ईरान: विरोध प्रदर्शनों में बच्चों की मौतों व उन्हें बन्दी बनाए जाने पर चिन्ता

ईरान की तथाकथित नैतिकता पुलिस की हिरासत में 22 वर्षीय महसा अमिनी की मौत के बाद स्वीडन के स्टॉकहोम में प्रदर्शनकारी एकत्र हुए.
Unsplash/Artin Bakhan
ईरान की तथाकथित नैतिकता पुलिस की हिरासत में 22 वर्षीय महसा अमिनी की मौत के बाद स्वीडन के स्टॉकहोम में प्रदर्शनकारी एकत्र हुए.

ईरान: विरोध प्रदर्शनों में बच्चों की मौतों व उन्हें बन्दी बनाए जाने पर चिन्ता

महिलाएं

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय (OHCHR) ने ईरान में पिछले एक महीने से जारी विरोध प्रदर्शनों के दौरान, सुरक्षा बलों की हिंसक कार्रवाई में बच्चों की मौत होने और उन्हें हिरासत में लिये जाने के मामलों पर गहरी चिन्ता जताई है.

मानवाधिकार कार्यालय की प्रवक्ता रवीना शमदासानी ने मंगलवार को जिनीवा में बताया कि कुछ स्रोतों के अनुसार, अब तक 23 बच्चों की मौत होने और अनेक अन्य के घायल होने की जानकारी मिली है.

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ईरान के कम से कम सात प्रान्तों में हुई इन घटनाओं में सुरक्षा बलों द्वारा कारतूसों, नज़दीक से दागी गई धातु की गोलियों के प्रयोग और और प्रदर्शनकारियों की बुरी तरह पिटाई किये जाने की ख़बरें हैं.

कई स्कूलों में छापेमारी के बाद बच्चों को गिरफ़्तार किया गया है. सुरक्षा बलों के साथ सहयोग नहीं करने के आरोप में कुछ प्रधानाचार्य भी कथित तौर पर हिरासत में लिये गए हैं.

इससे पहले, ईरान के शिक्षा मंत्री ने 11 अक्टूबर को पुष्टि की थी कि तथाकथित देश-विरोधी प्रदर्शनों में हिस्सा लेने के कारण गिरफ़्तार किए जाने के बाद, कुछ बच्चों को "मनोवैज्ञानिक केन्द्रों" में भी भेजा गया था.

बाल अधिकारों की रक्षा

प्रवक्ता रवीना शमदासानी ने कहा कि, “हम ईरानी अधिकारियों से बच्चों से सम्बन्धित सभी कथित मामलों की त्वरित, निष्पक्ष और स्वतंत्र जाँच कराए जाने, और इनके लिये ज़िम्मेदार लोगों पर मुकदमा चलाये जाने का आग्रह करते हैं, इनमें बच्चों की मौतों के मामले भी शामिल हैं.”

यूएन कार्यालय प्रवक्ता ने ध्यान दिलाया कि मानवाधिकार सन्धियों के अन्तर्गत, ईरान का यह दायित्व है कि किसी भी परिस्थिति में बच्चों के जीवन के अधिकार की रक्षा सुनिश्चित की जाए.

साथ ही, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शान्तिपूर्ण विरोध के अधिकार का भी सम्मान किया जाना होगा.

ईरान में एक युवा महिला महसा अमीनी को ‘नैतिकता पुलिस’ ने 13 सितम्बर को गिरफ़्तार किया था. उन्हें हिरासत में लेते समय बुरी तरह मारे-पीटे जाने के आरोप लगे, जिनका ईरानी अधिकारियों ने खंडन किया है.

महसा अमीनी को पुलिस ने कथित तौर पर सही तरीक़े से हिजाब नहीं पहनने के आरोप में गिरफ़्तार किया था और कुछ दिन बाद पुलिस हिरासत में ही उनकी की मौत हो गई. इसके बाद ईरान के अनेक शहरों में विरोध प्रदर्शन भड़क उठे.

सुरक्षा बलों की हिंसक कार्रवाई

यूएन मानवाधिकार विशेषज्ञों ने ईरानी सुरक्षा बलों द्वारा, देश भर में शान्तिपूर्ण प्रदर्शनकारियों और मानवाधिकार पैरोकारों को निशाना बनाकर की जाने वाली हिंसा की भी निन्दा की है.

प्रवक्ता शमदासानी ने कहा, “प्रदर्शनकारियों की सामूहिक गिरफ्तारी के साथ-साथ, हमारे कार्यालय को मानवाधिकार कार्यकर्ताओं, वकीलों, कलाकारों और पत्रकारों सहित नागरिक समाज के कम से कम 90 सदस्यों की गिरफ़्तारी की जानकारी भी मिली है.”

12 अक्टूबर को राजधानी तेहरान में बार एसोसिएशन के बाहर प्रदर्शनों के दौरान तीन वकीलों को गिरफ़्तार किया गया था.

तेहरान के एविन कारागार में बड़ी संख्या में मानवाधिकार कार्यकर्ताओं, पत्रकारों, छात्रों, वकीलों, विपक्षी नेताओं और पर्यावरण विशेषज्ञों को जेल में बन्द किया गया है, जहाँ 15 अक्टूबर को अचानक आग लगने की घटना हुई थी.

फ़िलहाल घटना की विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं है, लेकिन विस्फोटों और गोली-बारी की भी खबरें मिली हैं, जिसमें कम से कम आठ बन्दियों के मारे जाने और 61 के घायल होने की सूचना है.

सुरक्षा बलों द्वारा घटना के दौरान अनेक क़ैदियों को कथित तौर पर पीटा गया और फिर अन्य हिरासत केंद्रों में स्थानान्तरित कर दिया गया.

बुरा बर्ताव और उत्पीड़न

यूएन मानवाधिकार प्रवक्ता रवीना शमदासानी ने क़ैदियों के साथ बुरा बर्ताव किये जाने, उनके उत्पीड़न और चिकित्सा लापरवाही के मामलों पर पहले भी अपनी चिन्ता व्यक्त की है और उन्होंने इसे मंगलवार को भी दोहराया.

उन्होंने क्षोभ जताया कि क़ैदियों को एकान्त कारावास में रखे जाने, वकील के साथ सम्पर्क की अनुमति ना दिये जाने समेत, उचित क़ानूनी प्रक्रिया का उल्लंघन एक आम बात हो गई है.

रवीना शमदासानी का कहना है कि प्रदर्शनकारियों के विरुद्ध लगातार अनावश्यक और अत्यधिक बल प्रयोग को रोका जाना होगा.

“अभिव्यक्ति की आज़ादी और शान्तिपूर्ण सभा करने के अपने अधिकारों का प्रयोग करने के लिये लोगों को गिरफ़्तार करना, मनमाने ढंग से उन्हें उनकी स्वतंत्रता से वंचित करना है.”

“हम मनमाने ढंग से हिरासत में लिये गए सभी लोगों की तत्काल रिहाई की मांग करते हैं.”

साथ ही, हम ध्यान दिलाते हैं कि अन्तरराष्ट्रीय क़ानून के तहत बन्दियों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य व कल्याण की रक्षा करना, प्रशासन की ज़िम्मेदारी है.

उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि किसी भी प्रकार के बल प्रयोग को वैधता, आवश्यकता, आनुपातिकता और ग़ैर-भेदभाव के नियमों का कड़ाई से पालन करते हुए इस्तेमाल में लाया जाना होगा.