इंडोनेशिया: समुद्र में फँसे लोगों की जान बचाने के ‘मानवीय कृत्य’ का स्वागत

म्याँमार में 2017 में सैन्य अभियान के दौरान जान बचाने के लिये बड़ी संख्या में रोहिंज्या समुदाय के लोगों ने बांग्लादेश का रुख़ किया. (फ़ाइल)
© UNICEF/Patrick Brown
म्याँमार में 2017 में सैन्य अभियान के दौरान जान बचाने के लिये बड़ी संख्या में रोहिंज्या समुदाय के लोगों ने बांग्लादेश का रुख़ किया. (फ़ाइल)

इंडोनेशिया: समुद्र में फँसे लोगों की जान बचाने के ‘मानवीय कृत्य’ का स्वागत

प्रवासी और शरणार्थी

​​संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी (UNHCR) ने समुद्र में फँसे 200 से अधिक लोगों को बचाने में अहम भूमिका निभाने वाले इंडोनेशिया के स्थानीय अधिकारियों और मछुआरों के दल की इस "मानवीय कृत्य" के लिये सराहना की है.

यूएन एजेंसी ने मंगलवार को जारी अपने एक वक्तव्य में बताया कि जीवित बचे लोगों के दो समूहों को पश्चिमोत्तर इंडोनेशिया के तट पर उतारा गया है.

रविवार को 58 और सोमवार को 174 लोगों को बचाया गया, जिनमें अधिकाँश महिलाएँ व बच्चे हैं. 

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स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, ये यात्री जोखिम भरे हालात में पिछले एक महीने से अधिक समय से समुद्र में फँसे थे.

इंडोनेशिया में शरणार्थी संगठन की प्रतिनिधि ऐन मेमान ने कहा, "हम इंडोनेशिया में स्थानीय समुदायों और अधिकारियों के इस मानवीय कृत्य का स्वागत करते हैं."

"ऐसे क़दम मानव जीवन को निश्चित मृत्यु से बचाने में मदद करते हैं और अनेक हताश लोगों की व्यथा पर विराम लगाते हैं."

सुरक्षित उतारे गए लोगों की अत्यधिक थकावट और पानी की कमी समेत अन्य प्रकार की स्वास्थ्य देखभाल के लिये तत्काल व्यवस्था की गई है.

जीवित बचे लोगों के अनुसार, जहाज पर गम्भीर स्थिति के कारण समुद्र में ही 26 लोगों की मौत हो गई.

संयुक्त राष्ट्र एजेंसी ने कहा कि, "कई लोगों की स्थिति में सुधार लाने के लिये तत्काल चिकित्सा देखभाल की आवश्यकता है."

बचाए गए लोगों की देखभाल प्रयासों में स्थानीय अधिकारियों और समुदायों की मदद के लिये और अधिक सामग्री व कर्मचारियों को रवाना किया गया है.

जानलेवा सफ़र

इस वर्ष अब तक, दो हज़ार से अधिक लोगों ने अंडमान सागर और बंगाल की खाड़ी में जोखिम भरी समुद्री यात्राएँ की है, जिसमें लगभग 200 लोगों के मारे जाने की आशंका है.

इनमें से बड़ी संख्या रोहिंग्या पुरुषों, महिलाओं और बच्चों की है, जिन्होंने 2017 में म्याँमार में उत्पीड़न से बचने के लिये बांग्लादेश में शरण ली थी.
 
यूएन एजेंसी द्वारा उन समाचारों की पुष्टि करने के भी प्रयास किये जा रहे हैं, जिनके अनुसार 180 लोगों से भरी एक अन्य नाव अभी भी समुद्र में लापता है.
 
यूएन एजेंसी ने जोर देकर कहा कि इस क्षेत्र में स्थित सभी देशों को अन्तरराष्ट्रीय क़ानून के तहत तय "अपने कानूनी दायित्वों को पूरा करना होगा", ताकि जोखिमपूर्ण यात्राएँ कर रहे लोगों को और अधिक पीड़ा व जनहानि की रोकथाम की जा सके. 

इंडोनेशिया की प्रतिबद्धता

संयुक्त राष्ट्र के नवीनतम आँकड़े बताते हैं कि पिछले छह हफ्तों में, इंडोनेशिया ने चार नावों से 472 लोगों को बचाने में मदद की है.

शरणार्थी संगठन ने कहा कि यह "उत्पीड़न और संघर्ष का सामना कर रहे लोगों के लिये बुनियादी मानवीय सिद्धांतों के प्रति प्रतिबद्धता और सम्मान" को दर्शाता है.
 
हालांकि यूएन एजेंसी ने खेद प्रकट किया है कि सहायता की कईं अपीलों के बावजूद सहायता प्रयास नहीं किये गए, जिसके मद्देनज़र, इस क्षेत्र के अन्य देशों से इंडोनेशिया के उदाहरण का अनुसरण करने का आग्रह किया गया है.