आतंकवाद: नई प्रौद्योगिकी के प्रयोग से उभरी चुनौतियाँ, निरोधक समिति की विशेष बैठक भारत में

ड्रोन, अत्याधुनिक ढंग से निगरानी करने में सक्षम हैं.
© Unsplash/Peter Fogden
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ड्रोन, अत्याधुनिक ढंग से निगरानी करने में सक्षम हैं.

आतंकवाद: नई प्रौद्योगिकी के प्रयोग से उभरी चुनौतियाँ, निरोधक समिति की विशेष बैठक भारत में

शांति और सुरक्षा

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आतंकवाद निरोधक समिति की 28-29 अक्टूबर को भारत के मुम्बई और नई दिल्ली शहरों में शुक्रवार और शनिवार को एक विशेष बैठक होगी, जिसमें आतंकी गुटों द्वारा नई वर उभरती हुई प्रौद्योगिकियों के इस्तेमाल और उससे पनपने वाले ख़तरों पर चर्चा होगी.

वर्ष 2015 के बाद पहली बार है जब समिति की यह दो-दिवसीय बैठक न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय के बाहर आयोजित की जा रही है.    

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बैठक में तीन प्रमुख विषयों पर विचार-विमर्श होगा: इंटरनैट व सोशल मीडिया; वैश्विक आतंकी नैटवर्क के लिये वित्त पोषण; ड्रोन समेत चालकरहित हवाई प्रणालियों का विस्तार व प्रसार.

ये सभी प्रौद्योगिकी तेज़ी से विकसित हो रही हैं और दुनिया भर में देशों द्वारा अब घरेलू सुरक्षा व आतंकवाद निरोधक उद्देश्यों के लिये इनका अधिकाधिक इस्तेमाल किया जा रहा है.

मगर, आतंकवादी गुट अपने ग़ैरक़ानूनी उद्देश्यों के लिये अत्याधुनिक सॉफ़्टवेयर और हार्डवेयर का भी इस्तेमाल बढ़ा रहे हैं.

आतंक के लिये नई टैक्नॉलॉजी

इस वर्ष के अन्त तक आतंकवाद निरोधक समिति की अध्यक्षता भारत के पास है.

समिति की प्रमुख और भारतीय राजदूत रुचिरा काम्बोज ने न्यूयॉर्क में पत्रकारों को जानकारी देते हुए बताया कि इस अहम बैठक में हाल के घटनाक्रम और आतंकवाद व प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल के बारे में तथ्य-आधारित नवीनतम शोध पर चर्चा होगी.  

राजदूत रुचिरा काम्बोज ने बताया कि बैठक के दौरान, इस विषय में वास्तविक जगत पर आधारित विशेषज्ञता व ज्ञान का आदान-प्रदान होगा, जिसमें सदस्य देश, प्रासंगिक साझीदार व महत्वपूर्ण हितधारक हिस्सा लेंगे.

यह बैठक विचारों को साझा करने का एक ऐसा मंच प्रदान करेगी, जिनसे ऑनलाइन माध्यमों पर फैल रही आतंकवाद-सम्बन्धी सामग्री और आतंकियों द्वारा पेश किये जाने वाले वृतान्तों की रोकथाम में प्रौद्योगिकी सैक्टर से मिल सकने वाली मदद को रेखांकित किया जाएगा.

प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल में निपुण आतंकवादियों द्वारा धन के लेनदेन के लिये अपनाए जा रहे नवाचारी उपायों पर भी चर्चा होने की सम्भावना है, जिनमें सोशल मीडिया मंचों पर दान के लिये अपील समेत, धनराशि जुटाने के अन्य तौर-तरीक़े भी शामिल हैं.

ड्रोन व कृत्रिम बुद्धिमता

बैठक के दौरान, ग़ैरक़ानूनी उद्देश्यों के लिये 3-डी प्रिंटिंग, रोबोटिक्स, कृत्रिम बुद्धिमता (AI), मशीन लर्निंग, चालकरहित हवाई प्रणाली समेत अन्य प्रौद्योगिकियों के इस्तेमाल पर विमर्श होगा.

सूचना तकनीक के लिये समिति समन्वयक जेनीफ़र ब्रैमलेट ने ड्रोन के बढ़ते इस्तेमाल पर कहा कि सदस्य देशों ने इससे निपटने के लिये पहले ही कुछ क़दम उठाए हैं.  

इसके तहत, हवाई अड्डों व महत्वपूर्ण बुनियादी ढाँचों के आस-पास नो-फ़्लाई ज़ोन स्थापित किये गए हैं.

कम्पनियों ने कुछ ऐसे उपाय (geo-locking) भी किये हैं, जिससे कुछ निश्चित स्थलों पर उड़ने वाले ड्रोन विमान स्वचालित ढंग से निष्क्रिय किये जा सकते हैं.

इसके साथ-साथ, अन्य बिन्दुओं पर भी विचार-विमर्श जारी रहेगा, जिसमें यह तय किया जा सकता है कि ड्रोन की बिक्री किस तरह की जाए है, और उन्हें कौन लोग या पक्ष ख़रीद सकते हैं.

आतंकवादी गुटों द्वारा डिजिटल टैक्नॉलॉजी का इस्तेमाल करने के प्रति चिन्ता बढ़ रही है.
© Unsplash/Philipp Katzenberger
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आतंकवादी गुटों द्वारा डिजिटल टैक्नॉलॉजी का इस्तेमाल करने के प्रति चिन्ता बढ़ रही है.

सहमति प्रयास

इस मुद्दे की जटिलताओं, और इसमें तेज़ी से आ रहे बदलावों के कारण, सदस्य देशों में एक निष्कर्ष दस्तावेज़ पर सहमति बनने की आशा है, जोकि इस बात पर केन्द्रित होगा कि आतंकवादी तत्व, किस तरह से प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल कर रहे हैं.

इसका लक्ष्य, आतंकवादियों के तर्कों व वृतान्तों पर लगाम कसने और उनके द्वारा प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल पर विराम लगाना होगा.

इसके समानान्तर, सदस्य देश हाल के घटनाक्रमों व ख़तरों पर शोध के सिलसिले में नवीनतम जानकारी साझा करेंगे, और उन सर्वोत्तम तौर-तरीक़े भी पेश किये जाएंगे, जोकि अन्तरराष्ट्रीय मानवाधिकार क़ानून के अनुरूप हैं.  

ऐसे साझा उपायों पर भी चर्चा होगी, जो औद्योगिक सहयोग, सार्वजनिक-निजी साझेदारी व क़ानून, और नीतिगत व नियामक क़दमों के ज़रिये अपनाए जा सकते हैं.

आतंकवाद निरोधक समिति

11 सितम्बर 2001 को अमेरिका में आतंकवादी हमलों के बाद, सर्व सहमति से 28 सितम्बर 2001 को आतंकवाद निरोधक समिति गठित की गई थी, जिसमें सुरक्षा परिषद के सभी 15 सदस्य देश शामिल हैं.

समिति का दायित्व ऐसे उपाय लागू किये जाने की निगरानी करना है, जिनसे देशों में क़ानूनी व संस्थागत आतंकवाद निरोधक क्षमताओं को स्थानीय व अन्तरराष्ट्रीय, हर स्तर पर मज़बूती मिलती हो.

समिति की प्रमुख ने पत्रकारों को सम्बोधित करते हुए कहा कि किसी भी आतंकवादी कृत्य को न्यायोचित नहीं ठहराया जा सकता है, भले ही उसकी कोई भी वजह बताई जाए.

राजदूत काम्बोज ने कहा कि एक बैठक, मुम्बई के ताज महल पैलेस होटल में होगी, जोकि प्रतीकात्मक रूप से महत्वपूर्ण स्थल है.

इस दौरान, वर्ष 2008 में महानगर में चार दिन तक चले आतंकवादी हमले के पीड़ितों को श्रृद्धांजलि अर्पित की जाएगी. उस हमले में बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई थी.

दूसरे दिन बैठक का आयोजन भारत की राजधानी नई दिल्ली में होगा. उन्होंने कहा कि आतंकवाद की समस्या, स्पष्ट रूप से राष्ट्रों की सीमाओं से परे जाने वाला एक मुद्दा है.

इसके मद्देनज़र, सदस्य देशों के बीच रचनात्मक सहयोग, कारगर समाधानों को सुनिश्चित करने के लिये महत्वपूर्ण है.