यूक्रेन: यूएन के नेतृत्व वाली अनाज पहल से, वैश्विक खाद्य सुरक्षा को मिली मज़बूती
संयुक्त राष्ट्र व्यापार एवं विकास कार्यक्रम (UNCTAD) की एक नई रिपोर्ट दर्शाती है कि युद्धग्रस्त यूक्रेन से अनाज निर्यात के लिये, संयुक्त राष्ट्र के नेतृत्व में ‘काला सागर अनाज पहल’ के ज़रिये उन लाखों-करोड़ों लोगों में आशा का संचार हुआ है, जोकि बढ़ती क़ीमतों और खाद्य आपूर्ति में आए व्यवधान के कारण मुश्किलों का सामना कर रहे थे.
यूएन एजेंसी ने इस स्थिति के मद्देनज़र सचेत किया है कि इस अनाज निर्यात पहल की अवधि समाप्त होने की समय सीमा नज़दीक आ रही है, जिससे इस पहल को, नए सिरे से आगे बढ़ाया जाना अहम होगा.
संयुक्त राष्ट्र प्रमुख एंतोनियो गुटेरेश के नेतृत्व में, इस वर्ष जुलाई महीने में, यूक्रेन, रूस और तुर्कीये के दरम्यान अनाज निर्यात के लिये इस पहल पर सहमति बनी.
इसके बाद से, यूक्रेनी बन्दरगाहों पर गतिविधियाँ बढ़ी हैं, और अनाज की विशाल खेप विश्व बाज़ारों के लिये रवाना की जा रही है. इस समझौते के तहत, रूस से उर्वरकों का निर्यात भी बढ़ाया जाना है.
ज़रूरतमन्दों के लिये आपूर्ति
काला सागर अनाज निर्यात पहल के तहत, 19 अक्टूबर तक, 80 लाख मीट्रिक टन अनाज व अन्य खाद्य वस्तुओं का निर्यात किया जा चुका है.
रिपोर्ट के अनुसार, “यूएन के नेतृत्व में इस पहल ने वैश्विक खाद्य क़ीमतों में स्थिरता लाने और फिर कमी लाने में मदद की है, और बहुमूल्य अनाज को विश्व की अन्न टोकरी में से एक [देश] से ज़रूरतमन्दों की मेज़ तक ला पाना सम्भव हुआ है.”
खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) द्वारा प्रकाशित ‘खाद्य क़ीमत सूचकांक’ दर्शाता है कि वैश्विक स्तर पर बुनियादी खाद्य वस्तुओं के दामों में हाल के महीनों में गिरावट आई है.
इसमें जुलाई में 8.6 प्रतिशत, अगस्त में दो प्रतिशत और सितम्बर में 1.1. प्रतिशत की कमी आई.
मगर इस पहल की अवधि नवम्बर में समाप्त हो रही है और इसे बढ़ाए जाने पर अभी अनिश्चितता है. रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि गेहूँ और मक्का समेत कुछ अन्य वस्तुओं के दाम फिर से बढ़ रहे हैं.
यूएन एजेंसी ने बताया कि काला सागर अनाज पहल के अभाव में, खाद्य सुरक्षा प्रदान कर पाना बहुत कठिन होगा, विशेष रूप से विकासशील व सबसे कम विकसित देशों के लिये.
अनाज खेप की आवाजाही
इस पहल के ज़रिये यूक्रेन से अनाज आपूर्ति के रास्तों को दुनिया भर के लिये खोलने में मदद मिली.
यूक्रेन के बन्दरगाहों से अब तक निर्यातित 80 लाख टन में से क़रीब 70 फ़ीसदी मक्का और गेहूँ है. क़रीब 20 प्रतिशत गेहूँ का निर्यात सबसे कम विकसित देशों और निर्बल आबादियों के लिये किया गया है.
अगस्त और सितम्बर के बीच के महीनों में, इस पहल के अन्तर्गत सबसे कम विकसित देशों के लिये रवाना किये गए गेहूँ की मात्रा दोगुनी हो गई, जोकि क़रीब पाँच लाख टन थी.
लेकिन, इस वर्ष जनवरी से सितम्बर महीनों के दौरान सबसे कम विकसित देशों के लिये गेहूँ निर्यात, 10 लाख टन से कम रहा, जोकि 2021 की तुलना में 12 लाख टन के निर्यात अन्तर को दर्शाता है.
रिपोर्ट के अनुसार अतीत में किये गए निर्यात के स्तर को प्राप्त करने के लिये और अधिक प्रयास किये जाने की आवश्यकता है.
क़ीमतों में गिरावट के लिये प्रयास
इस पहल के ज़रिये, अधिक मात्रा में अनाज उपलब्ध बनाने में मदद मिली है, जिसका असर खाद्य क़ीमतें कम होने के रूप में हुआ है.
इससे खाद्य सामग्री की वैश्विक सुलभता में बेहतरी आई है, विशेष रूप से निर्धनतम व निर्बलतम समुदायों के लिये.
काला सागर अनाज पहल की सम्भावना और बन्दरगाह फिर से खोले जाने से, बाज़ार क़ीमतों के रिकॉर्ड स्तर को नीचे ला पाना सम्भव हुआ.
मगर, गेहूँ और मक्का की क़ीमतें अब भी ऊँचे स्तर पर हैं, और इसके कारण बुनियादी खाद्य वस्तुएँ ख़रीद पाने की क्षमता और विश्व भर में खाद्य सुरक्षा पर असर हुआ है.
इन कारणों से, यूएन के नेतृत्व में इस पहल की अवधि फिर से बढ़ाने को अहम बताया गया है, विशेष रूप से विकासशील देशों के लिये.
यह रिपोर्ट इस पहल के लिये स्थापित ‘संयुक्त समन्वय केन्द्र’ (Joint Coordination Center/JCC) के योगदान से तैयार की गई है, जिसमें रूसी महासंघ, तुर्कीये, यूक्रेन और संयुक्त राष्ट्र के वरिष्ठ प्रतिनिधि शामिल हैं.