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तेज़ी से बदलती कामकाजी दुनिया को, सामाजिक न्याय की नींव पर टिकाने का आग्रह

भारत की राजधानी दिल्ली में एक निर्माण स्थल पर कामगार बातचीत कर रहे हैं.
© ADB/Eric Sales
भारत की राजधानी दिल्ली में एक निर्माण स्थल पर कामगार बातचीत कर रहे हैं.

तेज़ी से बदलती कामकाजी दुनिया को, सामाजिक न्याय की नींव पर टिकाने का आग्रह

एसडीजी

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कामकाजी दुनिया की, जिनीवा में एक शिखर बैठक को सम्बोधित करते हुए सचेत किया है कि सर्वजन के लिए एक अधिक न्यायसंगत और सतत रोज़गार सुनिश्चित करने की दिशा में आगे बढ़ते समय, सामाजिक न्याय को आधारशिला बनाया जाना होगा. 

अन्तरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) द्वारा आयोजित यह दो-दिवसीय बैठक बुधवार को आरम्भ हुई, जिसमें 'सामाजिक न्याय के लिए वैश्विक गठबन्धन' के प्रस्ताव पर जानकारी दी जाएगी. यह प्रस्ताव विषमताओं में कमी लाने और उनकी रोकथाम करने पर केन्द्रित है. 

महासचिव गुटेरेश ने बैठक के उदघाटन सत्र में अपने वीडियो सन्देश में कहा कि दुनिया एक निर्णायक क्षण में है.

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“जलवायु, वैश्विक सुरक्षा के लिए ख़तरों, सामाजिक एकजुटता और अन्य मुद्दों पर मौजूदा नीतियाँ, हमारे और हमारे बच्चों व नाती-पोतो के भविष्य को आकार देंगी.”

उन्होंने कहा कि यह शिखर बैठक उन समाधानों की तलाश करने का एक अवसर है, जिनसे एक अधिक न्यायसंगत, समानतापूर्ण, टिकाऊ और समावेशी भविष्य हासिल किया जा सकता है.

यूएन के शीर्षतम अधिकारी के अनुसार, साझा चुनौतियों के दौर में कामकाजी दुनिया में बेहद तेज़ गति से बदलाव आ रहे हैं.

इनमें कोविड-19 महामारी से उपजे प्रभाव, बढ़ती निर्धनता, भूख, विषमता, नफ़रत और भेदभाव समेत अन्य चुनौतियाँ हैं. 

साथ ही, जलवायु संकट, हिंसक टकराव और मानवीय आपात स्थिति लाखों-करोड़ों लोगों की शिक्षा और कामकाजी जीवन को प्रभावित कर रहे हैं. 

यूएन प्रमुख ने आगाह किया कि चौथी औद्योगिक क्रान्ति एक बेहद अस्त-व्यस्त माहौल की पृष्ठभूमि में आकार ले रही है.

पहले से तैयारी ज़रूरी

“हम इसके नतीजों की भविष्यवाणी नहीं कर सकते हैं, मगर हम पहले से जानते हैं कि इन विशाल बदलावों की रूपरेखा को जानते हैं: पहले से अधिक स्वचालन, डिजिटल परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा की दिशा में बदलाव, सतत उत्पादन, और गुणवत्तापरक शिक्षा, पुन: कौशल व प्रशिक्षण की आवश्यकता.”

यूएन महासचिव ने कहा कि इन बदलावों का अर्थ है कि कुछ क्षेत्रों में रोज़गार हानि होगी और अन्य क्षेत्रों में आजीविका के अवसर सृजित होंगे. 

इसके लिए, अलग प्रकार के कौशलों की आवश्यकता होगी और इसलिए आज से ही तैयार होने की ज़रूरत है, ताकि विभाजनों, अन्यायों और भरोसे की कमी से बचा जा सके.

उन्होंने बताया कि यूएन श्रम एजेंसी इन विशाल बदलावों के अनुरूप तैयारी करने और न्यायसंगत व टिकाऊ कामकाजी भविष्य के लिए एक रोडमैप प्रस्तुत करने के अग्रिम मोर्चे पर मौजूद है, जिसके केन्द्र में सामाजिक न्याय को रखा जाना होगा. 

आमजन को प्राथमिकता

महासचिव के अनुसार, सामाजिक न्याय के लिए वैश्विक गठबन्धन एक महत्वपूर्ण बल को प्रदर्शित करता है, जिससे टिकाऊ विकास को आगे बढ़ाने और मौजूदा व भावी चुनौतियों से निपटने में मदद मिलेगी.

यह पहल सामाजिक अनुबन्ध को फिर से तैयार करने पर लक्षित है, जिसे व्यक्ति-आधारित नीतियों से हासिल किया जाएगा और इन प्रयासों में सामाजिक न्याय पर विशेष बल दिया जाएगा. 

उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि सामाजिक अनुबन्ध के केन्द्र में महिलाओं और युवजन को रखा जाना होगा, और साथ ही, सर्वजन के लिए समान अवसर, अति-आवश्यक सेवाओं की सुलभता, जीवन-पर्यन्त शिक्षा व प्रशिक्षण, उपयुक्त व शिष्ट रोज़गार और सामाजिक संरक्षा सुनिश्चित की जानी होगी. 

यूएन प्रमुख ने रोज़गार एवं सामाजिक संरक्षा पर वैश्विक 'ऐक्सीलरेटर' का उल्लेख किया, जो उन्होंने सितम्बर 2021 में पेश किया था. 

यह यूएन मंच, लाखों-करोड़ों नए रोज़गारों के लिए अन्तरराष्ट्रीय वित्त पोषण की व्यवस्था पर लक्षित है, और सामाजिक संरक्षा के दायरे से बाहर, चार अरब लोगों तक उसका दायरा बढ़ाया जाएगा.