श्रीलंका: बढ़ती क़ीमतों के कारण लाखों लोगों को दो वक़्त का भोजन मयस्सर नहीं

6 अगस्त 2022

श्रीलंका में राजनैतिक व आर्थिक संकट के कारण, लाखों लोगों को पर्याप्त भोजन उपलब्ध नहीं हो पा रहा है और खाद्य असुरक्षा बदतर होती जा रही है. संयुक्त राष्ट्र की खाद्य सहायता एजेंसी - WFP ने देश में बिगड़ती खाद्य स्थिति के मद्देनज़र, आने वाले महीनों में, जीवन रक्षक सहायता प्रदान करने के लिये, अन्तरराष्ट्रीय समुदाय से 6 करोड़ 30 लाख डॉलर धनराशि जुटाने का आहवान किया है.

विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) के प्रतिनिधि और देश निदेशक अब्दुर रहीम सिद्दीक़ी का कहना है कि स्वतंत्रता के बाद से श्रीलंका के सबसे ख़राब आर्थिक संकट से "गम्भीर खाद्य संकट" पैदा हो गया है.

उन्होंने क़ीमतों में बढ़ोत्तरी, घटती पैदावार, यूक्रेन में युद्ध का असर और बुनियादी वस्तुओं की आपूर्ति के भुगतान के लिये देश के पास धन की कमी को, समस्याओं का ज़हरीला मिश्रण क़रार दिया.

उन्होंने खाद्य सहायता एजेंसी और अन्य मानवीय संस्थाओं की मदद के लिये अधिक धनराशि जुटाने की अपील करते हुए बताया, "अर्थव्यवस्था ध्वस्त हो गई है और देश में ईंधन, भोजन और उर्वरक जैसी आवश्यक वस्तुओं के आयात के लिये आवश्यक धन समाप्त हो चुका है." 

श्रीलंका में आर्थिक संकट के कारण बड़ी संख्या में आम नागरिकों को खाद्य असुरक्षा का सामना करना पड़ रहा है.
© WFP/Josh Estey
श्रीलंका में आर्थिक संकट के कारण बड़ी संख्या में आम नागरिकों को खाद्य असुरक्षा का सामना करना पड़ रहा है.

डब्ल्यूएफ़पी और संयुक्त राष्ट्र के खाद्य व कृषि संगठन (एफ़एओ) के हाल ही में किये गए एक आकलन से पता चलता है कि 63 लाख लोग – यानि लगभग 30 प्रतिशत आबादी - खाद्य-असुरक्षा का शिकार हैं. कुछ समय पहले ही WFP ने एक अभूतपूर्व वैश्विक खाद्य संकट के बारे में आगाह किया था.

श्रीलंका रिकॉर्ड 90 प्रतिशत खाद्य मुद्रास्फ़ीति से जूझ रहा है, जिससे चावल जैसे रोज़मर्रा के खाद्य पदार्थ भी लाखों परिवारों को मुहैया नहीं हो पा रहे हैं. (असल में, पौष्टिक आहार की औसत मासिक लागत 2018 के मुक़ाबले 156 प्रतिशत बढ़ गई है).

अब्दुर रहीम सिद्दीकी ने प्रत्यक्ष रूप से देखा है कि एक साल में ही इस देश की क़िस्मत किस तरह पलट गई है. वो बताते हैं, ''ज़मीन पर हम जो स्थिति देख रहे हैं, वह चिन्ताजनक है. हम जानते हैं कि श्रीलंका के लाखों लोग पर्याप्त और पौष्टिक भोजन के लिये संघर्ष कर रहे हैं."

वह कहते हैं कि तत्काल हस्तक्षेप के बिना, इस देश का भविष्य बेहद निराशाजनक दिख रहा है, जो अपनी 2 करोड़ 20 लाख की आबादी को भोजन मुहैया कराने में पूरी तरह सक्षम होना चाहिये.

फ़सलों की विफलता व यूक्रेन युद्ध का असर

श्रीलंका: 46 वर्षीय एक महिला प्रियंकरी तक्षिला, एक छोटे से किचन में, अपनी बेटियों के लिये भोजन तैयार करते हुए.
© WFP/Josh Estey
श्रीलंका: 46 वर्षीय एक महिला प्रियंकरी तक्षिला, एक छोटे से किचन में, अपनी बेटियों के लिये भोजन तैयार करते हुए.

अब्दुर रहीम सिद्दीक़ी कहते हैं, "लोग भोजन में कटौती कर रहे हैं - चार में से एक व्यक्ति, एक समय का भोजन नहीं कर पा रहा है. या तो लोगों की क़ीमती बचत ख़त्म हो रही हैं या जीवित रहने के लिये उन्हें क़र्ज़ लेना पड़ रहा है."

कई अन्य कारक हैं जो श्रीलंका के खाद्य संकट को आकार दे रहे हैं. खेती को और अधिक पर्यावरणीय रूप से टिकाऊ बनाने के लिये, सरकार ने साल 2021 में आयातित रासायनिक उर्वरकों पर प्रतिबन्ध लगा दिया था. लेकिन इस क़दम से कृषि उत्पादन में तेज़ी से कमी आई - और हालाँकि अब आयात नियमों में ढील दी गई है, लेकिन उसका असर बरक़रार है.

अब्दुर रहीम सिद्दीक़ी कहते हैं, ''यह देश क़रीब 3 लाख टन मक्का का उत्पादन करता था. अब उत्पादन न के बराबर है, क्योंकि (किसान) बीजों की जिन क़िस्मों का उपयोग कर रहे हैं, वे उच्च उपज देने वाली वो क़िस्में हैं, जिनके लिये जैविक उर्वरक कारगर नहीं होते."

उन्होंने कहा कि लगातार दो फ़सलों की विफलताओं के बाद, अगर तीसरी फ़सल भी नाकाम हो गई, तो यह "विनाशकारी" सिद्ध होगा.

श्रीलंका, यूक्रेन में चल रहे युद्ध के झटके भी महसूस कर रहा है. प्रमुख अनाज निर्यात को बाधित करने और वैश्विक खाद्य और ईंधन की क़ीमतों को बढ़ाने के अलावा, यूक्रेन संघर्ष ने श्रीलंका के दो शीर्ष पर्यटन बाज़ारों - रूस और यूक्रेन को पस्त कर दिया है, जिससे नक़द मुद्रा में कमी हो गई है और परिणामस्वरूप श्रीलंका की आयात क्षमता ख़त्म होने से दूरगामीनी असर पड़े हैं.

श्रीलंका: 39 39 वर्षीय मुनीवरा हमीद, स्कूलों में मुहैया कराए जाने वाला भोजन पकाती थीं, मगर देश में मौजूदा आर्थिक संकट के कारण, उनका जीवन बिल्कुल बदहाल हो गया है.
© WFP/Josh Estey
श्रीलंका: 39 39 वर्षीय मुनीवरा हमीद, स्कूलों में मुहैया कराए जाने वाला भोजन पकाती थीं, मगर देश में मौजूदा आर्थिक संकट के कारण, उनका जीवन बिल्कुल बदहाल हो गया है.

अब्दुर रहीम सिद्दीक़ी कहते हैं, "लगभग 2 लाख मछुआरों की आजीविका छिन गई है, क्योंकि इस देश में आयात प्रतिबन्धों के कारण ईंधन नहीं है.” 

वे कहते हैं, “हमें छोटे किसानों को तुरन्त सहायता प्रदान करने की आवश्यकता है. डब्ल्यूएफ़पी जैसे अन्तरराष्ट्रीय संगठन अपना ये कर्तव्य समझते हैं कि वे आबादी के सबसे कमज़ोर वर्ग को आपातकालीन खाद्य सहायता प्रदान करें."

विभिन्न रूपों में सहायता

WFP ने जून के मध्य में अपना आपातकालीन प्रतिक्रिया अभियान शुरू किया था, जिसके तहत राजधानी में कुछ वंचित वर्गों की गर्भवती महिलाओं को भोजन के वाउचर वितरित किये गए थे.

अब्दुर रहीम सिद्दीक़ी कहते हैं, "हमारी आपातकालीन प्रतिक्रिया के ज़रिये, हम 34 लाख लोगों तक खाद्य और पोषण सहायता पहुँचाने का लक्ष्य रखते हैं. यह मदद, न केवल भोजन के रूप में, बल्कि नक़दी और वाउचर के रूप में भी होगी, जिससे लोग अपनी ज़रूरतों के आधार पर भोजन व अन्य ज़रूरी वस्तुएँ ख़रीद सकेंगे.”

WFP की आपातकालीन प्रतिक्रिया, एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम को दोबारा शुरू करने में भी मदद करेगी: गर्भवती और स्तनपान कराने वाली माताओं और कुपोषित छोटे बच्चों को भोजन प्रदान करना – जिससे उस महत्वपूर्ण अन्तराल पाटने में मदद मिलेगी, जो श्रीलंका सरकार के पास धन की कमी के कारण महत्वपूर्ण सहायता कार्यक्रमों को रोकने से पैदा हो गया है.

श्रीलंका में ये 49 वर्षीय महिला अपने पति और बच्ची के साथ, एक कमरे के आवास में रहती हैं, जहाँ वो भोजन पकाते हैं, खाते हैं, पूजा-अर्चना करते हैं, अध्ययन करते हैं और सोते भी वहीं हैं. ये आवास एक खुले गन्दे नाले से कुछ इंच की दूरी पर है.
© WFP/Josh Estey
श्रीलंका में ये 49 वर्षीय महिला अपने पति और बच्ची के साथ, एक कमरे के आवास में रहती हैं, जहाँ वो भोजन पकाते हैं, खाते हैं, पूजा-अर्चना करते हैं, अध्ययन करते हैं और सोते भी वहीं हैं. ये आवास एक खुले गन्दे नाले से कुछ इंच की दूरी पर है.

इसी तरह, राष्ट्रीय स्कूली भोजन कार्यक्रम के लिये, डब्ल्यूएफ़पी का समर्थन यह सुनिश्चित करेगा कि प्राथमिक कक्षा के बच्चों को दैनिक भोजन मिलता रहे, जिससे उनकी शिक्षा और विकास न रुके.

लेकिन यह और अन्य आवश्यक कार्यक्रम सस्ते नहीं हैं. आने वाले महीनों में श्रीलंका में 34 लाख लोगों को जीवन रक्षक सहायता प्रदान करने के लिये, WFP को 6 करोड़ 30 लाख डॉलर की आवश्यकता होगी.

अब्दुर रहीम सिद्दीक़ी कहते हैं, "योजना अनुसार अपना संचालन सुनिश्चित करने के लिये हमें तत्काल अधिक धन की आवश्यकता है. हम दानदाताओं से न केवल डब्ल्यूएफ़पी के कार्यक्रमों, बल्कि अन्य मानवीय कार्यक्रमों का भी समर्थन करने का आग्रह कर रहे हैं, जिससे सबसे अधिक जोखिम वाले लोगों को आवश्यक राहत सामग्री उपलब्ध करवाई जा सकेगी."

 

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