यूएन महासभा के 77वें सत्र के लिये अध्यक्ष कसाबा कोरोसी.

जनरल डिबेट का समापन: नई चुनौतियों से परिपूर्ण दौर में, वैश्विक एकजुटता पर बल

UN Photo/Cia Pak
यूएन महासभा के 77वें सत्र के लिये अध्यक्ष कसाबा कोरोसी.

जनरल डिबेट का समापन: नई चुनौतियों से परिपूर्ण दौर में, वैश्विक एकजुटता पर बल

यूएन मामले

संयुक्त राष्ट्र महासभा में एक सप्ताह तक, सदस्य देशों की प्राथमिकताओं, उनके समक्ष मौजूद चुनौतियों व उनके प्रभावों पर विचार-विमर्श के बाद, जनरल ऐसेम्बली के 77वें सत्र का उच्चस्तरीय खण्ड सोमवार को समाप्त हो गया. यूएन महासभा अध्यक्ष ने अपने समापन सम्बोधन में कहा कि इस दौरान बड़ी संख्या में प्रतिभागियों की उपस्थिति दर्शाती है कि अन्तरराष्ट्रीय सम्बन्धों के परिप्रेक्ष्य में जनरल डिबेट कितनी अहम है. 

महासभा अध्यक्ष कसाबा कोरोसी ने बताया कि “इस वर्ष हमने 190 वक्ताओं को सुना, जिनमें 76 राष्ट्राध्यक्ष, 50 सरकार प्रमुख, चार उप-राष्ट्रपति, पाँच उप प्रधानमंत्री, 48 मंत्री और सात प्रतिनिधिमण्डल प्रमुख थे.”

वैश्विक महामारी कोविड-19 का प्रकोप शुरू होने के बाद यह पहली बार है जब यूएन महासभा के वार्षिक सत्र के दौरान व्यापक स्तर पर नेताओं ने व्यक्तिगत रूप से भागीदारी की. वक्ताओं में केवल 23 महिलाएँ थीं.

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उन्होंने कहा कि 190 वक्तव्यों का कुछ शब्दों में सारांश प्रस्तुत नहीं किया जा सकता. इसके बजाय, उन्होंने साझा थीम पर ध्यान केन्द्रित करते हुए बताया कि यह जागरूकता बढ़ रही है कि मानवता ने एक नए युग में प्रवेश किया है.

उन्होंने कहा कि जटिल चुनौतियों और अनेक परतों को समेटने वाले संकटों का सामना करते हुए, दुनिया एक बड़े बदलाव के दौर से गुज़र रही है. 

वैश्विक सहयोग के लिये बुनियादी शर्तें बदली हैं, और नई चुनौतियों से परिपूर्ण जगत में प्राथमिकताएँ, भूमिकाएँ और तौर-तरीक़ें बदल रहे हैं.

यूक्रेन युद्ध

महासभा प्रमुख ने कहा कि जनरल ऐसेम्बली में यूक्रेन में युद्ध पर विराम लगाने के लिये आवाज़ गूंज उठी. उन्होंने कहा कि सदस्य देशों क़िल्लत, मुद्रास्फीति, शरणार्थी, परमाणु सुरक्षा और भ्रामक सूचनाओं व प्रोपेगण्डा के ख़तरों के प्रति चिन्तित हैं.

उन्होंने बताया कि यूक्रेन फ़िलहाल विश्व भर में 30 सशस्त्र संघर्षों में से एक है और हालात अभी कहीं भी नहीं सुधर रहे हैं.

जलवायु परिवर्तन

कसाबा कोरोसी के अनुसार, जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर भी वक्ताओं ने अपनी गहरी चिन्ता प्रकट की. 

इस दौरान, उन देशों का उल्लेख किया गया, जिन्हें बाढ़ व सूखे का एक साथ सामना करना पड़ रहा है, जहाँ उत्पादन व खपत का असंवहनीय रुझान है, प्लास्टिक प्रदूषण से महासागर कष्ट में हैं और मछलियों की मौत हो रही है. 

उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर नैट-शून्य और जलवायु न्याय की पुकारों के बावजूद, कुछ अब भी संतुष्ट महसूस नहीं करते हैं कि अर्थव्यवस्थाओं में वृद्धि और उत्सर्जन में कटौती व जैवविविधता संरक्षण में सन्तुलन साधा जा सकता है. 

मानवाधिकारों की रक्षा

यूएन महासभा प्रमुख के अनुसार मानवाधिकारों के लिये परिस्थितियों को बेहतर बनाने और शोषण का सर्वाधिक जोखिम झेल रहे समुदायों की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिये भी आवाज़ उठी.

“मानवाधिकार उल्लंघन के बारे में आवाज़ उठाये जाने की एक क़ीमत है, मगर आवाज़ बुलन्द करने की आज़ादी को मज़बूत समर्थन प्राप्त है.”

सुधार व नई ऊर्जा

महासभा अध्यक्ष ने कहा कि वैश्विक संकटों से निपटने के लिये जनरल ऐसेम्बली में नई ऊर्जा भरे जाने के विषय में समर्थन नज़र आया. इस सदी की वास्तविकताओं को परिलक्षित करने के लिये सुरक्षा परिषद में सुधार की भी बात उठी. 

उन्होंने कहा कि कोविड-19 के बाद की एक शान्तिपूर्ण दुनिया में भरोसा जगाना होगा, जहाँ सभी एक साथ मिलकर जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिये काम कर सकें.  

उन्होंने अपने मूलमंत्र को दोहराया कि एकजुटता, सततता और विज्ञान के ज़रिये समाधानों के साथ इस दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है.

“एकजुटता में प्रगाढ़ता के लिये, हमें भरोसे पैदा करना होगा.”

भावी दिशा

महासभा प्रमुख की सार्वभौमिक रूप से स्वीकार्य और स्वामित्व वाले उपायों को मज़बूती प्रदान करने के लक्ष्य से, सिलसिलेवार वार्ताओं को शुरू करने की योजना है, जिसमें वैज्ञानिक समुदाय को भी सम्मिल्लित किया जाएगा.

उन्होंने बताया कि वह आगामी यूएन जल सम्मेलन की तैयारियों, आपदा प्रबन्धन के लिये सेण्डाई फ़्रेमवर्क की मध्यावधि समीक्षा और टिकाऊ विकास लक्ष्यों पर शिखर बैठक के लिये भी उत्सुक हैं.