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भारत: यूएन शान्तिरक्षा @75, नवाचार व उन्नत अन्तरराष्ट्रीय सहयोग पर बल

भारत में संयुक्त राष्ट्र शान्तिरक्षा की स्थापना के 75 साल पूरे होने का जश्न मनाने के लिए, भारतीय सेना ने एक विशेष स्मारक संगोष्ठी का आयोजन किया.
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भारत में संयुक्त राष्ट्र शान्तिरक्षा की स्थापना के 75 साल पूरे होने का जश्न मनाने के लिए, भारतीय सेना ने एक विशेष स्मारक संगोष्ठी का आयोजन किया.

भारत: यूएन शान्तिरक्षा @75, नवाचार व उन्नत अन्तरराष्ट्रीय सहयोग पर बल

शान्ति और सुरक्षा

संयुक्त राष्ट्र शान्तिरक्षा की 75वीं वर्षगाँठ के अवसर पर, शान्तिरक्षकों के सम्मान में भारत की राजधानी नई दिल्ली में मंगलवार को एक समारोह आयोजित किया गया, जिसमें संयुक्त राष्ट्र ने यूएन शान्तिरक्षा अभियानों में भारत के अभूतपूर्व योगदान की सराहना की है.

स्थलीय युद्ध अध्ययन केन्द्र (CLAWS) और यूएन शान्तिरक्षा केन्द्र (CUNPK) द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित इस कार्यक्रम की थीम थी  – यूएन शान्तिरक्षक दिवस @75 -प्रासंगिकता, सुधार, और यूएन शान्तिरक्षा में साझेदारी.

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भारत में संयुक्त राष्ट्र के रैज़िडेंट कोऑर्डिनेटर शॉम्बी शार्प ने इस कार्यक्रम में शिरकत करते हुए कहा कि शान्ति के लिए सैनिकों की तैनाती, अपने-आप में एक क्रान्तिकारी प्रयोग था, “सैनिकों का उपयोग करना, बख़्तरबन्द वाहनों और बन्दूकों को युद्ध के बजाय, शान्ति के औज़ारों के रूप में इस्तेमाल करना, सैन्य क्षेत्र में अहिंसा का सिद्धान्त स्थापित करना, युद्ध करने के लिए नहीं, बल्कि संघर्ष रोकने के लिए सैन्य बल तैनात करना, यह एक़दम क्रान्तिकारी क़दम थे, प्रमाण स्पष्ट है."

शॉम्बी शार्प ने कहा, "अध्ययन की 16 अलग-अलग अवधियों में, यह स्पष्ट हो गया है कि जहाँ नीले हैलमेट वाले शान्तिरक्षक तैनात होते हैं, वहाँ कम नागरिक हताहत होते हैं, संघर्षों की रोकथाम होती है और शान्ति समझौतों को सुरक्षित बनाने में उनका सहयोग अनमोल रहा है."

29 मई 1948 को पहले संयुक्त राष्ट्र सन्धि विराम निरीक्षण संगठन (UNTSO) के सम्मान में हर साल, 29 मई को, यूएन अन्तरराष्ट्रीय शान्तिरक्षक दिवस मनाया जाता है. यूएन शान्तिमिशनों की शुरुआत हुए, इस वर्ष यानि 2023 में 75 वर्ष पूरे हो गए हैं.

भारत का योगदान

संयुक्त राष्ट्र शान्तिरक्षा की स्थापना के 75 वर्ष पूरे होने पर, इस साल अन्तरराष्ट्रीय शान्तिरक्षक दिवस पर भारत ने यूएन की प्रासंगिकता व शान्तिरक्षकों की प्रभावशीलता बनाए रखने के लिए, यूएन प्रणाली में सुधार व नवाचार पर ज़ोर दिया.

साथ ही, प्रशिक्षण, प्रौद्योगिकी और संसाधनों में निवेश बढ़ाने एवं शान्तिरक्षा में महिलाओं की सार्थक भागोदारी का आहवान भी किया है.

भारतीय थल सेनाध्यक्ष, जनरल मनोज पांडे ने अपनी प्रारम्भिक टिप्पणी में कहा कि संयुक्त राष्ट्र शान्ति अभियानों में, भारत के योगदान की एक समृद्ध विरासत है और यह सैनिकों के सबसे बड़े योगदानकर्ताओं में से एक है.

भारत ने शान्ति अभियानों में अब तक, लगभग 2.75 लाख सैनिकों का योगदान किया है. 1950 में कोरिया में अपनी पहली प्रतिबद्धता से शुरुआत कर, वर्तमान में, 12 संयुक्त राष्ट्र मिशनों में लगभग 5 हज़ार 900 भारतीय सैनिक तैनात हैं.

उन्होंने नई एवं जटिल सुरक्षा चुनौतियों के बीच संयुक्त राष्ट्र शान्तिरक्षा की जीवन शक्ति को रेखांकित करते हुए कहा कि सहयोगी देशों के साथ घनिष्ठ साझेदारी में, संयुक्त राष्ट्र के लिए भारत की ज़िम्मेदारी और प्रतिबद्धता को पूरा करने के लिए भारतीय सेना सदैव तत्पर है.

भारत द्वारा संयुक्त राष्ट्र शान्ति अभियानों में योगदान की एक समृद्ध विरासत रही है.
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शान्तिरक्षकों की प्रभावशीलता

इस अवसर पर भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हिंसा प्रभावित क्षेत्रों में तैनात संयुक्त राष्ट्र (यूएन) शान्तिरक्षकों की प्रभावशीलता एवं सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए, ज़िम्मेदार राष्ट्रों के बीच अभिनव दृष्टिकोण और सहयोग बढ़ाने का आहवान किया.

भारत के रक्षा मंत्री ने शान्तिरक्षकों के सामने तेज़ी से उभरती चुनौतियों के मद्देनज़र, प्रशिक्षण, प्रौद्योगिकी और संसाधनों में अधिक निवेश की आवश्यकता पर बल दिया. साथ ही उन्होंने शान्ति अभियानों में महिलाओं की सार्थक भागेदारी की भी हिमायत की.

भारत के रक्षा मंत्री ने शान्ति अभियानों के लिए उत्साही वैश्विक समर्थन की व्याख्या करते हुए कहा, "जब कोई संघर्ष होता है, तो यह सीधे तौर पर उसमें शामिल पक्षों के लिए हानिकारक होता है. लेकिन, अप्रत्यक्ष रूप से शामिल लोगों के लिए भी इसके नकारात्मक परिणाम होते हैं. हाल ही में हुए रूस-यूक्रेन संघर्ष से अनेक नकारात्मक प्रभाव उत्पन्न हुए. इससे विभिन्न अफ़्रीकी एवं एशियाई देशों में खाद्य संकट पैदा हो गया और दुनियाभर में ऊर्जा संकट का कारक बना.”

उन्होंने कहा, “किसी विशेष स्थान या क्षेत्र में संघर्ष, लहर का प्रभाव पैदा करता है, जिससे समस्त विश्व पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है. इसलिए, शेष दुनिया संघर्ष को सुलझाने और शान्ति बहाल करने में एक हितधारक बन जाती है. ऐसा इसलिए है क्योंकि शान्ति में सकारात्मकता होती है. जब परस्पर विरोधी पक्ष शान्ति बहाल करते हैं, तो जिन्दगियाँ बचती हैं, और उच्च आर्थिक विकास प्राप्त करने में मदद मिलती है. इससे शेष विश्व को भी लाभ मिलता है क्योंकि इससे शान्ति, स्थिरता को बढ़ावा मिलने के अलावा, आर्थिक विकास में भी मदद मिलती है."

उन्होंने कहा कि शान्ति की सकारात्मकता और युद्ध की नकारात्मकता ही, संयुक्त राष्ट्र व उससे जुड़े ज़िम्मेदार देशों को किसी भी संघर्ष को सुलझाने के लिए प्रोत्साहित करती है. इसी का एक रूप है, संघर्षरत इलाक़ों में यूएन शान्तिरक्षा मिशनों की तैनाती.

अहम योगदान

विभिन्न देशों में मौजूद शान्तिरक्षा मिशनों ने, अनगिनत जीवन बचाए हैं और अनेक देशों में शान्ति व स्थिरता स्थापित करने में अहम योगदान किया है.

समय के साथ, शान्तिरक्षा अभियानों ने बहुआयामी रूप लिया और वर्तमान में उनकी तैनाती न केवल शान्ति व स्थायित्व के लिए की जाती है, बल्कि राजनैतिक प्रक्रिया की सुगमता, नागरिक सुरक्षा, अद्धसैनिक बलों के निरस्त्रीकरण व पुन:एकीकरण में सहयोग, चुनाव प्रक्रिया की सुलभता, और क़ानून एवं व्यवस्था बहाल करके मानवाधिकारों का संरक्षण सुनिश्चित करने में उनकी अहम भूमिका है.

भारत के शान्तिरक्षक अभियानों पर एक चित्र पुस्तिका का अनावरण.
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अनमोल सफ़र

संयुक्त राष्ट्र में भारत की स्थाई प्रतिनिधि राजदूत रुचिरा कम्बोज ने इस कार्यक्रम में वर्चुअल रूप से शिरकत करते हुए एक वीडियो सन्देश में कहा, "शान्ति स्थापना पर भारत की छाप, केवल शौर्य और धैर्य की कहानी नहीं है, यह मानवता और करुणा की भी कहानी है. यह प्रगति और विकास की कहानी है."

उन्होंने कहा कि भारत के शान्तिरक्षकों की, शान्ति के लिए उनकी प्रतिबद्धता और मानवता के लिए हमेशा सराहना की गई है, क्योंकि वे संघर्षों और प्राकृतिक आपदाओं के पीड़ितों को राहत प्रदान करते हैं - चाहे फिर वों नील नदी के बाढ़ से प्रभावित किनारों पर हो या काँगो के युद्धग्रस्त गाँवों में.

"साल 2022 में, विनाशकारी भूकम्प के बाद, हमारी टुकड़ियों द्वारा सीरियाई लोगों के लिए की गई निर्बाध कार्रवाई से साबित होता है कि जब नागरिकों की रक्षा करने की बात आती है, तो हम काम करके दिखाते हैं."

इस अवसर पर, भारत के समृद्ध और उल्लेखनीय शान्ति स्थापना सफ़र पर एक चित्र पुस्तिका का भी अनावरण किया गया. साथ ही, देश के शान्तिरक्षा इतिहास की गाथा बयान करती एक फ़ोटो प्रदर्शनी भी आयोजित की गई.

शान्तिरक्षा में भारत के योगदान पर नई दिल्ली में आयोजित फोटो प्रदर्शनी.
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