रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लैवरोफ़ ने शनिवार, 24 सितम्बर, को यूएन महासभा के सभ के दौरान उच्चस्तरीय जनरल डिबेट को सम्बोधित किया.

रूस: यूक्रेन में ‘विशेष सैन्य अभियान’ के अलावा कोई अन्य विकल्प नहीं था, विदेश मंत्री  

UN Photo/Cia Pak
रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लैवरोफ़ ने शनिवार, 24 सितम्बर, को यूएन महासभा के सभ के दौरान उच्चस्तरीय जनरल डिबेट को सम्बोधित किया.

रूस: यूक्रेन में ‘विशेष सैन्य अभियान’ के अलावा कोई अन्य विकल्प नहीं था, विदेश मंत्री  

शांति और सुरक्षा

रूसी महासंघ के विदेश मंत्री सर्गेई लैवरोफ़ ने यूएन महासभा के 77वें सत्र की जनरल डिबेट को सम्बोधित करते हुए कहा कि यूक्रेन की सरकार ने पूर्वी हिस्से में अपने ही लोगों के विरुद्ध युद्ध छेड़ा हुआ था, और पश्चिमी देश बातचीत के लिये असमर्थ नज़र आ रहे थे. इन हालात में रूस के पास यूक्रेन में तथाकथित विशेष सैन्य अभियान को शुरू करने के अलावा कोई अन्य विकल्प नहीं था. 

रूस के विदेश मंत्री ने शनिवार, 24 सितम्बर को संयुक्त राष्ट्र महासभा के वार्षिक सत्र के उच्चस्तरीय खण्ड के दौरान अपना वक्तव्य प्रस्तुत किया. 

रूस का कहना है कि यूक्रेन के दोनेत्स्क और लुहांस्क क्षेत्रों में रहने वाले रूसी समुदायों की रक्षा और सुरक्षा ख़तरों से निपटने के इरादे से ये विशेष सैन्य अभियान शुरू किया गया.  

विदेश मंत्री लैवरोफ़ के अनुसार, कीयेव में मौजूदा शासन व्यवस्था द्वारा, वर्ष 2014 में रक्तरंजित तख़्तापलट के बाद से ही, योरोपीय संघ और अमेरिकी नेतृत्व वाले NATO सैन्य गठबन्धन के कारण क्षेत्र में रूस की सुरक्षा के लिये निरन्तर ख़तरे उत्पन्न हुए हैं. 

“मैं पूरी तरह मानता हूँ कि कोई भी सम्प्रभु, आत्म-सम्मान रखने वाला और अपने लोगों के प्रति ज़िम्मेदारी को समझने वाला देश, हमारी तरह ही क़दम उठाएगा.” 

रूसी विदेश मंत्री ने कहा कि डोनबास और रूस के नियंत्रण वाले अन्य इलाक़ों के रूसी महासंघ का हिस्सा बनने के मुद्दे पर, इस सप्ताहान्त जनमत संग्रह आयोजित किया जा रहा है, जिस पर पश्चिमी देशों ने क्रोध व हताशा व्यक्त की है.

उन्होंने कहा कि युद्ध के इर्द-गिर्द उत्पन्न हुआ संकट अब बढ़ रहा है और अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर परिस्थितियाँ बिगड़ रही हैं.

इसके बावजूद, एक ईमानदार संवाद और समझौते की तलाश करने के बजाय, पश्चिमी जगत अन्तरराष्ट्रीय संस्थाओं में भरोसे को कमज़ोर कर रहा है, और संयुक्त राष्ट्र के विरुद्ध भी नकारात्मक रवैयों को प्रोत्साहन दे रहा है. 

उन्होंने कहा कि अमेरिका पूरी दुनिया को अपने घर के पिछले हिस्से में आंगन में तब्दील कर देना चाहता है, और अपने साझीदारों के साथ मिलकर, असहमति के स्वरों को दण्डित कर रहा है. 

सर्गेई लैवरोफ़ ने दवाओं, वैक्सीन और खाद्य निर्यात पर लक्षित उन तथाकथित अवैध, एकतरफ़ा प्रतिबन्धों का उल्लेख किया, जोकि यूएन चार्टर का उल्लंघन करते हैं और निर्धन देशों में निर्धन नागरिकों के लिये पीड़ा की वजह बनते हैं.  

उकसाने की कोशिशें 

विदेश मंत्री लैवरोफ़ के अनुसार, अमेरिका विभाजित करने वाली लकीरों को थोप रहा है, और देशों को बता रहा है कि या तो आप हमारे साथ हैं, या फिर विरुद्ध हैं. 

इसका अर्थ यह है कि ईमानदार संवाद के बजाय, ग़लत व भ्रामक सूचना फैलाने और उकसाने की कोशिशें की जा रही हैं. 

रूसी विदेश मंत्री ने यूएन महासचिव की सराहना की, जिन्होंने यूक्रेन में युद्ध के कारण उपजे वैश्विक खाद्य व ऊर्जा संकट से निपटने के लिये संगठित प्रयास किये हैं. 

उन्होंने वैश्विक महामारी के दौरान पश्चिमी देशों पर आर्थिक कुप्रबन्धन के लिये दोषारोपण किया, और कहा कि उनके देश के विरुद्ध लगाए गए प्रतिबन्ध, रूस के विरुद्ध आर्थिक युद्ध छेड़े जाने के समान है.

उन्होंने काला सागर अनाज निर्यात पहल की प्रशंसा की, जिससे यूक्रेन व रूस से भोजन व उर्वरक की आपूर्ति सम्भव हुई है और खाद्य वस्तुओं की क़ीमतों में भी कमी लाने में मदद मिलेगी. 

मगर, विदेश मंत्री ने अमेरिका और योरोपीय संघ की यह कहते हुए आलोचना की है कि इस पहल का लाभ निर्धनतम देशों तक फ़िलहाल नहीं पहुँचा है. अमेरिका और योरोपीय संघ ने रूसी निर्यात के रास्ते से अवरोधों को पूरी तरह नहीं हटाया है और वे अब भी योरोपीय बन्दरगाहों में फँसे हुए हैं. 

‘रूसोफ़ोबिया’ का दावा

विदेश मंत्री लैवरोफ़ ने महासभा को बताया कि जिनसे आपत्ति है, उनके विरुद्ध पश्चिमी जगत ने ‘धर्मयुद्ध’ छेड़ा हुआ है. 

उनके मुताबिक़ NATO संगठन, क्षेत्र में और उससे परे भी अपने दबदबे के रास्ते में रूस को केवल एक ख़तरे के रूप में देखता है.

उन्होंने कहा कि रूस से भय व नापसन्दगी (Russophobia) अभूतपूर्व स्तर तक पहुँच गया है, और पश्चिमी देश ये छिपा भी नहीं रहे हैं कि वे रूस को सैन्य रूप से हराना, ध्वस्त व तोड़ना चाहते हैं.

उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के दूसरे महासचिव डैग हैमर्शहॉल्ड को उद्धत करते हुए कहा कि, संयुक्त राष्ट्र की स्थापना मानवता को स्वर्गलोक तक ले जाने के लिये नहीं हुई है, बल्कि उसे नर्क से बचाने के लिये हुई है.

विदेश मंत्री ने कहा कि भावी पीढ़ियों के लिये शान्तिपूर्ण व समरसतापूर्ण विकास की परिस्थितियाँ सृजित करने के लिये, हमारे वैयक्तिक व सामूहिक दायित्व को समझा जाना होगा, और इसके लिये राजनैतिक इच्छाशक्ति दर्शाए जाने की आवश्यकता है.

उन्होंने अपने सम्बोधन की समापन टिप्पणी में बहुपक्षवाद के लिये एक उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि विश्व व्यवस्था की स्थिरता सुनिश्चित की जा सकती है.

इसके लिये यूएन राजनय के स्रोत की ओर लौटना होगा, जोकि देशों की सम्प्रभु समानता के अहम सिद्धान्त पर आधारित है.