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IFAD: सिंचाई नैटवर्क परियोजना ने बदला किसानों का जीवन

एक नई सिंचाई चैनल के निर्माण के कारण स्थानीय निवासियों के जीवन में रूपान्तरकारी बदलाव.
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एक नई सिंचाई चैनल के निर्माण के कारण स्थानीय निवासियों के जीवन में रूपान्तरकारी बदलाव.

IFAD: सिंचाई नैटवर्क परियोजना ने बदला किसानों का जीवन

एसडीजी

अन्तरराष्ट्रीय कृषि विकास कोष (IFAD) ने बुधवार को यूएन जल दिवस पर, विकासशील देशों के लघु किसानों की सहायता के लिए तत्काल निवेश की पुकार लगाई है, ताकि जलवायु परिवर्तन और बढ़ती जल क़िल्लत के सन्दर्भ में फ़सलों की पैदावार के लिए जल सुलभता व प्रबन्धन सुनिश्चित किया जा सके.

अन्तरराष्ट्रीय कृषि विकास कोष (IFAD) ने पाकिस्तान के उत्तरी इलाक़े में सिंचाई चैनल के निर्माण समेत जल संसाधनों पर केन्द्रित बुनियादी ढाँचों का एक नया नैटवर्क तैयार किया है, जिससे स्थानीय निवासियों के जीवन में रूपान्तरकारी बदलाव आए हैं. 

यूएन एजेंसी ने बुधवार, 22 मार्च को विश्व जल दिवस के अवसर पर जारी एक रिपोर्ट में कहा है कि विश्व आबादी का लगभग छठा हिस्सा यानि लगभग एक अरब 20 करोड़ लोग, गम्भीर जल अभाव वाले कृषि क्षेत्रों में रहते हैं.

यूएन एजेंसी के अनुसार, वर्ष 2000 के बाद से, सूखे की घटनाओं और उनकी अवधि में 29 प्रतिशत वृद्धि के कारण, अधिकांश लघु किसान, कृषि के ज़रिए पर्याप्त भोजन उत्पादन में संघर्ष कर रहे हैं.

पाकिस्तान में व्यापक नैटवर्क

एजेंसी ने इस सन्दर्भ में बताया है कि पाकिस्तान के उत्तरी इलाक़े गिलगित-बल्तिस्तान की 90 फ़ीसदी से अधिक आबादी की मुख्य आजीविका कृषि पर आधारित है, लेकिन चरम तापमान के साथ कठोर जलवायु परिस्थितियों और स्थानीय जल स्रोतों की कमी के कारण, किसानों के लिए कुछ भी उगा पाना चुनौतीपूर्ण साबित होता रहा है.

संयुक्त राष्ट्र जल दिवस पर कृषि विकास के लिए अंतर्राष्ट्रीय कोष (IFAD) छोटे पैमाने के किसानों की मदद के लिए त्वरित निवेश का आह्वान कर रहा है.
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जलवायु परिवर्तन और जल की क़िल्लत की पृष्ठभूमि में, पारिवारिक खेती-बाड़ी और लघु किसानों की सहायता के लिए कृषि-खाद्य प्रणालियों में बदलाव व नीतियाँ बेहद अहम है.

बताया गया है कि रिकॉर्ड ध्वस्त करने वाले तापमानों के बावजूद, यूएन विकास कोष और गिलगित-बल्तिस्तान सरकार की इस नई परियोजना की मदद से, ख़रफ़ाक़ घाटी के कुछ लघु किसानों ने 2022 में अपनी फ़सलों की पैदावार में नाटकीय वृद्धि दर्ज की है.

इस परियोजना के अन्तर्गत 75 सिंचाई और भूमि सुविधाओं का निर्माण किया गया है, जिनसे 42 हज़ार एकड़ से अधिक क्षेत्र के लिए किसानों को जल का एक नया स्रोत मिला है, जहाँ पहले कृषि सम्भव नहीं थी.

पाकिस्तान के उत्तरी गिलगित-बल्तिस्तान के पहाड़ी क्षेत्र में, हरे-भरे लहराते खेत एक दुर्लभ दृश्य थे, मगर, मीलों तक फैले सिंचाई चैनलों के कारण, घाँचे में स्थित यह गाँव एक बंजर भूमि से तब्दील होकर, अब हरे-भरे चारागाह में तब्दील हो गया है.

ये नवीन सिंचाई चैनल, इस क्षेत्र में अनेक अन्य ऐसी परियोजनाओं में से है, जिनके निर्माण से ना केवल नए खेतों को बल्कि पहले से मौजूद कृषि-योग्य भूमि तक जल आपूर्ति सुनिश्चित कर पाना सम्भव हुआ है.

बेहतर हुई आर्थिक स्थिति

सिंचाई चैनल की व्यवस्था ने ना केवल यहाँ के परिदृश्य को बदला है, बल्कि यहाँ रहने वाले निर्धन, ग्रामीण किसानों की आर्थिक स्थिति को भी बदल दिया है.

उत्तरी पाकिस्तान में एक नए जल ढाँचे बुनियादी  के नेटवर्क ने वहाँ रहने वाले लोगों के जीवन को बदल दिया है.
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ख़रफ़ाक़ गाँव के एक किसान मोहम्मद अब्बास के अनुसार, सिंचाई चैनल के निर्माण से उनके गाँव में आई समृद्धि को बयान नहीं किया जा सकता है.

उन्होंने बताया कि 2022 में इस चैनल के बनने के बाद, प्रत्येक घर-परिवार ने खेती के ज़रिए अपने लिए क़रीब 600 किलोग्राम गेहूँ, आलू और अन्य फ़सलों की अतिरिक्त आय का लाभ उठाया.

मोहम्मद अब्बास का कहना है कि, “सिंचाई चैनल का निर्माण हमारे पूर्वजों का एक सपना रहा है और गाँव में खाद्य सुरक्षा का मुद्दा भी.”

अब स्थानीय किसान अपनी फ़सलें बेचने के अलावा उन्हें मवेशियों के लिए चारे के रूप में भी इस्तेमाल कर सकते हैं.

शेरज़माँ एक स्थानीय किसान हैं और उनके पास 25 मवेशी हैं.

उन्होंने बताया कि, "इससे हमें बहुत लाभ हुआ है, हमने अपने पशुओं के लिए चारा उगाया है और अपने वार्षिक उपभोग के लिए गेहूँ व मक्का की खेती की है."

परियोजना से बड़े बदलाव

सिंचाई चैनल का निर्माण उस परियोजना का एक हिस्सा था जिसे अन्तरराष्ट्रीय कृषि विकास कोष (IFAD) और गिलगित-बल्तिस्तान इलाक़े की सरकार ने वित्त-पोषित किया है.

IFAD के पाकिस्तान कार्यालय में कार्यक्रम अधिकारी, फ़िदा मोहम्मद के अनुसार, 50 हज़ार एकड़ के लक्ष्य के तहत, अब तक 44 हज़ार एकड़ से अधिक भूमि को कृषि योग्य बना दिया गया है, और इसके लिए नए चैनल के निर्माण, हिमनदों से जल आपूर्ति के अलावा, नदियों व धाराओं के रुख़ को भी मोड़ा गया है.

जल सुलभता समतापूर्ण ढंग से वितरित की गई है, जोकि परिवार के आकार पर निर्भर है और घर-परिवार के हर एक सदस्य को बराबर हिस्सा मिला है.

इस परियोजना का उद्देश्य कम से कम एक लाख ग्रामीण घर-परिवारों के लिए आय और रोज़गार में सुधार है और क्षेत्र में व्याप्त ग़रीबी व कुपोषण में कमी लाना है.

सिंचाई के इन नए माध्यमों ने क्षेत्र के किसानों के लिए खाद्य सुरक्षा प्रदान की है और आगामी सालों में उनके पास अपना बाज़ार बढ़ाने का भी अवसर होगा.