मानवाधिकार दिवस: सघन चुनौतियों के बीच भी, समाधान निकट दृष्टि में

यमन में अनेक वर्षों से युद्ध जारी है जिसका व्यापक असर बच्चों पर भी पड़ा है.
© UNICEF/Mahmoud Fahdl
यमन में अनेक वर्षों से युद्ध जारी है जिसका व्यापक असर बच्चों पर भी पड़ा है.

मानवाधिकार दिवस: सघन चुनौतियों के बीच भी, समाधान निकट दृष्टि में

मानवाधिकार

संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर टर्क ने, शनिवार 10 दिसम्बर को मनाए जाने वाले मानवाधिकार दिवस के अवसर पर ज़ोर देकर कहा है कि दुनिया भर में इतने सारे संकटों के बावजूद, अब भी समाधान तलाश किए जा सकते हैं. यूएन प्रमुख ने भी तमाम देशों, सिविल सोसायटी, निजी सैक्टर और अन्य पक्षों से, आज के हानिकारक रुझानों की दिशा पलटने की ख़ातिर, मानवाधिकारों को अपने तमाम प्रयासों के केन्द्र में रखने का आग्रह किया है.

मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर टर्क, हाल ही में यूक्रेन की चार दिन की यात्रा करके लौटे हैं, जिसके बाद उन्होंने शुक्रवार को जिनीवा में बताया कि इस यात्रा के दौरान उन्हें गोलाबारी की एक घटना के दौरान, सुरक्षा की ख़ातिर एक भूमिगत आश्रयस्थल में पनाह लेने के लिए मजबूर होना पड़ा था.

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मानवाधिकार उच्चायुक्त ने कहा कि उनका ये अनुभव ऐसा था जो यूक्रेनी लोग व संयुक्त राष्ट्र के कर्मचारी, हर दिन अनुभव करते हैं.

वोल्कर टर्क ने ज़ोर देकर कहा कि उन्होंने इस घटना को इस तथ्य से ज़्यादा कुछ नहीं समझा कि, “ये एक युद्ध है जिसे रुकना होगा.”

आशा का सन्देश

वोल्कर टर्क ने 74 वर्ष पहले यूएन महासभा द्वारा अपनाए गए मानवाधिकारों के सार्वभौमिक घोषणा-पत्र का सन्दर्भ देते हुए ज़ोर दिया कि मानवाधिकारों के लिए असम्मान और उनका उल्लंघन किए जाने के कारण ही, बर्बरतापूर्ण कृत्य देखने को मिले हैं जिन्होंने इनसानियत की अन्तरात्मा को तार-तार कर दिया है.

उन्होंने आशा का एक सन्देश देते हुए कहा कि यहाँ तक कि जहाँ चुनौतियाँ बहुत सघन नज़र आती हैं, वहाँ भी अगर राजनीति और समाज के नेता गण, अपनी कार्रवाइयाँ और प्रतिक्रियाएँ मानवाधिकारों पर केन्द्रित रखें तो, समाधान सदैव ही निकट नज़र आएंगे.

रुझान पलटने की पुकार

यूएन महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने भी मानवाधिकार दिवस पर अपने सन्देश में कहा है कि विश्व, मानवाधिकारों के लिए, अभूतपूर्व और आपस में गुँथी हुई चुनौतियों का सामना कर रहा है. खाद्य अभाव और निर्धनता बढ़ रहे हैं – जोकि करोड़ों लोगों के आर्थिक व सामाजिक अधिकारों के लिए प्रत्यक्ष अपमान है.

उन्होंने कहा, “नागरिक स्थान सिमट रहा है. मीडिया स्वतंत्रता और पत्रकारों की रक्षा, दुनिया के लगभग हर क्षेत्र में ख़तरनाक तरीक़े से घट रही है. संस्थाओं में विश्वास, भाप की तरह कमज़ोर हो रहा है, विशेष रूप से युवजन में.

“कोविड-19 महामारी के कारण महिलाओं व लड़कियों के विरुद्ध हिंसा और बढ़ी है. नस्लभेद, असहिष्णुता व भेदभाव बेतहाशा स्तर पर फैल रहे हैं.”

यूएन प्रमुख ने कहा कि जलवायु परिवर्तन, जैवविविधता हानि और प्रदूषण रूपी तिहरे पृथ्वी ग्रह संकटों में से, नई मानवाधिकार चुनौतियाँ उभर रही हैं.

“और हम, कुछ नई प्रौद्योगिकियों से मानवाधिकारों के लिए दरपेश जोखिमों का अनुमान लगा पाने के बिल्कुल आरम्भिक दौर में हैं. ये कठिन दौर, तमाम मानवाधिकारों के लिए हमारे संकल्प में फिर से जान फूँकने की पुकार लगा रहे हैं – सिविल, सांस्कृतिक, आर्थिक, राजनैतिक और सामाजिक अधिकार.”

एंतोनियो गुटेरेश ने कहा कि 2020 में शुरू हुई उनकी कार्रवाई पुकार में, मानवाधिकारों को, हमारे सामने प्रस्तुत चुनौतियों के समाधानों के केन्द्र में रखा गया है.

उन्होंने कहा कि यही विचार, ‘हमारा साझा एजेंडा’ पर मेरी रिपोर्ट में भी झलकता है, जिसमें एक नवीन सामाजिक संविदा की भी पुकार लगाई गई है, जिसकी डोर मानवाधिकारों से बंधी हो.

एंतोनियो गुटेरेश ने कहा कि मानवाधिकार, मानव गरिमा के लिए बुनियाद हैं, और शान्तिपूर्ण, समावेशी, न्यायपूर्ण, समान और समृद्ध समाजों की आधारशिला भी. मानवाधिकार, एकजुट करने वाली शक्ति हैं और एकजुटता की पुकार भी.

“मानवाधिकारों में हम सबकी सर्वाधिक बुनियादी साझी चीज़ झलकती है – हमारी साझा मानवता.”

यूएन प्रमुख ने कहा,  “इस मानवाधिकर दिवस पर, हम तमाम अधिकारों की सार्वभौमिकता और अविभाज्यता को फिर से पुष्ट करते हैं, साथ ही हम सर्वजन के मानवाधिकारों के समर्थन में अपना रुख़ मज़बूत करते हैं.”