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रंगहीनता जागरूकता दिवस: समावेशन पर ज़ोर

मलावी में रंगहीनता के लक्षणों के साथ एक 14 वर्षीय लड़का.
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मलावी में रंगहीनता के लक्षणों के साथ एक 14 वर्षीय लड़का.

रंगहीनता जागरूकता दिवस: समावेशन पर ज़ोर

मानवाधिकार

संयुक्त राष्ट्र की एक मानवाधिकार विशेषज्ञ ने मंगलवार को कहा है कि अवर्णता यानि रंगहीनता (Albinism) के लक्षणों के साथ जीवन जीने वाले लोगों के व्यापक समावेशन से, उनका भयमुक्त व भेदभाव रहित जीवन सुनिश्चित करने में, ख़ासी मदद मिल सकती है.

रंगहीनता पर संयुक्त राष्ट्र की स्वतंत्र मानवाधिकार विशेषज्ञ मुलूका ऐन मुलूका ऐन मिटि-ड्रमंड ने कहा है कि इस त्वचा लक्षण के साथ जीवन जीने वाले लोगों को, गरिमामय जीवन व समानता हासिल करने के लिए, व्यापक व कठिन संघर्ष करना पड़ता है.

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ग़ौरतलब है कि रंगहीनता या अवर्णता की स्थिति, त्वचा में रंग सम्बन्धी एक रसायन की कमी के कारण उत्पन्न होती है, जिससे त्वचा, बाल और आँखों का रंग प्रभावित होते हैं. यह त्वचा-स्थिति आमतौर पर अनुवंशिक कारणों से होती है.

मानवाधिकार विशेषज्ञ मुलूका ऐन कहती हैं, “मैं आज अपनी ये बुलन्द पुकार - देशों की सरकारों, यूएन साझीदारों, सिविल सोसायटी संगठनों, लोकप्रिय हस्तियों, सामुदायिक सदस्यों और तमाम हितधारकों से, रंगहीनता के साथ जीवन जीने वाले लोगों तक पहुँच बनाने के लिए, और ये सुनिश्चित करने के लिए लगा रही हूँ - उनकी आवाज़ सुनी जाए – नई साझेदारियाँ बनाने और मौजूदा साझेदारियों को और मज़बूत करने के लिए.”

विश्व व्यापी प्रतिनिधित्व

रंगहीनता एक ऐसी दुर्लभ और अनुवंशिक स्थिति है, जो जन्म के समय से ही होती है. यह संक्रामक नहीं है यानि इससे किसी अन्य व्यक्ति को ये स्थिति नहीं फैलती है.

यह स्थिति किसी नस्लीय या जातीय पृष्ठभूमि के बिना, दुनिया भर में, महिलाओं व पुरुषों दोनों में ही पाई जाती है.

संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, वैसे रंगहीनता की स्थिति उप-सहारा अफ़्रीका क्षेत्र में कुछ ज़्यादा देखी गई है, जहाँ तंज़ानिया में, 1,400 लोगों में एक व्यक्ति इससे प्रभावित हैं.

ज़िम्बाब्वे की कुछ आबादियों में भी 1,000 में एक व्यक्ति के अनुपात में लोग, रंगहीनता से प्रभावित बताए गए हैं. साथ ही दक्षिण अफ़्रीका भी कुछ विशिष्ट जातीय समूहों में इसका प्रभाव देखा गया है.

कैंसर और अन्य ख़तरे

रंगहीनता से प्रभावित लगभग सभी लोग, दृष्टि बाधित होते हैं और उन्हें त्वचा का कैंसर होने की भी बहुत सम्भावना होती है.

उन्हें अपने त्वचा रंग के कारण, भेदभाव का भी सामना करना पड़ता है, जिसका मतलब है कि उन्हें अक्सर विकलांगता और त्वचा रंग के आधार पर, अनेक तरह के और आपस में गुँथे हुए भेदभावों का सामना करना पड़ता है.

कुछ संस्कृतियों में तो, शारीरिक अंगों के लिए, उनकी हत्याएँ किए जाने के मामले भी देखे गए हैं.

संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार संस्थाओं को पिछले दशक के दौरान, रंगहीनता वाले बच्चों और वयस्कों पर, 600 से भी ज़्यादा हमलों के बारे में सूचनाएँ प्राप्त हुई हैं.

इन हमलों के लिए, जादू-टोना या कलंकित किए जाने की मानसिकता की, मुख्य कारणों के रूप में पहचान की गई. क्योंकि कुछ लोगों का मानना है कि रंगहीनता वाले लोगों के शारीरिक अंग, सौभाग्य या धन अर्जन में सहायक हो सकते हैं.

विविधता और सहकारिता

इस वर्ष यह अन्तरराष्ट्रीय दिवस, “समावेशन शक्ति है” की मुख्य थीम के इर्दगिर्द मनाया जा रहा है.

इसमें रंगहीनता वाले समुदाय के भीतर और बाहर – विविधता की महत्ता को रेखांकित किया गया है.

नीतियों पर कार्रवाई हो

स्वतंत्र मानवाधिकार विशेषज्ञ मुलूका ऐन मुलूका ऐन ने कहा कि आज हमारे पास ठहरकर आत्ममन्थन करने और ये याद करने का अवसर है कि सभी लोगों को समानता भरा बर्ताव नहीं मिलता है, और रंगहीनता वाले बहुत से लोगों को अब भी मानवाधिकार हनन व दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ता है, अक्सर ऐसा अदृश्य और ख़ामोशी के साथ होता है.

उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि रंगहीनता वाले लोगों को निर्णय प्रक्रिया से अलग-थलग नहीं रखा जा सकता और ना ही उन्हें पीछे छोड़ा जा सकता है.

मुलूका ऐन मुलूका ऐन ने कहा कि मानवाधिकार क़ानूनों, नीतियों और संवाद में, रंगहीनता से सम्बन्धित मुद्दों को भी शामिल करना होगा.

उन्होंने कहा, “बहुत अहम ये है कि इन सब पर अमल हो और उनके ठोस परिणाम निकलें.”