FAO: वैश्विक खाद्य उपलब्धता संकट को रोकने के लिये एकजुटता की पुकार

एक भारतीय महिला खेत में फ़सल तैयार होने के बाद अनाज और भूसा अलग करते हुए.
World Bank/Ray Witlin
एक भारतीय महिला खेत में फ़सल तैयार होने के बाद अनाज और भूसा अलग करते हुए.

FAO: वैश्विक खाद्य उपलब्धता संकट को रोकने के लिये एकजुटता की पुकार

मानवीय सहायता

संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन (FAO) के मुखिया ने बुधवार को कहा है कि यूक्रेन युद्ध ने ऐसे देशों के लिये संकट उत्पन्न कर दिये हैं जो उनकी आबादियों के लिये खाद्य सामग्रियाँ हासिल करने में संघर्ष कर रहे हैं, अन्तरराष्ट्रीय समुदाय को ये सुनिश्चित करना होगा कि ये स्थिति “खाद्य उपलब्धता संकट” में तब्दील ना हो जाए.

 यूएन खाद्य और कृषि एजेंसी (FAO) के महानिदेशक क्यू डोंगयू ने इण्डोनेशिया के बाली शहर में, औद्योगीकृत देशों के संगठन - G20 के कृषि मंत्रियों की एक बैठक में कहा कि यूक्रेन युद्ध के सात महीनों के दौरान, निर्बल हालात वाले देशों में यूक्रेनी अनाज, वनस्पति तेल और अन्य महत्वपूर्ण खाद्य सामग्रियों की उपलब्धता सीमित हुई है, ऐसे में ”हमें वैश्विक स्तर पर कृषि आधारित खाद्य व्यवस्थाओं की सहनक्षमता बढ़ानी होगी.”

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अनाज समझौता, एक महत्वपूर्ण क़दम

क्यू डोंगयू ने संयुक्त राष्ट्र समर्थित काला सागर अनाज पहल को, आगे की दिशा में एक महत्वपूर्ण क़दम क़रार देते हुए कहा कि इस पहल की बदौलत, अभी तक 50 लाख मीट्रिक टन से भी ज़्यादा खाद्य सामग्री उपलब्ध हो सकी है. इसमें से लगभग एक चौथाई अनाज, सीधे निम्न आय वाले देशों को जा रहा है.

उन्होंने कहा, “मगर इसके बावजूद, इस पहल के तहत, बेहद निर्बल परिस्थितियों वाले देशों के लिये खाद्य उपलब्धता बेहतर बनाने की ज़रूरत है.”

दुनिया भर में कुल मिलाकर फ़िलहाल लगातार पाँचवें महीने में, थोक खाद्य क़ीमतें नीचे आ रहे हैं, मगर उपभोक्ता खाद्य मूल्य और मुद्रा स्फीति बढ़ रहे हैं, “इस स्थिति के, वैश्विक खाद्य सुरक्षा और पोषण के लिये, विनाशकारी नतीजे होंगे.”

और यूक्रेन युद्ध से उत्पन्न संकट से परे भी, अत्यन्त चरम मौसम की घटनाओं से भी, दुनिया भर में, उपज बर्बादी और नाकामी बढ़ेगी.

यूएन एजेंसी के प्रमुख ने कहा, “गेहूँ और सोयाबीन बाज़ारों में बेहतरी के अनुमान हैं, मगर मक्का व धान के लिये, कम सकारात्मक अनुमान हैं, साथ ही उर्वरक बाज़ारों में सीमित आपूर्ति है, और वो उतार-चढ़ाव के लिये नाज़ुक बने हुए हैं...”

“ये सुनिश्चित करने के लिये बहुत कुछ किया जाना होगा कि लोगों को सुरक्षित व पोषक खाद्य सामग्रियाँ, पर्याप्त मात्रा में मिल सकें, जिनसे उनकी दैनिक ख़ुराक ज़रूरतें पूरी हो सकें और एक स्वस्थ जीवन की प्राथमिकताएँ भी पूरी हो सकें.”

सहनक्षमता के लिये नुस्ख़ा

यूएन एजेंसी के मुखिया क्यो डोंगयू ने कहा कि वर्तमान और भविष्य में, सहनक्षमता बढ़ाने के लिये, ठोस क़दम उठाने होंगे:  

  • चेतावनी और अग्रिम कार्रवाई प्रणालियों में बेहतरी.
  • उत्पाकता में टिकाऊ बढ़ोत्तरी.
  • व्यापार को बढ़ावा; और अजैविक उर्वरक की आपूर्ति सम्बन्धी व्यवधानों के नवाचारी समाधान तलाश करना.

उन्होंने मंत्रियों से कहा कि ये बहुत ज़रूरी है कि नवाचार को बढ़ावा दिया जाए, विषमता कम करने के लिये, बुनियादी ढाँचे में संसाधन निवेश किया जाए, खाद्य बर्बादी और अपशिष्ट को कम किया जाए, और तत्कालीन स्तर पर खाद्य उपलब्धता बेहतर बनाई जाए.

उन्होंने कहा कि इन लक्ष्यों की प्राप्ति के लिये, खाद्य व कृषि संगठन ने, खाद्य आयात वित्त सुविधा का प्रस्ताव रखा है, जिसकी ज़िम्मेदारी अब अन्तरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने संभाल ली है.

निम्न आय वाले देशों को समर्थन

खाद्य आयात वित्त सुविधा के विचार के पीछे, निम्न आय वाले, खाद्य आयात करने वाले 62 देशों को धन मुहैया कराने की मंशा है, जहाँ क़रीब एक अरब 80 करोड़ कीआबादी बसती है, जिससे वो अपनी अधिकतर तात्कालिक ज़रूरतें पूरी कर सकें.

क्यू डोंगयू ने कहा कि काला सागर अनाज निर्यात पहल के तहत, यूक्रेन और रूस से निर्यात बढ़ाना बहुत अहम है.

उन्होंने कहा कि युद्ध, कोविड-19 महामारी के कारण आर्थिक मन्दी और जलवायु संकट, हमारे सामने आज दरपेश और भविष्य के संकटों के प्रमुख कारण हैं.

“ये बहुत अहम है कि सभी देश शान्ति और स्थिरता के लाभों में एक साथ आएँ, ताकि हम सभी शान्ति के लिये प्रतिबद्ध हों. शान्ति के बिना, हम भुखमरी के पूर्ण अन्त और टिकाऊ विकास लक्ष्य ((SDGs) हासिल नहीं कर सकेंगे.”