कचरों के ढेर से निपटने के लिए 'शून्य अपशिष्ट' की ओर बढ़ते क़दम
पहला अन्तरराष्ट्रीय शून्य अपशिष्ट दिवस हाल ही में मनाया गया है, जिसका मक़सद है, लोगों में व्यवहार परिवर्तन करना व अधिक से अधिक कचरा री-सायकिल करके, एक परिपत्र अर्थव्यवस्था की ओर बदलाव लाना. दुनिया के अनेक देश इसे सहज अपना रहे हैं और इसके अनेक उत्कृष्ट उदाहरण सामने आ रहे हैं.
भारत के इन्दौर शहर की प्राचीन, कचरा-मुक्त सड़कों से गुज़रते, छोटे कचरा ट्रक को नज़रअन्दाज़ करना लगभग असम्भव है. इस वाहन के चमकीले पीले केबिन के पीछे के डिब्बे, छह जीवन्त रंगों में रंगे, एक पॉप कला पेंटिंग की याद दिलाते हैं. उन पर लगे लेबल से स्पष्ट होता है कि प्रत्येक रंगीन डिब्बा, अलग-अलग तरह का घरेलू कचरा एकत्रित करने के लिए है.
इस आकर्षक रंगभरे वाहन को देखे बिना भी, सड़क के पास रहने वाले लोगों को पहले से मालूम होता है कि कचरा ट्रक के आने पर क्या करना होगा. नगर के लिए सलाहकार, तान्या मुखर्जी बताती हैं कि वर्षों से, इस "शून्य-अपशिष्ट" वार्ड का प्रत्येक परिवार, अपने कचरे को श्रेणियों में छाँटने का वादा निभाता आ रहा है.
तान्या मुखर्जी बताती हैं, "इन्दौर के लोग समझ गए हैं कि स्रोत पर ही अलग-अलग करना, (पर्यावरण की दृष्टि से टिकाऊ) अपशिष्ट प्रबन्धन के केन्द्र में है."
"यदि आप कचरे की अलग-अलग आवाजाही कर सकते हैं, तो आपको भंडारण व संसाधित करने हेतु अतिरिक्त संसाधनों या स्थान की आवश्यकता नहीं पड़ेगी. इससे आपके कार्यकर्ताओं की गरिमा, उनकी सुरक्षा ख़तरे में नहीं पड़ेगी.”
अलग-अलग कचरा संग्रह शून्य-अपशिष्ट पहलों के जटिल जाल का केवल एक हिस्सा भर है, जिसने इन्दौर को लगातार छह वर्षों तक भारत का सबसे स्वच्छ शहर बनाए रखने में मदद की है.
शहर में कचरा प्रबन्धन के क्षेत्र में करीब 15 हज़ार लोग कार्यरत हैं. तान्या मुखर्जी ने बताया कि शिक्षा एवं प्रशिक्षण प्रणालियों, मज़बूत घरेलू कम्पोस्टिंग योजनाओं, वित्तपोषण, तकनीकी रूप से उन्नत प्रसंस्करण संयंत्रों आदि तरीक़ों से, इन्दौर ने कचरे के उस संकट पर "नियंत्रण पा लिया है, जो कभी विकराल रूप ले चुका था."
पर्यावरण प्रचारकों के लिए, इन्दौर इस बात का एक शानदार उदाहरण है कि किस तरह शहर, ग्रह के सबसे गम्भीर ख़तरों में से एक – कचरे के ढेर का मुक़ाबला कर सकते हैं.
शून्य अपशिष्ट पहल
दुनिया भर की आबादी हर साल, 2 अरब टन से अधिक ठोस अपशिष्ट उत्पन्न करती है, जिसमें से 45 प्रतिशत का नियंत्रित सुविधाओं में प्रबन्धन नहीं हो पाता. तात्कालिक कार्रवाई के बिना, यह 2050 तक लगभग 4 अरब टन तक बढ़ जाएगा.
प्लास्टिक पैकेजिंग, भोजन, कपड़े, इलैक्ट्रॉनिक्स और खनन एवं निर्माण स्थलों के मलबे सहित सभी प्रकार का अपशिष्ट, मानव स्वास्थ्य और अर्थव्यवस्था के लिए विनाशकारी परिणाम लाता है, तथा जलवायु परिवर्तन, प्रकृति व जैव विविधता हानि, एवं प्रदूषण के तिहरे ग्रह संकट को बढ़ाता है. यह ग़रीबों को असमान रूप से प्रभावित करता है, और 4 अरब लोगों को उचित अपशिष्ट निपटान तक पहुँच हासिल नहीं है.
30 मार्च 2023 को शून्य अपशिष्ट के अन्तरराष्ट्रीय दिवस की शुरुआत हुई. संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूनेप) और संयुक्त राष्ट्र मानव बस्तियों के कार्यक्रम (यूएन-हैबिटेट) के सहयोग से शुरू हुआ यह दिवस, शून्य-अपशिष्ट पहल को बढ़ावा देता है और संसाधनों का उपयोग को कम करने के उपायों पर प्रकाश डालता है - कि किस तरह उत्पाद के जीवन चरणों के दौरान, टिकाऊ विकास को आगे बढ़ाने के लिए अपशिष्ट व प्रदूषण में कमी सुनिश्चित की जा सकती है.
यूनेप में उद्योग और अर्थव्यवस्था प्रभाग की निदेशक शीला अग्रवाल - ख़ान कहती हैं, "शून्य अपशिष्ट दिवस, उस संकट के लिए अभिनव समाधान खोजने और एक अधिक टिकाऊ भविष्य की ओर बढ़ने के बारे में है, जिसमें पर्यावरण की रक्षा और मानव स्वास्थ्य में सुधार होता हो. इसे हासिल करने के लिए, सरकारों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि अर्थव्यवस्था में उत्पादों से कम से कम अपशिष्ट उत्पन्न हो, और फिर, जहाँ अपशिष्ट का उत्पादन हो भी, वहाँ इसे एक संसाधन में बदलकर अर्थव्यवस्था में वापिस लाया जा सके. सरकारें ज़िम्मेदार उत्पादन और खपत पैटर्न के लिए सक्षम वातावरण बना सकती हैं ताकि सर्कुलर अर्थव्यवस्था की ओर बदलाव को आगे बढ़ाया जा सके."
शून्य अपशिष्ट की परिभाषा
शून्य अपशिष्ट यानि कम करने, पुन: उपयोग, नया स्वरूप और पुनर्चक्रण के प्रयास. मानव आबादी जो उत्पादन करती है उसका बेहतर उपयोग करना, कम सामान फेंकना और ऐसे उत्पाद तैयार करना जिनसे ज़्यादा कूड़ा न उत्पन्न हो, विशेष रूप से एकल उपयोग के बाद.
शून्य अपशिष्ट के लाभों में स्वच्छ समुद्र एवं ताज़ी हवा, उपजाऊ मिट्टी व स्वच्छ शहर, और सहससक्षम अर्थव्यवस्थाएँ एवंटिकाऊ निष्कर्षण शामिल हैं.
यह परिपत्रता का एक प्रमुख घटक है, जिसके मूल में यह अवधारणा है कि एक उत्पाद के जीवन के अन्त तक उत्पन्न होने वाले सम्भावित अपशिष्ट को पुन: उत्पादन के लिए इस्तेमाल किया जा सके. एक परिपत्र अर्थव्यवस्था में पूरे उत्पाद जीवन चक्र में कचरे को कम करना शामिल है.
शीला अग्रवाल - ख़ान कहती हैं, ‘शून्य अपशिष्ट’ के लिए सरकार, नागरिक समाज, व्यवसाय, शिक्षा, समुदायों, महिलाओं और युवाओं सहित सभी हितधारकों की तरफ़ से कार्रवाई की आवश्यकता है.
विभिन्न देशों की बेहतरीन मिसालें
यूनेप लम्बे समय से अपशिष्ट समस्या से निपटने में देशों की मदद करता रहा है.
नाइजीरिया में, वैश्विक पर्यावरण सुविधा (जीईएफ) द्वारा वित्त पोषित और यूनेप के नेतृत्व वाली परियोजना से प्रेरित होकर, निर्माताओं को उनके उत्पादों के प्रदूषण के लिए वित्तीय और क़ानूनी रूप से ज़िम्मेदार ठहराने के लिए, एक ऐतिहासिक क़ानून बना है.
जल्द ही समाप्त होने वाली और तीन साल की, एक करोड़ 50 लाख अमेरिकी डॉलर की लागत वाली यह परियोजना, नाइजीरिया के जोखिम भरे व अनौपचारिक ई-कचरा प्रसंस्करण उद्योग के लिए वरदान रही है, जिससे लगभग एक लाख लोगों को रोज़गार मिलता है.
परियोजना ने औपचारिक इलैक्ट्रॉनिक-कचरा संग्रह केन्द्र बनाने, श्रमिकों को व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण प्रदान करने और सरकारी अधिकारियों, मूल्य-श्रृंखला श्रमिकों व अनौपचारिक श्रमिकों के लिए बेहतर शिक्षा का समर्थन करने में मदद की है. इसके ज़रिए, कचरा संग्रहकर्ताओं और अनौपचारिक कचरा बीनने वालों को अब तक, 300 टन इलैक्ट्रॉनिक कचरे से, मूल्यवान संसाधनों को सुरक्षित रूप से निकालने में मदद मिली है.
यूनेप के रसायन एवं स्वास्थ्य विभाग में ज्ञान एवं जोखिम इकाई के प्रमुख लुडोविक बर्नाउडैट कहते हैं, "कचरे को कम करने के लिए सभी स्तरों पर कार्रवाई की आवश्यकता होती है, और यह महत्वपूर्ण है कि हम सरकारों, उद्योग एवं उपभोक्ताओं को अपने कचरे का उचित प्रबन्धन करने के लिए सूचित निर्णय लेने के लिए ज्ञान से सुसज्जित करें." यह महत्वपूर्ण है कि हम अनौपचारिक कचरा बीनने वालों को दरकिनार न करें, जो अपनी आजीविका के लिए कचरे पर निर्भर हैं और दुनिया भर से आने वाले अपशिष्ट से जोखिम में रहते हैं."
विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार, निर्माताओं और विक्रेताओं को ख़राब इलैक्ट्रॉनिक्स का पुन: उपयोग करने और उत्पादों की मरम्मत करवाने के उपभोक्ता अधिकारों की स्थापना के लिए, प्रभावी ई-कचरा प्रबन्धन को बढ़ावा दे सकती है.
UNEP और GEF, बांग्लादेश, इंडोनेशिया, पाकिस्तान और वियतनाम को, पाँच वर्षों में 4 करोड़ 30 लाख अमेरिकी डॉलर के वित्त पोषण कार्यक्रम के माध्यम से, वैश्विक कपड़ा उद्योग में कचरे से निपटने के आन्दोलन का समर्थन कर रहे हैं.
चार बड़े कपड़ा उत्पादक देश, विरंजन, रंगाई और कपड़ा प्रसंस्करण के अन्य रूपों में ख़तरनाक रसायनों के उपयोग को कम करने के लिए नियमों को मज़बूत करके, अपने निर्माताओं की मदद कर रहे हैं - जो एक करोड़ लोगों को रोज़गार देते हैं और वैश्विक कपड़ों के निर्यात का 15 प्रतिशत उत्पादन करते हैं.
यह कार्यक्रम, सार्वजनिक नीति को अन्तरराष्ट्रीय सर्वोत्तम प्रथा के मानकों तक पहुँचाकर, कम्पनियों को ख़तरनाक रसायनों के बेहतर प्रबन्धन व तरीक़ो से सुसज्जित करेगा, कर्मचारियों की रक्षा हेतु लगभग 12 हज़ार सिंथेटिक रसायनों में से ज़हरीले “फॉरएवर रसायनों” के रिसाव को कम करेगा.
2020 यूनेप की रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक स्तर पर, कपड़ा उद्योग के उच्च संसाधन उपयोग के हल निकालने के लिए, उत्पादन रंगाई में नवाचारों की आवश्यकता है, जबकि पुन: उपयोग, और री-सायकलिंग में सुधार के लिए नई तकनीकों का विकास किया जाना चाहिए.
साथ ही, यूएन-हैबिटेट ने t Waste Wise Cities और African Clean Cities Platform के माध्यम से, शहरों को अपने अपशिष्ट प्रबन्धन में सुधार करने में मदद की है. 400 से अधिक शहर और 60 भागीदार इन नेटवर्कों में शामिल हो गए हैं और अपशिष्ट प्रबन्धन में सुधार करने व उत्कृष्ट शून्य-अपशिष्ट प्रथाओं की पैरोकारी करने के लिए प्रतिबद्ध हैं.
2021 में ‘वेस्ट वाइज़ साइट्स टूल’ के जारी होने के बाद से, दुनिया भर के शहरों में व्यापक कचरा प्रबन्धन योजनाओं और ठोस परियोजनाओं के विकास में सहयोग मिला है.
इसमें लेबनान के 13 तटीय शहरों में नगरपालिका ठोस अपशिष्ट प्रबन्धन में सुधार के लिए 70 लाख अमेरिकी डॉलर की परियोजना, डोमिनिकन गणराज्य में नौ-शहर परियोजना और दार एस सलाम में 30 लाख अमेरिकी डॉलर की परियोजना शामिल है.
इस उपकरण (टूल) के आँकड़ों ने, एसडीजी संकेतक 11.6.1 के वैश्विक अनुमान को सूचित करने में भी मदद की, जो वैश्विक, राष्ट्रीय और स्थानीय स्तरों पर शून्य अपशिष्ट की ओर बदलाव पर महत्वपूर्ण जानकारी और अन्तरदृष्टि प्रदान करता है.
समुदायों ने भी बढ़ते कचरे के प्रभावों के साथ, शून्य-अपशिष्ट पहलों की ओर रुख़ किया है. चिली के सैंटियागो शहर के दक्षिण में स्थित एक शहरी नगर पालिका, ला पिंटाना में 2005 से जैविक कचरे के प्रबन्धन के लिए, सफलतापूर्वक एक सामुदायिक कार्यक्रम चल रहा है.
परियोजना के तहत, नगरपालिका के निवासी, घरेलू स्तर पर खाद्य पदार्थों को अलग करते हैं, जिससे प्रतिदिन लगभग 36 टन जैविक कचरे की खाद बनाई जाती है, और नगर पालिका को प्रतिदिन 750 अमेरिकी डॉलर की बचत होती है.
तुर्कीये से प्रेरणा
शून्य अपशिष्ट आन्दोलन के नेतृत्व का बीड़ा उठाया, तुर्कीये ने, जिसने 105 अन्य देशों के साथ, अन्तरराष्ट्रीय शून्य अपशिष्ट दिवस की स्थापना के प्रस्ताव को आगे बढ़ाया.
तुर्कीये सरकार, 2017 में शुरू की गई अपनी शून्य-अपशिष्ट परियोजना के माध्यम से, सभी 81 प्रान्तों में शून्य-अपशिष्ट प्रबन्धन प्रणाली की स्थापना हेतु सहायता प्रदान करती है. इस परियोजना के तहत 3 करोड़ 30 लाख टन री-सायकिल योग्य कचरे को पुनर्प्राप्त करने में मदद मिली है, जिसमें 2 करोड़ टन काग़ज़ व कार्डबोर्ड और 50 लाख टन प्लास्टिक शामिल है.
इसके परिणामस्वरूप लगभग 62 अरब तुर्कीये लीरा (US$3.3 अरब) आर्थिक लाभ और ऊर्जा एवं जल उपयोग व भंडारण स्थान की बचत सम्भव हुई है.
तुर्कीये के पर्यावरण मंत्रालय के शाखा प्रबन्धक, सुले बेकटास कहते हैं, "जनसंख्या वृद्धि, शहरीकरण, औद्योगीकरण और प्रौद्योगिकी के साथ आदतें बदलने लगी हैं, (अर्थात) तत्काल उपाय किए जाने चाहिए."
"शून्य अपशिष्ट, हमारी प्रणालियों को दोबारा डिज़ायन करने और हमारी आदतों को बदलने का प्रयास है, ताकि समस्त संसाधनों का निरन्तर उपयोग किया जा सके. हमारा लक्ष्य ... आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्वच्छ व विकसित तुर्कीये और एक रहने योग्य दुनिया पीछे छोड़ना है.”
विशेषज्ञों को उम्मीद है कि शून्य अपशिष्ट (Zero Waste) पहल को बढ़ावा देने और अपशिष्ट संकट को उजागर करने से, विश्व स्तर पर कार्रवाई को प्रेरित किया जा सकता है.
यूएन-हैबिटेट की मूल शहरी सुविधाओं के प्रमुख, आन्द्रे डिजिकस कहते हैं, "शून्य अपशिष्ट दिवस, हमारी उपभोग शैली पर पुनर्विचार करने, फ़िज़ूलख़र्ची से बचने, पुन: उपयोग और री-सायकिल सामग्री का मूल्य समझने का एक अवसर है. आइए, इस दिवस पर हम सोचें कि हम और हमारा समाज कैसे अपशिष्ट-कुशल बन सकता है."
यह लेख पहले यहाँ प्रकाशित हुआ.