प्लास्टिक प्रदूषण में कमी लाने पर केन्द्रित, नया यूएन रोडमैप
संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) की मंगलवार को जारी एक नई रिपोर्ट में कहा गया है कि मौजूदा टैक्नॉलॉजी के उपयोग से और नीतियों, बाज़ारों व उत्पादों में बड़े बदलावों के ज़रिए, वर्ष 2040 तक प्लास्टिक प्रदूषण में 80 प्रतिशत तक की कमी लाना सम्भव है..
यूएन पर्यावरण एजेंसी ने अपनी यह रिपोर्ट पेरिस में प्लास्टिक प्रदूषण से निपटने के विषय पर दूसरे दौर की वार्ता से पहले जारी की है, जोकि वैश्विक सहमति बनाने पर केन्द्रित होगी.
नवीनतम रिपोर्ट में प्लास्टिक प्रदूषण का अन्त करने और चक्रीय अर्थव्यवस्था (circular economy) के सृजन के लिए ज़रूरी बदलावों पर जानकारी और उनकी व्यापकता का ख़ाका प्रस्तुत किया गया है.
‘Turning off the Tap: How the world can end plastic pollution and create a circular economy’ शीर्षक वाली यह रिपोर्ट, ठोस तौर-तरीक़ों, बाज़ार में हो रहे बदलावों, और नीतियों का समाधान-केन्द्रित विश्लेषण है, जिनसे सरकारों और व्यवसायों को, कारगर उपाय अपनाने में मदद मिल सकती है.
यूएन एजेंसी की कार्यकारी निदेशक इन्गेर ऐंडरसन ने कहा, “हम जिस तरह से प्लास्टिक का उत्पादन, इस्तेमाल व निस्तारण करते हैं, उससे मानव स्वास्थ्य के लिए जोखिम पनप रहा है और जलवायु अस्थिर हो रही है.”
उनके अनुसार, इस रिपोर्ट में इन जोखिमों में कमी लाने के लिए एक रोडमैप प्रस्तुत किया गया है, जिसे ऐसे चक्रीय (circular) तौर-तरीक़े अपना कर हासिल किया जाएगा, जिनसे प्लास्टिक को पारिस्थितिकी तंत्रों, हमारे शरीरों से बाहर और अर्थव्यवस्था में रखा जा सके.
कार्यकारी निदेशक ऐंडरसन का कहना है कि इस रोडमैप पर अमल करके और प्लास्टिक प्रदूषण पर समझौते के ज़रिए आर्थिक, पर्यावरणीय और सामाजिक प्रगति दर्ज की जा सकती है.
नीतिगत बदलावों की दरकार
रिपोर्ट बताती है कि वर्ष 2040 तक, प्लास्टिक प्रदूषण में 80 प्रतिशत तक की कमी लाने के लिए, पहले अनावश्यक और समस्या की वजह बनने वाले प्लास्टिक को दूर करना होगा, ताकि मौजूदा चुनौती के आकार में कमी लाई जा सके.
इसके बाद, बाज़ारों में तीन बड़े बदलाव ज़रूरी होंगे – प्लास्टिक उत्पादों का फिर से इस्तेमाल, उनकी रीसायकल और उत्पादों में विविधता लाना.
फिर से भरी जा सकने वाली बोतलों जैसे प्लास्टिक उत्पादों के पुन: इस्तेमाल समेत अन्य योजनाओं के ज़रिए बढ़ावा देना होगा, जिससे 2040 तक प्लास्टिक प्रदूषण में 30 प्रतिशत की कमी लाई जा सकती है.
इसकी सम्भावना को साकार करने के लिए फिर से इस्तेमाल किए जा सकने वाले उत्पादों को बढ़ावा देना अहम होगा. प्लास्टिक प्रदूषण में 2040 तक, 20 प्रतिशत तक की कमी लाने के लिए उत्पादों की रीसायक्लिंग को मुनाफ़े का उद्यम बनाना होगा.
इसके तहत, जीवाश्म ईंधन पर सब्सिडी का अन्त करना, रीसायकलिंग के लिए नए डिज़ाइन दिशानिर्देश जारी करना और अन्य उपाय अपनाए जाने पर बल दिया गया है, ताकि रीसायकल किए जाने योग्य उत्पादों का हिस्सा 21 प्रतिशत से बढ़ाकर 50 प्रतिशत किया जा सके.
इसके अलावा, प्लास्टिक की थैलियों, और सामान ले जाने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले उत्पादों को हटाकर दूसरी सामग्री (जैसेकि काग़ज़ में सामान बांधना) के उपयोग से प्लास्टिक प्रदूषण में अतिरिक्त 17 प्रतिशत तक की कमी लाई जा सकती है.
प्लास्टिक प्रदूषण, एक विशाल चुनौती
इन उपायों को अपनाए जाने के बावजूद, एक बार इस्तेमाल किए जाने वाले और कम अवधि के उपयोग वाले उत्पादों से, वर्ष 2040 तक, हर साल लगभग 10 करोड़ मीट्रिक टन प्लास्टिक के निस्तारण की ज़रूरत होगी, जबकि अतीत के दशकों का प्लास्टिक प्रदूषण भी होगा.
यूएन पर्यावरण एजेंसी के अनुसार, जिस प्लास्टिक की रीसायकलिंग सम्भव नहीं है, उसके निस्तारण के लिए डिज़ाइन और सुरक्षा मानक तैयार करना और उन पर अमल करना होगा.
बताया गया है कि चक्रीय अर्थव्यवस्था (circular economy) की ओर क़दम बढ़ाने से, एक हज़ार 270 अरब डॉलर के बराबर रक़म की बचत सम्भव है.
इसके अलावा, स्वास्थ्य, जलवायु, वायु प्रदूषण, समुद्री पारिस्थितिकी तंत्रों के क्षरण समेत अन्य क़ीमतों से तीन हज़ार 250 अरब डॉलर की बचत की जा सकती है.
लाभकारी समाधान
रिपोर्ट में अनुमान व्यक्त किया गया है कि ये समाधान अपना कर वर्ष 2040 तक, कुल सात लाख रोज़गारों की वृद्धि होगी, जिनमें से अधिकांश निम्न-आय वाले देशों में होंगे.
यूएन एजेंसी की ओर से जिन व्यवस्थागत बदलावों की पैरवी की गई है, उनमें निवेश की क़ीमत बड़ी है (65 अरब डॉलर), मगर इन बदलावों को ना अपनाने की स्थिति में होने वाले व्यय (113 अरब डॉलर) से फिर भी कम है.
विशेषज्ञों के अनुसार, ये उपाय अपनाने के लिए समय बीता जा रहा है और पाँच वर्ष की देरी से, वर्ष 2040 तक आठ करोड़ मीट्रिक टन प्लास्टिक की वृद्धि हो सकती है.
संगठन के अनुसार, अन्तरराष्ट्रीय सहमति प्राप्त नीतियों के ज़रिए राष्ट्रीय स्तर पर योजना व व्यवसायों द्वारा कार्रवाई की सीमाओं से उबरा जा सकता है, चक्रीय प्लास्टिक अर्थव्यवस्था की रफ़्तार को बनाए रखा जा सकता है और रोज़गार सृजन को बढ़ावा देना भी सम्भव होगा.