्मेलन, एकजुटता पर ज़ोर

मानवीय सहायता

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने, सीरियाई ज़रूरतमन्दों के लिए सहायता धनराशि जुटाने पर लक्षित एक अन्तरराष्ट्रीय संकल्प सम्मेलन को अपने सम्बोधन में क्षोभ प्रकट किया है कि देश के लोगों की पीड़ा को, शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता है. योरोपीय संघ ने बेल्जियम की राजधानी ब्रसेल्स में गुरूवार को इस सम्मेलन का आयोजन किया है जिसमें दानदाता एकत्र हुए. 

संयुक्त राष्ट्र ने सीरिया के लिए 11 अरब 10 करोड़ डॉलर की अपील की है, जोकि विश्व में राहत अभियान के लिए सबसे बड़ी अपील है. इस सहायता धनराशि के ज़रिए, देश की सीमाओं के भीतर और वृहद क्षेत्र में विस्थापित हुए सीरियाई नागरिकों को समर्थन प्रदान किया जाएगा. 

बताया गया है कि वर्ष 2023 के लिए आवश्यक धनराशि के केवल 10 प्रतिशत का ही प्रबन्ध हो पाया है, जबकि मानवीय ज़रूरतों का स्तर निरन्तर बढ़ता जा रहा है.

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फ़रवरी 2023 में सीरिया के पश्चिमोत्तर हिस्से में आए भीषण भूकम्प से विशाल स्तर पर जानमाल की हानि हुई, जिससे एक दशक से युद्धग्रस्त देश में हालात और जटिल हो गए हैं. 

यूएन के शीर्षतम अधिकारी ने आगाह किया कि सीरिया की क़रीब पूरी आबादी निर्धनता रेखा से नीचे जीवन गुज़ार रही है और खोने के लिए समय नहीं बचा है.

अगले महीने लगभग 25 लाख सीरियाई नागरिकों के लिए वित्तीय संसाधनों के अभाव में मानवीय सहायता समाप्त हो जाने का जोखिम है.

राजनैतिक समाधानों की दरकार 

महासचिव गुटेरेश ने हिंसक टकराव पर विराम लगाने के लिए एक ऐसे टिकाऊ राजनैतिक समाधान पर बल दिया है, जिसमें सभी सीरियाई नागरिकों की भागेदारी हो.

“हमें सीरियाई लोगों के लिए आगे एक रास्ता तैयार करना होगा, ताकि कुछ स्थिरता की तलाश की जा सके और भविष्य के लिए उम्मीद बँधे.”

उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि इसके लिए सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2254 के अनुरूप विश्वसनीय व व्यापक स्तर पर वार्ता में प्रगति आवश्यक होगी.

यह प्रस्ताव दिसम्बर 2015 में पारित किया गया था, जिसमें देश में शान्ति प्रक्रिया के लिए एक रोडमैप पेश किया गया है. 

‘यथास्थितिवाद स्वीकार्य नहीं’

सीरिया के लिए यूएन के विशेष दूत गेयर पैडरसन ने महासचिव की अपील दोहराते हुए कहा कि सीरियाई समाज के विभिन्न धड़ों के बीच राजनैतिक प्रक्रिया को नए सिरे से आगे बढ़ाना ज़रूरी है.

उनके अनुसार देश में फ़िलहाल जो स्थिति बनी हुई है वो अस्वीकार्य है और लम्बे समय तक जारी नहीं रह सकती है.

“आम सीरियाई नागरिकों ने कूटनीति से मिलने वाला कोई भी लाभ, अभी तक नहीं देखा है.” 

विशेष दूत ने ज़रूरतमन्दों तक मानवीय राहत पहुँचाने के लिए रास्ता सुलभ बनाए जाने का आग्रह किया है, जिसके तहत, सीमा-पार तुर्कीये से पश्चिमोत्तर सीरिया में राहत पहुँचाने की अनुमति को सुरक्षा परिषद द्वारा 12 महीने के लिए बढ़ाया जाना होगा. 

पश्चिमोत्तर सीरिया में रह रहे लाखों ज़रूरतमन्दों के लिए यह बेहद अहम है.

विशाल मानवीय पीड़ा

शरणार्थी मामलों के लिए यूएन एजेंसी (UNHCR) के प्रमुख फ़िलिपो ग्रैंडी, मानवीय राहत मामलों में संयोजन के लिए यूएन एजेंसी (OCHA) प्रमुख मार्टिन ग्रिफ़िथ्स, और संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) के प्रशासक ऐख़िम स्टाइनर ने चिन्ता जताई कि सीरिया संकट की एक विशाल मानवीय क़ीमत चुकानी पड़ी है.

देश में हर 10 में से सात लोगों, लगभग डेढ़ करोड़ आबादी, को मानवीय सहायता व संरक्षण सेवाओं की आवश्यकता है.

एक करोड़ 20 लाख लोग खाद्य असुरक्षा से पीड़ित हैं और हर चार में से एक सीरियाई बच्चा नाटेपन का शिकार है, जिससे उनका विकास स्थाई रूप से प्रभावित होने की आशंका है. 

2023 में आए भूकंप के बाद सीरिया में एक तबाह हुए घर के मलबे के बीच एक आदमी और तीन छोटे बच्चे खड़े हैं।
© UNICEF/Hasan Belal

शरणार्थियों के साथ एकजुटता

सीरिया में संकट के कारण एक करोड़ 30 लाख लोगों को अपने घर छोड़कर जाने के लिए मजबूर होना पड़ा है. इनमें से 68 लाख सीरियाई शरणार्थियों ने पड़ोसी देशों में शरण ली हुई है.

संयुक्त राष्ट्र के शीर्ष नेतृत्व ने क्षेत्र में शरणार्थियों की सहायता करने वाले मेज़बान देशों – मिस्र, जॉर्डन, इराक़, लेबनान, तुर्कीये – का आभार प्रकट किया है.

यूएन के वरिष्ठ अधिकारियों ने इन देशों के साथ अन्तरराष्ट्रीय एकजुटता दर्शाए जाने पर बल दिया, चूँकि उन्हें वैश्विक आर्थिक दबावों से भी जूझना पड़ रहा है.

यूएन के अनुसार, लेबनान और तुर्कीये में सीरियाई शरणार्थियों के लिए परिस्थितियाँ ख़राब हुई हैं और हर 10 में से 9 शरणार्थी अब अपनी बुनियादी आवश्यकताओं को पूरा कर पाने में असमर्थ हैं. 

जॉर्डन में लगभग दो-तिहाई सीरियाई शरणार्थी आबादी क़र्ज़ के बोझ में है. 

यूएन एजेंसियों के प्रमुखों ने सीरियाई शरणार्थियों, विशेष रूप से महिलाओं व लड़कियों की व्यथा को रेखांकित किया, जिन्हें कठिन हालात में लैंगिक असमानता और हिंसा के जोखिम को भी झेलना पड़ता है.