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जलवायु जोखिमों से शान्ति व सुरक्षा के लिए ख़तरा, यूएन मिशन के लिए बढ़ी चुनौतियाँ

 इथियोपिया में जलवायु परिवर्तन के कारण जबरन विस्थान हुआ है और सीमित संसाधनों के लिए प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है.
© UNICEF
इथियोपिया में जलवायु परिवर्तन के कारण जबरन विस्थान हुआ है और सीमित संसाधनों के लिए प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है.

जलवायु जोखिमों से शान्ति व सुरक्षा के लिए ख़तरा, यूएन मिशन के लिए बढ़ी चुनौतियाँ

शान्ति और सुरक्षा

संयुक्त राष्ट्र के शान्ति अभियान संचालन मामलों के लिए अवर महासचिव ज़्याँ-पियेर लाक्रोआ ने सुरक्षा परिषद को सम्बोधित करते हुए आगाह किया है कि साढ़े तीन अरब से अधिक लोग जलवायु परिवर्तन की दृष्टि से संवेदनशील स्थानों पर रह रहे है, और इस स्थिति में शान्ति व सुरक्षा जोखिमों में वृद्धि होने की आशंका है.

उन्होंने मंगलवार को सदस्य देशों के प्रतिनिधियों को सचेत किया कि मौजूदा परिस्थितियों को बद से बदतर होने से रोकने के लिए जल्द कार्रवाई किए जाने की ज़रूरत है.

जलवायु व्यवधानों व चुनौतियों के कारण, अफ़ग़ानिस्तान से लेकर माली तक, पहले से ही चिन्ताजनक सुरक्षा हालात गम्भीर रूप धारण कर रहे हैं.

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इस पृष्ठभूमि में, यूएन मिशन अपने कार्बन पदचिन्हों को घटाने के लिए क़दम उठा रहे हैं ताकि उनसे उपज रहे दुष्परिणामों से निपटा जा सके.

अवर महासचिव ने कहा कि जलवायु परिवर्तन, शान्ति एवं सुरक्षा के बीच बढ़ते सम्बन्ध, और यूएन मिशन वाले क्षेत्रों में आ रहे वृहद बदलावों के मद्देनज़र, हमें आवश्यकता के अनुरूप ढलना होगा.

ज्याँ-पियेर लाक्रोआ ने ध्यान दिलाया कि जलवायु परिवर्तन पर अन्तरसरकारी आयोग (IPCC) की समीक्षा रिपोर्ट दर्शाती है कि जलवायु-जनित जोखिम और जैवविविधता हानि व हिंसक टकराव से उत्पन्न होने वाले जोखिम एक दूसरे को प्रभावित करेंगे.

वर्ष 2023 में यह दूसरी बार है जब इन रुझानों पर चर्चा के लिए सुरक्षा परिषद में दूसरी औपचारिक बैठक आयोजित की गई है.

बैठक के दौरान कोलम्बिया के पूर्व राष्ट्रपति और नोबेल पुरस्कार विजेता ह्वान मैनुएल सांटोस समेत 70 से अधिक वक्ताओं ने जलवायु परिवर्तन और बदतर हो रही सुरक्षा व्यवस्था पर विचारों का आदान-प्रदान किया.

जलवायु एवं सुरक्षा

अवर महासचिव लाक्रोआ ने मौजूदा प्रयासों की रूपरेखा साझा करते हुए बताया कि अतीत के कुछ वर्षों में, संयुक्त राष्ट्र के अधिकांश शान्ति अभियानों को पहले से कहीं अधिक ख़तरों और राजनैतिक चुनौतियों से जूझना पड़ा है.

“सीमा-पार चुनौतियाँ, पर्यावरणीय क्षरण, और जलवायु परिवर्तन के कारण गहन होती जा रही चरम मौसम घटनाएँ, शासनादेश (mandate) को लागू कर पाने की हमारी सामर्थ्य के समक्ष चुनौती पेश कर रही है.”

“हम नाज़ुक हालात का सामना कर रहे सदस्य देशों और जलवायु परिवर्तन का सामना कर रहे [देशों] के बीच एक मज़बूत पारस्परिक सम्बन्ध को देखते हैं.”

बताया गया है कि जलवायु परिवर्तन की दृष्टि से 16 देश सबसे संवेदनशील हैं, उनमें से 9 देशों में संयुक्त राष्ट्र फ़ील्ड मिशन सेवारत हैं: अफ़ग़ानिस्तान, मध्य अफ़्रीकी गणराज्य, काँगो लोकतांत्रिक गणराज्य, हेती, माली, सोमालिया, सूडान, दक्षिण सूडान, यमन.

अवर महासचिव के अनुसार, अधिकांश यूएन शान्ति अभियान ऐसे सन्दर्भों में तैनात किए गए हैं, जहाँ जलवायु चुनौती के साथ-साथ लैंगिक असमानता का भी ऊँचा स्तर है.

उन्होंने कहा कि यूएन के फ़ील्ड मिशन के पास जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए कारगर समाधान नहीं है, मगर वे इसके असर से गहरे रूप से प्रभावित हुए हैं.  

ज्याँ-पियेर लाक्रोआ ने माली से लेकर दक्षिण सूडान का उदाहरण देते हुए कहा कि यूएन मिशन सीधे तौर पर, जलवायु परिवर्तन और असुरक्षा से उपजे ख़तरों का सामना कर रहे हैं.

यूएन फ़ील्ड मिशन में कार्रवाई के लिए प्राथमिकता के तौर पर, जलवायु और सुरक्षा के बीच जुड़ाव को समझने और उनसे निपटने की क्षमताओं में निवेश किया जाता है.

समाधानों पर बल

इसके तहत, जलवायु कार्रवाई और पर्यावरण को सुरक्षित बनाने से होने वाले पारस्परिक लाभों को मज़बूती से रेखांकित किया जाता है. साथ ही, यह भी सुनिश्चित किया जाता है कि यूएन मिशन, समस्या का हिस्सा ना बन जाएँ.

उन्होंने कहा कि शान्ति अभियानों के लिए पर्यावरणीय रणनीति के अनुरूप, संयुक्त राष्ट्र नवीकरणीय ऊर्जा समाधानों को अपना रहा है, पर्यावरणीय पदचिन्हों में कमी लाई गई है और ईंधन क़ाफ़िलों के लिए सुरक्षा जोखिम भी कम हुए हैं.

उदाहरणस्वरूप, वर्ष 2021 और 2022 में, यूएन शान्ति अभियानों में इस्तेमाल की गई छह फ़ीसदी बिजली, नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों से प्राप्त की गई थी.

शान्ति अभियानों के लिए यूएन अवर महासचिव ज्याँ-पियेर लाक्रोआ ने अन्तरराष्ट्रीय शान्ति व सुरक्षा के मुद्दे पर सुरक्षा परिषद को सम्बोधित किया.
UN Photo/Eskinder Debebe

इस क्रम में, यूएन के वरिष्ठ अधिकारी ने नेपाल-अमेरिका साझेदारी जैसी अन्य पहलों का स्वागत किया, जिसके तहत दक्षिण सूडान के रुमबेक में विशाल स्तर पर सौर ऊर्जा हाइब्रिड प्रणाली स्थापित की गई है.

उन्होंने बताया कि दिसम्बर 2023 में यूएन शान्तिरक्षा के विषय पर घाना में एक मंत्रिस्तरीय बैठक आयोजित की जा रही है, जिसमें पर्यावरण समेत अन्य अहम क्षेत्रों में संकल्पों के ज़रिए विशेषीकृत क्षमताओं और साझेदारियों के लिए प्रयासों और अवसरों को मज़बूती किया जाएगा.

सुरक्षा परिषद से कार्रवाई का आग्रह

कोलम्बिया के पूर्व राष्ट्रपति ह्वान मैनुअल सांटोस ने सचेत किया कि सुरक्षा परिषद के कुछ सदस्य जलवायु परिवर्तन और सुरक्षा को दो अलग-अलग मुद्दों के रूप में देखना चाहते हैं.

मगर, वास्तविक जगत में जलवायु परिवर्तन और हिंसक टकराव के दुष्परिणाम आपस में स्पष्टता से मिलते हैं.

“जलवायु परिवर्तन से मानव सुरक्षा के लिए ख़तरे गहन होते हैं, और युद्ध से प्रकृति व पर्यावरण को अनेक प्रकार से क्षति पहुँचती है. बाँध के ध्वस्त होने से लेकर, जैसाकि यूक्रेन में हुआ, पाइपलाइनों और ग्रामीण समुदाय को पोषित करने वाली कृषि भूमि पर हमलों तक.”

पूर्व कोलम्बियाई राष्ट्रपति के अनुसार, सुरक्षा परिषद को जलवायु असुरक्षा से उत्पन्न हो रही अभूतपूर्व चुनौतियों से निपटने में अपनी भूमिका निभानी होगी, और संयुक्त राष्ट्र के अन्य हिस्सों व अन्तरराष्ट्रीय संस्थाओं के साथ मिलकर काम करना होगा ताकि टिकाऊ व न्यायसंगत समाधान ढूंढे जा सकें.

इस क्रम में, उन्होंने ज़मीनी स्तर पर यूएन अभियानों में जलवायु सम्बन्धी पहलुओं को एकीकृत करने, शान्तिरक्षा अभियानों में जलवायु व सुरक्षा परामर्शदाताओं को शामिल करने, नाज़ुक हालात वाले सन्दर्भों में, जोखिमों का पता लगाने और उनके दंश को कम करने के लिए रोकथाम उपायों के तहत जलवायु पूर्वानुमानों पर बल दिया है.

उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि शान्ति के बिना टिकाऊ विकास और टिकाऊ विकास के बिना शान्ति सम्भव नहीं है.