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वर्ष 2022 में पत्रकारों की हत्या के मामलों में, 50% बढ़ोत्तरी: यूनेस्को

यूनेस्को, पत्रकारों और पत्रकारिता से सम्बन्धित काम करने वाले कर्मियों की सुरक्षा को सक्रियता के साथ बढ़ावा देता है.
Unsplash/Engin Akyurt
यूनेस्को, पत्रकारों और पत्रकारिता से सम्बन्धित काम करने वाले कर्मियों की सुरक्षा को सक्रियता के साथ बढ़ावा देता है.

वर्ष 2022 में पत्रकारों की हत्या के मामलों में, 50% बढ़ोत्तरी: यूनेस्को

क़ानून और अपराध रोकथाम

संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक संगठन (UNESCO) के अनुसार, वर्ष 2019 से 2021 तक दुनिया भर में पत्रकारों और मीडियाकर्मियों के मारे जाने के मामलों में गिरावट के बाद, अब वर्ष 2022 में इस संख्या में काफ़ी वृद्धि देखी गई है.

UNESCO की हाल ही में जारी, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता 2021-2022 नामक रिपोर्ट में ध्यान दिलाया गया है कि गत वर्ष हर चार दिन में ऐसा एक मामला सामने आने के कारण कुल 86 पत्रकारों की मौत हुई.

ये नए आँकड़े वर्ष 2021 में, 55 पत्रकारों की मौत की संख्या में वृद्धि को दर्शाते हैं.

यूएन एजेंसी ने पत्रकारों के सामने ख़तरे को उजागर करते हुए कहा है कि पत्रकारों को अपने कामकाज के दौरान विशाल जोखिमों का सामना करना पड़ता है.

यूएन एजेंसी की महानिदेशिका ऑड्री अज़ूले ने इन आँकड़ों को “ख़तरनाक” बताते हुए कहा है कि “अधिकारियों को इन अपराधों को रोकने के लिए और अधिक प्रयास करने होगें, और यह सुनिश्चित करना चाहिए, कि इन अपराधों के ख़िलाफ़ जल्द कार्रवाई हो व दोषियों को दंडित किया जाए, क्योंकि उपेक्षा से ही हिंसा का ये माहौल बनता है.”

सुरक्षित स्थान का अभाव

यूएन सांस्कृतिक यूनेस्को ने ध्यान दिलाया की मारे गए लगभग आधे पत्रकारों को तब निशाना बनाया गया, जब वे काम पर नहीं थे, कुछ पर यात्रा के दौरान या जब वे पार्किंग के स्थान पर थे, तब हमले किए गए; और कुछ पत्रकारों पर अन्य सार्वजनिक स्थानों पर हमला किया गया. अन्य अनेक मीडियाकर्मियों की हत्या उनके घरों पर की गई.

रिपोर्ट में चेतावनी जारी करते हुए कहा गया है कि इन मामलों के सामने आने के बाद ऐसा लगता है कि पत्रकारों के लिए, दुनिया में हर स्थान जोखिम भरा है और "पत्रकारों के लिए ख़ाली समय में भी ख़तरा बरक़रार है.”

पिछले पाँच सालों में कुछ सुधार के बावजूद, सुरक्षा और दंडमुक्ति के ख़तरों के मामलों की दर “चौंकाने” वाली 86 फ़ीसदी रही है.

एजेंसी ने आगाह करते हुए कहा की दंडमुक्ति का सामना करना एक अतिआवश्यक प्रतिबद्धता है और इसके लिए, अन्तरराष्ट्रीय सहयोग को गतिशील करना होगा.

हत्या मामलों के अलावा, वर्ष 2022 में पत्रकारों को अन्य हिंसा के रूपों का सामना करना पड़ा. इनमें जबरन गुमशुदगी, अपहरण, मनमाने ढंग से हिरासत में रखना, क़ानूनी उत्पीड़न और डिजिटल हिंसा शामिल है.

महिला पत्ररकार, ख़ासतौर से निशाने पर रहती हैं.

संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक संगठन (UNESCO) ने पत्रकारों के समक्ष चुनौतियों को उजागर करते हुए ध्यान दिलाया कि मानहानि क़ानूनों, साइबर क़ानूनों, और "असत्य समाचारों" के ख़िलाफ़ क़ानून को एक हथियार के रूप में प्रयोग किए जाने, व अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को सीमित करने और पत्रकारों के काम करने के लिए, एक विषैला वातावरण बनाने के साधन के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है.

मैक्सिको है पत्रकारों के लिए सबसे ख़तरनाक देश

यूनेस्को ने पाया कि वर्ष 2022 में पत्रकारों की असुरक्षा के मामले में सबसे ज़्यादा ख़तरनाक लातिन अमेरिका और कैरीबियाई क्षेत्र रहे, जहाँ 44 मीडियाकर्मियों की हत्याएँ हुईं, जोकि दुनिया भर में मारे गए कुल मीडियाकर्मियों की आधी से अधिक संख्या है.

विश्व भर में सबसे घातक देश मैक्सिको रहा, जिसमें हत्या के 19 मामले दर्ज किए गए. यूक्रेन में 10 और हेती में 9 मीडियाकर्मियों की मौतें हुईं. एशिया-प्रशान्त क्षेत्र में 16 मौतें दर्ज की गईं, जबकि पूर्वी यूरोप में 11 मीडियाकर्मियों की हत्याएँ की गईं.

वर्ष 2022 में सशस्त्र संघर्ष वाले देशों में मौत के मुँह में धकेले जाने वाले पत्रकारों की संख्या बढ़कर 23 हो गई, जबकि पिछले वर्ष यह संख्या 20 थी.

कुछ पत्रकारों को सुनियोजित अपराध, सशस्त्र संघर्ष या बढ़ती चरमपंथी घटनाओं पर उनकी पत्रकारिता के कारण मार दिया गया.

और अन्य मीडियाकर्मी भ्रष्टाचार, पर्यावरणीय अपराध, सत्ता के दुरुपयोग और विरोध जैसे संवेदनशील विषयों पर रिपोर्टिंग करने के कारण मौत के मुँह में धकेल दिए गए.