मानवाधिकार, जलवायु परिवर्तन पर चर्चा में एक अहम मुद्दा

पाकिस्तान के सिंध प्रांत में बाढ़ के पानी के नीचे पानी की आपूर्ति लाइन से युवा लड़के पीने का पानी इकट्ठा करते हैं.
© UNICEF/Asad Zaidi
पाकिस्तान के सिंध प्रांत में बाढ़ के पानी के नीचे पानी की आपूर्ति लाइन से युवा लड़के पीने का पानी इकट्ठा करते हैं.

मानवाधिकार, जलवायु परिवर्तन पर चर्चा में एक अहम मुद्दा

जलवायु और पर्यावरण

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर टूर्क ने बुधवार को चेतावनी जारी करते हुए कहा कि आपात जलवायु हालात के दौरान, अपर्याप्त कार्रवाई के कारण मानवता के लिये जीवन का बुनियादी अधिकार ही ख़तरे में है.

यूएन मानवाधिकार प्रमुख अधिकारी ने अपने एक खुले पत्र में लिखा है कि जलवायु परिवर्तन से निपटने के प्रयासों को मानवाधिकारों पर केन्द्रित रखना होगा.

संयुक्त राष्ट्र का वार्षिक जलवायु सम्मेलन (कॉप27) मिस्र के शर्म अल-शेख़ शहर में 6 नवम्बर को आरम्भ होगा.

Tweet URL

वोल्कर टूर्क ने ध्यान दिलाया कि मिस्र में संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन का नतीजा, विश्व भर में आम लोगों के मानवाधिकारों के लिये अति-महत्वपूर्ण है. न केवल अभी के लिये बल्कि आने वाले वर्षों में भी.

यूएन मानवाधिकार उच्चायुक्त के अनुसार, “लोग अपने घर, अपनी आजीविकाएँ और अपनी जान गँवा रहे हैं. फ़िलहाल, तापमान वृद्धि के मौजूदा पथ को देखते हुए, हमारे बच्चों के जीवन काल में ही विश्व के कई हिस्से रहने योग्य नहीं रहेंगे, और इसके अकल्पनीय परिणाम होंगें.”

वोल्कर टूर्क ने कहा कि वैश्विक तापमान में वृद्धि के कारण पनप रहा अन्याय अब विनाशकारी होता जा रहा है.

"पाकिस्तान को देखिये, जहाँ हाल ही में आई भयंकर बाढ़ ने तीन करोड़ से अधिक लोगों को प्रभावित किया है. केवल इस अकेली आपदा के असर को समझने में और पुनर्निर्माण में अनेक वर्ष लग जाएंगें.”

उन्होंने सचेत किया कि “जलवायु परिवर्तन से जुड़ीं घटनाओं का मुक़ाबला करने, उनके असर को कम करने और इसके कारण पहले से उपजी मानवीय पीड़ा से निपटने लिये यदि ठोस, अधिकार-आधारित कार्रवाई नहीं की गई, तो ये विश्व में लोगों के लिये ये बार-बार घटित होने वाला दुःस्वप्न बन सकती हैं."

मानवाधिकार उच्चायुक्त ने कहा कि यह महत्वपूर्ण है कि इस वर्ष का संयुक्त राष्ट्र जलवायु शिखर सम्मेलन, कॉप27, मिस्र की मेज़बानी में लाल सागर तट पर आयोजित किया जा रहा है.

उनके अनुसार ये सम्मेलन एक ऐसे महाद्वीप पर हो रहा है जहाँ जलवायु परिवर्तन के अग्रिम मोर्चे पर लाखों लोग पीड़ित हैं, जबकि वे उत्सर्जन बढ़ने में योगदान भी नहीं देते हैं.

उन्होंने कहा कि अफ़्रीका के लोग जलवायु परिवर्तन के सर्वाधिक दुष्परिणामों को झेलने वालों में हैं.

पेरिस समझौते का  अनुसरण

मानवाधिकार उच्चायुक्त टूर्क ने कहा कि पेरिस जलवायु समझौता अधिकार-आधारित जलवायु कार्रवाई की आवश्यकता को स्पष्ट करता है और इसके लिये सभी देशों द्वारा अपने मानवाधिकार दायित्वों का सम्मान करने की अहमियत को रेखांकित करता है.

उन्होंने जलवायु परिवर्तन पर अन्तरसरकारी आयोग (IPCC) के हालिया निष्कर्षों का उल्लेख करते हुए कहा कि अधिकार-आधारित, सहभागी जलवायु कार्रवाई, लोगों और पृख्वी के लिये अधिक प्रभावी, जायज़ और टिकाऊ परिणाम देती है.

मानवाधिकार उच्चायुक्त के अनुसार, "सदी की सबसे बड़ी चुनौती का समाधान करने के लिये, पूरे समाज के एकजुट होने की और उनके दृष्टिकोण की आवश्यकता है."

"इसलिए यह अत्यावश्यक है कि नागरिक समाज के प्रतिनिधियों सहित हर कोई शर्म अल-शेख़ में होने वाले कॉप27 सम्मेलन में सार्थक रूप से हिस्सा ले सके.”

उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि इस बैठक समेत जलवायु परिवर्तन के बारे में लिये गए निर्णय, पारदर्शी, समावेशी और जवाबदेह होने होंगे, विशेष रूप से सबसे अधिक प्रभावित लोगों के लिये.