विश्व चुनौतियों का सामना करने में, महिला नेतृत्व की महत्ता को रेखांकित करने वाला नया मंच

20 सितम्बर 2022

संयुक्त राष्ट्र महासभा के 77वें सत्र की जनरल डिबेट के मौक़े पर देशों की महिला राष्ट्राध्यक्षों और सरकार अध्यक्षों ने न्यूयॉर्क में ही मंगलवार को ये रेखांकित करने के लिये एक प्रमुख बैठक की है कि वैश्विक प्राथमिकताओं पर काम करने के लिये, महिलाओं की पूर्ण व प्रभावशाली भागीदारी और निर्णय निर्माण क्षमता, किस तरह अति महत्वपूर्ण हैं.

इस नवगठित सम्मेलन को नाम दिया गया है – महिला नेतृत्वकर्ताओं का यूएनजीए मंच, जिसकी मंगलवार को हुई बैठक में वैश्विक मुद्दों पर विचार विमर्श हुआ.

इस बैठक में हंगरी की राष्ट्रपति कैटलिन नोवाक, बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख़ हसीना, आइसलैण्ड की प्रधानमंत्री कैटरिन जैकब्सडोत्तिर, समोआ की प्रधानमंत्री फ़ियाम नाओमी मटाआफ़ा, उगाण्डा की प्रधानमंत्री रोबीनाह रब्बान्जा, अरूबा की प्रधानमंत्री एलविन वेवर क्रएस, और सेण्ट माआर्टेन की प्रधानमंत्री सिलवेरिया ई. जैकब्स के साथ-साथ, न्यूज़ीलैण्ड की प्रधानमंत्री हैलेन क्लार्क ने शिरकत की.

सकारात्मक योगदान

हाल के कोविड-19 महामारी, जलवायु आपदा, और लड़ाई-झगड़ों जैसे वैश्विक संकटों ने दिखाया है कि महिला नेतृत्व और निर्णय-निर्माण किस तरह, कार्यकारी भूमिकाओं, संसदों, और लोक प्रशासन में सकारात्मक बदलाव ला सकता है.

उदाहरण के लिये, संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) और यूएन महिला संस्था – UN Women के आँकड़े दिखाते हैं कि जिन संसदों में महिलाओं का प्रतिनिधित्व ज़्यादा था, वहाँ की सरकारों ने, महामारी का सामना करने के उपायों में, ज़्यादा लिंग संवेदनशील नीतियाँ अपनाईं. उनमें सीधे तौर पर महिलाओं की आर्थिक सुरक्षा मज़बूत करने के लिये लक्षित नीतियाँ भी शामिल थीं.

मंगलवार की इस बैठक का आयोजन, यूएन महासभा अध्यक्ष के कार्यालय और यूएन वीमैन ने किया था, जिसमें महिला विश्व नेतृत्व कर्ताओं की परिषद (CWWL) ने भी सहयोग दिया.

रूपान्तरकारी नेतृत्व

यूएन महासभा अध्यक्ष कोसाबा कोरोसी ने इस बैठक को सम्बोधित करते हुए, सरकार में और ज़्यादा महिलाओं की मौजदूगी के लिये दलीलें पेश कीं.

उन्होंने कहा, महिलाओं का नेतृत्व रूपान्तरकारी है. आज हमारे साथ मौजूद महिलाएँ, इस इस तथ्य की जीती-जागती सबूत हैं.

समावेशी सरकार के नतीजे ऐसी नीतियों के रूप में सामने आ सकते हैं जिनसे दीर्घकाल के लिये सकारात्मक बदलाव हों. विविध महिलाओं के विचार शामिल करके, विशेष रूप से, उच्चतम स्तर पर – सरकारें बेहद ज़रूरतमन्दों के लिये प्रभावकारी और लक्षित समाधान तलाश कर सकते हैं.

यूएन उपमहासचिव आमिना मोहम्मद (बाएँ) ने इथियोपिया की राष्ट्रपति साहले-वर्क ज़्येदे के साथ सूखा प्रभावित सोमाली क्षेत्र का दौरा किया.
UNECA/Daniel Getachaw
यूएन उपमहासचिव आमिना मोहम्मद (बाएँ) ने इथियोपिया की राष्ट्रपति साहले-वर्क ज़्येदे के साथ सूखा प्रभावित सोमाली क्षेत्र का दौरा किया.

अभी मंज़िल दूर है

इस समय संयुक्त राष्ट्र के 193 सदस्य देश हैं, मगर केवल 28 महिलाएँ ही निर्वाचित राष्ट्राध्यक्षा या सरकार अध्यक्षा के रूप में काम करते हैं.

राजनैतिक कार्यालय के अन्य स्तरों पर भी महिलाओं का अनुपात सन्तुलित होने के लिये, अभी लम्बा रास्ता नज़र आता है.

वैश्विक स्तर पर, जितने भी देशों की सरकारों में मंत्री हैं, उनमें महिलाओं की संख्या केवल 21 प्रतिशत है, राष्ट्रीय सांसदों में 26 प्रतिशत, और निर्वाचित स्थानीय सरकारों की सीटों में महिलाओं की संख्या 34 प्रतिशत है.

संयुक्त राष्ट्र की एक नई रिपोर्ट में कहा गया है कि मौजूदा रफ़्तार या प्रगति रही तो इसके साथ, महिला व पुरुषों के बीच समान प्रतिनिधित्व का लक्ष्य, 2062 से पहले हासिल नहीं किया जा सकता.

संयुक्त राष्ट्र की महिला संस्था - यूएन वीमैन कार्यकारी निदेशिका सीमा बहौस, नवगठित नेतृत्व मंच की बहुत अहम भूमिका देखती हैं.

उनका कहना है, जब राजनैतिक व सार्वजनिक जीवन में ज़्यादा महिलाएँ नेतृत्व करती हैं, तो सभी का भला होता है, विशेष रूप से संकटों के समय में.

लड़कियों की एक नई पीढ़ी, ख़ुद के लिये एक बेहतर भविष्य देखती है. स्वास्थ्य, शिक्षा, बाल देखभाल, और महिलाओं के विरुद्ध हिंसा, को बेहतर ध्यान और बेहतर समाधान मिलें. हमें महिला नेत्रियों के गुणों व योगदान को सामने लाने के लिये हर सम्भव रास्ते तलाश करने होंगे. ये मंच, उसी के लिये एक अहम अवसर है.

दुनिया भर में लैंगिक समानता हासिल करने के लिये महिला नेतृत्व एक प्रमुख प्रोत्साहक कारक है.
UN Women
दुनिया भर में लैंगिक समानता हासिल करने के लिये महिला नेतृत्व एक प्रमुख प्रोत्साहक कारक है.

कार्रवाई अभी करनी होगी

महिला नेत्रियों के यूएनजीए वैश्विक मंच की जड़ें, सितम्बर 2021 से उपजी हैं, जब तत्कालीन यूएन महासभा अध्यक्ष अब्दुल्ला शाहिद और देशों की महिला राष्ट्राध्यक्षों और सरकार अध्यक्षों के दरम्यान बैठक हुई थी.

अब्दुल्ला शाहिद ने मंगलवार की बैठक की महत्ता, आँकड़ों के साथ रेखांकित की.

उन्होंने कहा, हमारी मौजूदा प्रगति को देखा जाए तो लैंगिक समानता हासिल करने में 300 वर्ष का समय लग सकता है. हमें बिल्कुल अभी कार्रवाई करनी होगी. लड़कियों व महिलाओं में संसाधन निवेश की गति बढ़ानी होगी. महिलाओं को सशक्त बनाने के प्रयासों का स्तर बढ़ाना होगा. लड़कियों के लिये अवसर बढ़ाने होंगे. लिंग आधारित हिंसा का ख़ात्मा करना होगा.

 

♦ समाचार अपडेट रोज़ाना सीधे अपने इनबॉक्स में पाने के लिये यहाँ किसी विषय को सब्सक्राइब करें
♦ अपनी मोबाइल डिवाइस में यूएन समाचार का ऐप डाउनलोड करें – आईफ़ोन iOS या एण्ड्रॉयड