यूएन सम्मेलन: 30 फ़ीसदी वैश्विक जैवविविधता के सरंक्षण के लिये ‘ऐतिहासिक समझौता’

तोते मुख्यत: उष्णकटिबंधीय और उप-उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में पाए जाते हैं.
Unsplash/Roberto Nickson
तोते मुख्यत: उष्णकटिबंधीय और उप-उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में पाए जाते हैं.

यूएन सम्मेलन: 30 फ़ीसदी वैश्विक जैवविविधता के सरंक्षण के लिये ‘ऐतिहासिक समझौता’

जलवायु और पर्यावरण

कैनेडा के माँट्रियाल में संयुक्त राष्ट्र जैवविविधता सम्मेलन (कॉप15) के समापन पर एक महत्वपूर्ण समझौते पर सहमति बनी है, जोकि इस दशक के अन्त तक विश्व में 30 प्रतिशत भूमि, तटीय इलाक़ों और अन्तर्देशीय जलक्षेत्र के संरक्षण पर लक्षित है.

सम्मेलन के दौरान वार्ताकारों ने मानवीय गतिविधियों के कारण प्रकृति के चिन्ताजनक विध्वंस पर लगाम कसने के लिये कारगर उपायों पर चर्चा की.

देशों द्वारा सोमवार को पारित किये गए नए फ़्रेमवर्क में चार लक्ष्य और 23 उद्देश्य स्थापित किये गए हैं.

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कुनमिन्ग-माँट्रियाल वैश्विक जैवविविधता फ़्रेमवर्क में भूमि, तटीय इलाक़ों और अन्तर्देशीय जलक्षेत्र के संरक्षण के साथ-साथ, खाद्य बर्बादी में 50 फ़ीसदी की कमी लाने का भी लक्ष्य रखा गया है.

कॉप15 जैवविविधता सम्मेलन, पहले चीन के कुनमिन्ग शहर में अक्टूबर 2020 में आयोजित किये जाने का कार्यक्रम था, मगर कोविड-19 महामारी के कारण इसे स्थगित करना पड़ा था.

संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम की कार्यकारी निदेशक इन्गेर ऐंडर्सन ने समापन सत्र को सम्बोधित करते हुए कहा कि यह फ़्रेमवर्क, और उसके साथ प्रस्तुत लक्ष्यों, उद्देश्यों और वित्त पोषण का पैकेज, प्राकृतिक जगत के साथ हमारे सम्बन्ध को फिर से स्थापित करने की दिशा में पहला क़दम है.

“जीवन के ताने-बाने को समर्थन देकर, उसे मज़बूती प्रदान करने का हमारा अवसर अभी है, ताकि यह आने वाली पीढ़ियों के पूर्ण भार को उठा सके.”

“हम प्रकृति के लिये जो कार्रवाई करते हैं, वो निर्धनता घटाने के लिये क़दम हैं; वे टिकाऊ विकास लक्ष्यों को हासिल करने के लिये क़दम हैं; वे मानव स्वास्थ्य में बेहतरी लाने के लिये हमारे क़दम हैं.”

संरक्षण व पुनर्बहाली

संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) के प्रशासक एखिम स्टाइनर ने नए समझौते को ऐतिहासिक क़रार देते हुए सभी देशों से इसे आगे बढ़ाने का आग्रह किया.

उन्होंने कहा कि इस समझौते का अर्थ है, दुनिया भर में आमजन जैवविविधता हानि को रोकने और हमारी भूमि व समुद्रों की पुनर्बहाली के लिये वास्तविक प्रगति की आशा कर सकते हैं.

उनके अनुसार, इन लक्ष्यों की प्राप्ति के लिये ऐसे तौर-तरीक़ों का सहारा लिया जाना होगा, जिनसे पृथ्वी की रक्षा हो, और आदिवासी व स्थानीय समुदायों के अधिकारों का सम्मान किया जाए.

यूएन कार्यक्रम प्रशासन ने इस ब्लूप्रिन्ट को, ‘यूएनडीपी प्रकृति संकल्प’ के ज़रिये वास्तविकता में बदलने की अपनी प्रतिबद्धता को रेखांकित किया है, जिससे 140 से अधिक देशों को समर्थन दिया जाएगा.

“हम कार्रवाई के लिये तैयार हैं. हमारी प्रकृति पर संकट को दर्शाती सुई कि दिशा बदलने के लिये ज़रूरी व्यवस्थागत बदलावों के लिये यूएनडीपी यहाँ है.”

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने सोमवार को यूएन मुख्यालय में अपनी वर्षान्त पत्रकार वार्ता के दौरान कॉप15 सम्मेलन में पारिस्थितिकी तंत्रों के विध्वंस पर रोक लगाने के लिये हुए समझौते का उल्लेख किया.

महासचिव गुटेरेश ने सभी देशों से अपने वायदों को पूरा करने का आग्रह करते हुए कहा कि, “अन्तत:, हम प्रकृति के साथ एक शान्ति समझौते को आकार देने लगे हैं.”

इण्डोनेशिया में बड़ी संख्या में लोग अपनी आजीविका के लिये जैवविविधता पर निर्भर हैं.
CIFOR/Ulet Ifansasti
इण्डोनेशिया में बड़ी संख्या में लोग अपनी आजीविका के लिये जैवविविधता पर निर्भर हैं.

कार्रवाई में तेज़ी

कॉप15 जैवविविधता सम्मेलन के दौरान, एक प्लैटफ़ॉर्म भी प्रस्तुत किया गया, जोकि नए फ़्रेमवर्क को लागू कराने की प्रक्रिया में तेज़ी लाने पर केन्द्रित है.

कोलम्बिया की अगुवाई और जर्मनी के समर्थन से, 23 देशों ने एक घोषणापत्र पर हस्ताक्षर किये हैं, जिसके तहत स्थापित ‘Accelerator Partnership’ के ज़रिये सरकारों को समर्थन प्रदान किया जाएगा.

राष्ट्रीय जैवविविधता रणनीतियों व कार्ययोजनाओं को लागू किये जाने की प्रक्रिया में तेज़ी लाने के इरादे से इसे अहम बताया गया है.

इस प्लैटफ़ॉर्म की मदद से वित्त व तकनीकी समर्थन मुहैया कराया जाएगा, विभिन्न स्तरों पर राष्ट्रीय आवश्यकता के अनुरूप संस्थागत क्षमता विकसित की जाएगी, और सम्वाद को बढ़ावा दिया जाएगा.

यूएन जैवविविधता सन्धि की कार्यकारी सचिव ऐलिज़ाबेथ म्रेमा ने इसका स्वागत किया, और उम्मीद जताई कि इससे प्रकृति के साथ समरसतापूर्ण सम्बन्ध क़ायम करने और सर्वजन के लिये टिकाऊ भविष्य सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी.