‘प्रकृति के बिना, हमारे पास कुछ भी नहीं’: यूएन जैवविविधता सम्मेलन - कॉप15 में यूएन प्रमुख की चेतावनी

बोलिविया के लगूना कोलोराडा में फ़्लैमिन्गोज़.
Unsplash/Tobias Jelskov
बोलिविया के लगूना कोलोराडा में फ़्लैमिन्गोज़.

‘प्रकृति के बिना, हमारे पास कुछ भी नहीं’: यूएन जैवविविधता सम्मेलन - कॉप15 में यूएन प्रमुख की चेतावनी

एसडीजी

जैवविविधता पर संयुक्त राष्ट्र का महत्वपूर्ण सम्मेलन (कॉप15) मंगलवार को कैनेडा के माँट्रियाल शहर में आरम्भ हुआ है, जहाँ वार्ताकार मानवीय गतिविधियों के कारण प्रकृति के चिन्ताजनक विध्वंस पर लगाम कसने के लिये नए लक्ष्य स्थापित करने पर ध्यान केन्द्रित करेंगे.यूएन प्रमुख ने जैवविविधता की रक्षा के लिये तीन अहम उपायों पर बल देते हुए आगाह किया है कि प्रकृति के बिना, मानवता के पास कुछ भी नहीं है.

इस महत्वपूर्ण कॉप सम्मेलन के दौरान एक नया ‘वैश्विक जैवविविधता फ़्रेमवर्क’ पारित किये जाने की सम्भावना है, जिसमें विश्व भर में 2030 तक प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण व रक्षा उपायों का ख़ाका पेश किया जाएगा.

इससे पहले वर्ष 2010 में, कॉप10 सम्मेलन के दौरान देशों की सरकारों ने वर्ष 2020 तक महत्वाकांक्षी लक्ष्यों को साकार करने के लिये सहमति जताई थी.

मगर, यूएन रिपोर्ट के अनुसार अभी तक एक भी लक्ष्य पूर्ण रूप से हासिल नहीं किया जा सका है. वहीं, डायनासोर युग का अन्त होने के बाद, प्रकृति को अब तक के सबसे बड़े स्तर पर क्षति पहुँच रही है.

10 लाख पौधों व पशुओं की प्रजातियों के विलुप्त होने का जोखिम मंडरा रहा है.

यूएन प्रमुख ने कैनेडा के मॉन्ट्रियल में जैवविविधता पर कॉप15 सम्मेलन को सम्बोधित किया.
UN Photo/Evan Schneider
यूएन प्रमुख ने कैनेडा के मॉन्ट्रियल में जैवविविधता पर कॉप15 सम्मेलन को सम्बोधित किया.

जैवविविधता पर जोखिम

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने मंगलवार को कॉप15 सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए, तत्काल कार्रवाई की आवश्यकता को रेखांकित किया.

महासचिव गुटेरेश ने कहा कि प्रकृति के बिना हम कुछ भी नहीं हैं, मगर मानवता ने सैकड़ों सालों से प्रकृति को क्षति पहुँचाने वाले औज़ारों का सहारा लिया है.

यूएन प्रमुख ने वनों की कटाई से लेकर मरुस्थलीकरण, रसायन व कीटनाशकों से पर्यावरण को पहुँचने वाले नुक़सान का उल्लेख किया, जिनसे भूमि क्षरण का शिकार हुई है और बढ़ती विश्व आबादी के लिये भोजन की व्यवस्था कर पाना कठिन हुआ है.

उन्होंने बताया कि महासागर में क्षरण होने से जीवन को सहारा देने वाली प्रवाल भित्तियों और अन्य समुद्री पारिस्थितिकी तंत्रों का विध्वंस तेज़ हुआ है. इससे उन समुदायों पर गम्भीर असर पड़ा है, जोकि अपनी आजीविका के लिये महासागर पर निर्भर हैं.  

यूएन के शीर्षतम अधिकारी ने बहुराष्ट्रीय कॉरपोरेशन को कटघरे में खड़े करते हुए कहा कि वे अपने बैंक खाते भर रहे हैं, जबकि दुनिया प्रकृति के उपहारों से ख़ाली होती जा रही है.

समुद्र सम्बन्धी आर्थिक गतिविधियों की वार्षिक वैश्विक क़ीमत, 1.5 खरब डॉलर से भी ज़्यादा आँकी गई है.
Ocean Image Bank/Umeed Mistry
समुद्र सम्बन्धी आर्थिक गतिविधियों की वार्षिक वैश्विक क़ीमत, 1.5 खरब डॉलर से भी ज़्यादा आँकी गई है.

'शौचालय जैसा बर्ताव'

एंतोनियो गुटेरेश ने आगाह किया कि मुनाफ़ा कमाने का मौजूदा ढर्रा, प्रकृति और अधिकांश आबादी के वास्तविक हितों के विरुद्ध काम करता है, और मानवता को समझना होगा कि हमारे पास कोई दूसरी पृथ्वी नहीं है.

उन्होंने क्षोभ प्रकट किया कि मानवता सामूहिक विनाश का हथियार बन गई है, और प्रकृति के साथ शौचालय जैसा बर्ताव किया जा रहा है.

यूएन प्रमुख ने प्रकृति की रक्षा के लिये कारगर समाधान के रूप में वैश्विक जैवविविधता समझौते का उल्लेख किया, जिसमें जैवविविधता हानि की मुख्य वजहों – भूमि व समुद्र के इस्तेमाल में बदलाव, प्रजातियों का अत्यधिक दोहन, जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण से निपटा जाएगा.

इस क्रम में, नुक़सानदेह सब्सिडी, ग़लत ढंग से लक्षित निवेश, ग़ैर-टिकाऊ खाद्य प्रणालियों, और उपभोग व उत्पादन के रुझानों के बुनियादी कारकों पर पार पाना होगा.  

काँगो लोकतांत्रिक गणराज्य के ओकापी रिज़र्व में वन्यजीवन.
© FAO/Thomas Nicolon
काँगो लोकतांत्रिक गणराज्य के ओकापी रिज़र्व में वन्यजीवन.

जैवविविधता रक्षा के लिये तीन उपाय

यूएन महासचिव ने प्रकृति की रक्षा सुनिश्चित करने के लिये तीन अहम उपायों पर बल दिया है.

पहला, उन राष्ट्रीय योजनाओं को लागू किया जाना, जिनमें प्रकृति को क्षति पहुँचाने वाली गतिविधियों के लिये सब्सिडी और टैक्स में छूट को ख़त्म किया जाए.  

इसके बजाय, हरित समाधानों जैसेकि नवीकरणीय ऊर्जा को प्रोत्साहन, प्लास्टिक के इस्तेमाल को घटाने, प्रकृति-अनुकूल खाद्य उत्पादन और संसाधनों के टिकाऊ दोहन की ओर बढ़ना होगा.

इन योजनाओं में आदिवासी आबादी व स्थानीय समुदायों के अधिकारों को मान्यता दी जाएगी, जोकि प्रकृति के संरक्षक हैं.

दूसरा, निजी सैक्टर को समझना होगा कि मुनाफ़ा और संरक्षण को एक साथ लेकर चलना होगा, और खाद्य व कृषि उद्योग को सतत उत्पादन, कीटनाशक नियंत्रण,परागण के प्राकृतिक रास्तों पर ध्यान देना होगा.  

टिम्बर, रसायन, निर्माण उद्योगों को अपनी व्यावसायिक योजनाओं में प्रकृति पर होने वाले प्रभावों का आकलन करना होगा, और बायोटेक, औषधि निर्माण और जैवविविधता का दोहन करने वाले अन्य उद्योगों को लाभ का न्यायोचित वितरण सुनिश्चित करना होगा.  

तोते
Unsplash/Alan Godfrey
तोते

उन्होंने हरित लीपापोती की प्रवृत्ति की आलोचना की, जिसके ज़रिये कम्पनियाँ प्रकृति संरक्षण के लिये बड़े-बड़े दावे करती हैं, और कहा कि निजी सैक्टर की उसके क़दमों के लिये जवाबदेही तय की जानी होगी.

तीसरा, विकसित देशों को वैश्विक दक्षिणी गोलार्द्ध में स्थित देशों को साहसिक वित्तीय पोषण प्रदान करना होगा, चूँकि उनके अनुसार, यह बोझ केवल विकासशील देशों के कन्धों पर नहीं छोड़ा जा सकता है.

उन्होंने अन्तरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं और बहुपक्षीय विकास बैंकों से आग्रह किया कि उन्हें अपने पोर्ट फ़ोलियो, जैवविविधता संरक्षण और उसके सतत उपयोग के अनुरूप बनाने होंगे.

महासचिव ने कहा कि एक वैश्विक समुदाय के रूप में, उन सभी देशों के साथ खड़े होने की आवश्यकता है, जोकि दशकों व सदियों के क्षरण व हानि के बाद पारिस्थितिकी तंत्रों की बहाली व संरक्षण के लिये प्रयासरत हैं.