ILO: अक्षय ऊर्जा में रोज़गार बढ़कर 1.3 करोड़ पर पहुँचे

22 सितम्बर 2022

संयुक्त राष्ट्र के अन्तरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) और अन्तरराष्ट्रीय अक्षय ऊर्जा एजेंसी (IRENA) की एक ताज़ा रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया भर में अक्षय ऊर्जा क्षेत्र में रोज़गार पाने वालों की संख्या एक करोड़ 27 लाख तक पहुँच गई, जो उससे पिछले केवल एक वर्ष के दौरान सात लाख नए रोज़गार सृजित हुए. और ये सकारात्मक वृद्धि कोविड-19 महामारी के लगातार जारी प्रभावों और बढ़ते उर्जा संकटों के बावजूद हुई.

अक्षय ऊर्जा और रोज़गार: वार्षिक समीक्षा 2022 नामक इस रिपोर्ट में श्रम व अन्य लागतों के सन्दर्भ में, अक्षय ऊर्जा क्षेत्र में रोज़गार सृजन को देशों के भीतर एक प्रमुख कारक बताया गया है.

सौर चलन में त्वरित वृद्धि

सौर ऊर्जा को बहुत तेज़ गति से वृद्धि दर्ज करने वाला क्षेत्र बताया गया है. वर्ष 2021 में, इस क्षेत्र ने 43 लाख रोज़गार सृजित किये.

विभिन्न देश, जलवायु परिवर्तन, कोविड-19 से पुनर्बहाली और आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान से उत्पन्न चिन्ताओं के मद्देनज़र, अपने यहाँ रोज़गार सृजन को बढ़ावा देने के लिये घरेलू स्तर पर ही प्रयास कर रहे हैं, जिनमें स्थानीय आपूर्ति श्रृंखलाओं पर भी ख़ास ध्यान है.

रिपोर्ट में, स्वच्छ ऊर्जा औद्योगीकरण की दिशा में आगे बढ़ने के लिये, मज़बूत घरेलू बाज़ार किस तरह से बहुत अहम है. इसके अनुसार, अक्षय ऊर्जा की निर्यात क्षमताएँ विकसित करना भी, इसी पर निर्भर है.

सभी के लिये न्यायसंगत बदलाव

अन्तरराष्ट्रीय श्रम संगठन – ILO के महानिदेशक गाय राइडर का कहना है कि आँकड़ों से परे हटकर बात करें तो अक्षय ऊर्जाओं के क्षेत्र में, बेहतर हालात व उत्पादकता वाला रोज़गार सुनिश्चित करने के लिये, रोज़गार व कामकाज की गुणवत्ता व  परिस्थितियों पर भी ध्यान बढ़ रहा है.

उनका कहना है, महिला रोज़गार के बढ़ते हिस्से से संकेत मिलता है कि समर्पित नीतियाँ और प्रशिक्षण, अक्षय ऊर्जा रोज़गारों और कामकाज में, महिलाओं की भागेदारी और समावेश महत्वपूर्ण स्तर पर बढ़ा सकते हैं, और अन्ततः सभी के लिये एक न्यायसंगत बदलाव हासिल हो सकता है.

गाय राइडर ने देशों की सरकारों, श्रम संगठनों और कारोबारी समूहों को, सतत ऊर्जा की तरफ़ बढ़त के बदलाव के लिये, दृढ़ संकल्पित रूप में समर्पित रहने के लिये प्रोत्साहित किया है, जोकि कामकाज व श्रम के भविष्य के लिये बहुत अनिवार्य है.

बिजली चालित वाहनों के ज़्यादा से ज़्यादा संख्या में सड़कों पर चलने से, प्रदूषण कम होगा और ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन में भी कमी आएगी.
IMF/Crispin Rodwell
बिजली चालित वाहनों के ज़्यादा से ज़्यादा संख्या में सड़कों पर चलने से, प्रदूषण कम होगा और ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन में भी कमी आएगी.

सहनसक्षम और भरोसेमन्द

अन्तरराष्ट्रीय अक्षय ऊर्जा एजेंसी (IRENA) के महानिदेशक फ्रांसेस्को ला कैमेरा का कहना है कि तमाम चुनौतियाँ दरपेश होने के बावजूद, सतत ऊर्जा रोज़गार सहनशील बने हुए हैं और ये क्षेत्र रोज़गार सृजन के लिये एक एक विश्वनीय इंजिन बना हुआ है.

दुनिया भर के देशों की सरकारों के मेरी सलाह होगी कि वो ऐसी औद्योगिक नीतियाँ बनाएँ और लागू करें जिनसे उनके यहाँ सतत ऊर्जा क्षेत्र में सम्मानजनक कामकाज के विस्तार को प्रोत्साहन मिले.

सतत ऊर्जा क्रान्ति

रिपोर्ट में दिखाया गया है कि सतत ऊर्जा क्षेत्र में रोज़गार सृजन करने वाले देशों की संख्या बढ़ रही है और उनमें से लगभग दो-तिहाई देश, एशिया में हैं.

रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया भर के रोज़गारों की 42 प्रतिशत संख्या का श्रेय चीन को जाता है, उसके बाद योरोप और ब्राज़ील का स्थान है जिनका हिस्सा 10-10 प्रतिशत है. उनके बाद संयुक्त राज्य अमेरिका और भारत का 7-7 प्रतिशत हिस्सा है.

 

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