यूक्रेन सहित अनेक वैश्विक संकटों के कारण श्रम बाज़ार में बिगड़ते हालात

मैक्सिको के सैंटियागो डी क्वेरेटारो की गलियों में गुड़िया बेचती, मैक्सिको के आदिवासी समूह की एक महिला.
Unsplash/Bernardo Ramonfaur
मैक्सिको के सैंटियागो डी क्वेरेटारो की गलियों में गुड़िया बेचती, मैक्सिको के आदिवासी समूह की एक महिला.

यूक्रेन सहित अनेक वैश्विक संकटों के कारण श्रम बाज़ार में बिगड़ते हालात

आर्थिक विकास

अन्तरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) का एक नया विश्लेषण दर्शाता है कि आपस में गुँथे हुए अनेक आर्थिक व राजनैतिक संकटों का असर, यूक्रेन में जारी युद्ध के कारण और अधिक गहराया है. इससे विश्व भर में श्रम बाज़ार के लिये ख़तरा पनप रहा है और बेरोज़गारी व विषमता बढ़ने की आशंका है.

यूएन श्रम एजेंसी (ILO) ने अपनी रिपोर्ट, 'ILO Monitor on the World of Work. 10th edition' में कामकाजी जगत में मौजूदा परिस्थितियों की समीक्षा की है.

रिपोर्ट के अनुसार वैश्विक श्रम बाज़ार में हालात पिछले कुछ महीनों में बद से बदतर हुए हैं, और मौजूदा रुझानों के तहत रोज़गार के अवसरों में गिरावट आएगी.

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इस वर्ष की अन्तिम तिमाही में वैश्विक रोज़गार वृद्धि पर भी असर पड़ने की आशंका है.

खाद्य व ऊर्जा क़ीमतों में वृद्धि हुई है, वास्तविक आय में कमी आई है, विषमता बढ़ी है, नीतिगत उपाय सिकुड़ रहे हैं और विकासशील देशों पर क़र्ज़ बढ़ रहा है.

आर्थिक प्रगति धीमी होने और कुल मांग में सुस्ती आने के कारण कामगारों की मांग घटने व भर्तियों के सम्बन्ध में अनिश्चितता गहराने की आशंका है.

यूएन श्रम एजेंसी के महानिदेशक गिलबर्ट होउंगबो ने कहा, वैश्विक रोज़गार के मामले में इस चिन्ताजनक स्थिति से निपटने और वैश्विक श्रम बाज़ार में ढलान की रोकथाम के लिये राष्ट्रीय व वैश्विक स्तर पर व्यापक, एकीकृत और सन्तुलित नीतियों की आवश्यकता होगी.

महंगाई बढ़ने के कारण अनेक देशों में वास्तविक आय में गिरावट दर्ज की जा रही है. इससे पहले, कोवडि-19 संकट के दौरान भी आय में कमी आई थी, जिससे कई देशों में निम्न-आय वाले समूह सर्वाधिक प्रभावित हुए थे.   

यूक्रेन संकट की बड़ी क़ीमत

विश्लेषण के अनुसार, यूक्रेन में युद्ध की भयावह मानवीय क़ीमत के साथ-साथ देश की अर्थव्यवस्था और श्रम बाज़ार पर नकारात्मक असर हुआ है.

यूएन एजेंसी का अनुमान है कि वर्ष 2022 में देश में रोज़गार, हिंसक संघर्ष से पहले 2021 में स्तर की तुलना में 15.5 प्रतिशत (24 लाख रोज़गार) कम होने का अनुमान है.

श्रम बाज़ार में यह अनुमानित नुक़सान, इस वर्ष अप्रैल महीने में व्यक्त की आशंका से थोड़ा बेहतरी को दर्शाता है, जब 48 लाख रोज़गार हानि की बात कही गई थी.  

इसकी एक वजह, हिंसा का सामना कर रहे क्षेत्रों में आई कमी को दर्शाया गया है, लेकिन स्थिति नाज़ुक बनी हुई है.

बड़ी संख्या में घरेलू विस्थापन और शरणार्थी अब यूक्रेन व अन्य देशों में काम की तलाश कर रहे हैं, जिससे मौजूदा चुनौती और ज़्यादा गहरी हुई है और आय में गिरावट आने की आशंका है.

अन्य देशों पर आँच

अध्ययन के अनुसार यूक्रेन में युद्ध के प्रभाव पड़ोसी देशों के श्रम बाज़ारों में भी महसूस किये जा रहे हैं, जिससे इन देशों में राजनैतिक व श्रम बाज़ार में अस्थिरता पनपने का ख़तरा है.

मध्य एशिया और विश्व के अन्य देशों में भी, वस्तुओं की क़ीमतों में वृद्धि हुई है, और खाद्य असुरक्षा व निर्धनता बढ़ी है.  

यूएन एजेंसी प्रमुख ने नीतिगत उपायों के ज़रिये सार्वजनिक वस्तुओं की क़ीमतों में कमी लाने, सामाजिक संरक्षा के ज़रिये आय सुरक्षा को मज़बूती देने, आय समर्थन बढ़ाने और सर्वाधिक निर्बलों व उद्यमों के लिये लक्षित उपायों पर ज़ोर दिया है.

संगठन के महानिदेशक ने ‘रोज़गार एवं सामाजिक संरक्षा पर यूएन ग्लोबल ऐक्सीलरेटर’ समेत अन्य उपायों के लिये मज़बूत संकल्प दर्शाए जाने की आवश्यकता को रेखांकित किया है.

बताया गया है कि इस पहल से देशों को 40 करोड़ रोज़गार सृजित करने और चार अरब लोगों को सामाजिक संरक्षा के दायरे में लाने में मदद मिलेगी.

इसके समानान्तर, यूक्रेन में युद्ध पर त्वरित विराम लगाने से भी वैश्विक रोज़गार स्थिति में बेहतरी लाने में योगदान किया जा सकता है.