यूक्रेनी क्षेत्रों का ‘ग़ैरक़ानूनी हरण’ मुद्दा, महासभा प्रस्ताव में रूस से पीछे हटने की मांग

यूक्रेन के मरिन्का इलाक़े में, गोलाबारी में ध्वस्त हुई एक रिहायशी इमारत के बाहर खड़े कुछ लोग. (फ़ाइल)
© UNICEF/Ashley Gilbertson
यूक्रेन के मरिन्का इलाक़े में, गोलाबारी में ध्वस्त हुई एक रिहायशी इमारत के बाहर खड़े कुछ लोग. (फ़ाइल)

यूक्रेनी क्षेत्रों का ‘ग़ैरक़ानूनी हरण’ मुद्दा, महासभा प्रस्ताव में रूस से पीछे हटने की मांग

शांति और सुरक्षा

संयुक्त राष्ट्र महासभा ने बुधवार को भारी बहुमत से एक प्रस्ताव पारित किया है, जिसमें सदस्य देशों से यूक्रेन के उन चार क्षेत्रों को मान्यता ना देने का आग्रह किया गया है, जहाँ रूसी महासंघ ने पिछले महीने तथाकथित जनमत संग्रह कराए जाने के बाद अपना दावा पेश किया है.

इस प्रस्ताव में रूस से मांग की गई है कि वो, ग़ैरक़ानूनी ढंग से इन क्षेत्रों का हरण किये जाने की कोशिश से पीछे हटे.   

महासभा में बुधवार को हुए मतदान के दौरान 143 सदस्य देशों ने प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया, पाँच देशों ने विरोध में वोट डाले, जबकि 35 सदस्य देशों ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया.

यूएन चार्टर के सिद्धान्तों की रक्षा के मुद्दे पर लाए गए इस प्रस्ताव में बताया गया है कि यूक्रेन के चार क्षेत्रों दोनेत्स्क, ख़ेरसॉन, लूहांस्क और ज़ैपोरिझझिया पर रूस ने आक्रामक कार्रवाई के बाद अस्थाई रूप से अपना क़ब्ज़ा कर लिया है.

इससे यूक्रेन की क्षेत्रीय अखंडता, सम्प्रभुता और राजनैतिक स्वतंत्रता का उल्लंघन हुआ है.

इससे पहले, यूक्रेन के इन क्षेत्रों का रूस द्वारा हरण किये जाने की कोशिश पर सुरक्षा परिषद में प्रस्ताव लाया गया था, जिसे रूस ने वीटो कर दिया था. इसके बाद यह प्रस्ताव यूएन महासभा में चर्चा के लिये पेश किया गया.

यूएन महासभा में पारित होने वाले इस प्रस्ताव में सभी सदस्य देशों, संयुक्त राष्ट्र और अन्तरराष्ट्रीय संगठनों से पुकार लगाई गई है कि यूक्रेन के चार क्षेत्रों को अपनी सीमाओं में मिलाने के लिये, रूस द्वारा की जा रही कोशिशों को मान्यता नहीं दी जाए.

प्रस्ताव में यूएन महासचिव और सदस्य देशों द्वारा मौजूदा तनाव में कमी लाने के लिये किये जा रहे प्रयासों का स्वागत किया गया है और उनके लिये मज़बूत समर्थन व्यक्त किया गया है.

साथ ही, संवाद, आपसी बातचीत और मध्यस्थता के ज़रिये शान्ति की तलाश पर बल दिया गया है.

प्रस्ताव पर सोमवार को चर्चा की शुरुआत हुई, और महासभा अध्यक्ष कसाबा कोरोसी ने अपने सम्बोधन में कहा कि यूएन चार्टर, महासचिव और महासभा का स्पष्ट रुख़ रहा है: रूस का आक्रमण और यूक्रेनी क्षेत्र का बलपूर्वक हरण, ग़ैरक़ानूनी है.

नागरिक इलाक़ों पर बमबारी

सोमवार सुबह से रूस ने यूक्रेनी शहरों पर बड़ी संख्या में मिसाइल हमले किये हैं, जिसमें नागरिक आबादी वाले इलाक़ों को निशाना बनाया गया है.

क्राइमिया से जोड़ने वाले रूसी पुल पर बमबारी की घटना के बाद किये गए इन हमलों में बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई है और अनेक अन्य घायल हुए हैं.

यूएन प्रमुख एंतोनियो गुटेरेश ने कहा कि ये हमले, 24 फ़रवरी को अपने पड़ोसी देश पर रूसी आक्रमण के बाद, हालात को जिस तरह से भड़काते हैं, वो अस्वीकार्य है.

यूएन महासभा अध्यक्ष कोरोसी ने सोमवार को चर्चा की शुरुआत पर कहा कि जब ध्वस्त हो रहे शहरों व रक्त से लथपथ शरीरों की तस्वीरों को देखना एक दैनिक कार्य बन जाए, तो हम अपनी मानवता खो देते हैं.

उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि हमें यूएन चार्टर और अन्तरराष्ट्रीय क़ानून पर आधारित एक राजनैतिक समाधान ढूंढना ही होगा.