बांग्लादेश: बाढ़ प्रभावित लाखों बच्चों को भोजन, स्वच्छ पानी और सुरक्षा

2 अगस्त 2022

जब घर में बाढ़ का पानी घुस आया तो दस वर्षीय बरशा और उसके परिवार को, जल्दबाज़ी में सब कुछ छोड़कर एक शरणस्थल में आसरा लेना पड़ा. बांग्लादेश के बाढ़ से सबसे अधिक प्रभावित ज़िलों में से एक, सिलहट के गोवेनघाट में एक तंग आश्रय ने बढ़ती बाढ़ के पानी से बचाया, लेकिन, बरशा को पास में कोई नलकूप या ट्यूब-वैल न होने की वजह से, कई दिनों तक साफ़ पानी नसीब नहीं हुआ.

यूनीसेफ़ से जल शोधन की गोलियाँ प्राप्त करने के बाद बरशा ने बताया, “बाढ़ का पानी घर के भीतर आने के कारण, राहत स्थल में आने के बाद से मुझे और मेरे परिवार को पीने का पानी मिलना बहुत मुश्किल हो गया. अब आख़िरकार हम पानी पी सकते हैं. इतने दिनों में पहली बार मैंने इतना साफ़ पानी पिया है.”

साफ़ पानी और स्वच्छता का संकट

बरशा उन 35 लाख बच्चों में से है, जिनका जीवन बांग्लादेश के पूर्वोत्तर में बाढ़ से प्रभावित हुआ है. प्रभावित ज़िलों में बाढ़ के पानी ने लगभग 45 हज़ार जल बिन्दुओं और 50 हज़ार स्वच्छता सुविधाओं को गम्भीर रूप से क्षतिग्रस्त कर दिया है, जिससे आश्रयों में रहने वाले परिवारों को साफ़ पानी या शौचालय तक पहुँच हासिल नहीं हो सकी है.

भोजन की कमी, डूबने का बढ़ता जोखिम, परिवारों से अलगाव और हिंसा के अलावा, बच्चों में जल से फैलने वाली बीमारियों का ख़तरा बढ़ रहा है.

 10 साल की बरशा अपने परिवार को सिलहट के गोवेनघाट में मिली जल शोधन की गोलियाँ पकड़े हुए. यूनिसेफ ने अपनी आपातकालीन बाढ़ प्रतिक्रिया का समर्थन करने के लिये सरकार को एक मिलियन से अधिक जल शोधन टैबलेट वितरित किये हैं.
UNICEF/UN0659824/Mukut
10 साल की बरशा अपने परिवार को सिलहट के गोवेनघाट में मिली जल शोधन की गोलियाँ पकड़े हुए. यूनिसेफ ने अपनी आपातकालीन बाढ़ प्रतिक्रिया का समर्थन करने के लिये सरकार को एक मिलियन से अधिक जल शोधन टैबलेट वितरित किये हैं.

बच्चों की माताएँ चिन्तित हैं, क्योंकि स्वच्छ पानी के अभाव में अधिक बच्चे बीमार हो रहे हैं. एक माँ बताती हैं: “हमारे पास कई दिनों से साफ़ पानी नहीं है, मेरे बच्चे, आश्रय में, गन्दा पानी पीने से बीमार हो गए हैं.”

बरशा की तरह, 12 वर्षीय पन्ना को भी, अपना घर छोड़कर, सिलहट के जयन्तपुर में एक भीड़भरे आश्रय में शरण लेनी पड़ी. 

 

12 साल की पन्ना, जब भी शौचालय का उपयोग करने की जरूरत होती है, जयंतपुर में अपने बाढ़ वाले घर लौटती है.
यूनिसेफ
12 साल की पन्ना, जब भी शौचालय का उपयोग करने की जरूरत होती है, जयंतपुर में अपने बाढ़ वाले घर लौटती है.

 

पन्ना का कहना है कि आश्रय में इतने सारे परिवार एक साथ रह रहे हैं कि वह शौचालय इस्तेमाल करना मुश्किल है. शौचालय गन्दा है, और इतने सारे लोगों के बीच वो सहज महसूस नहीं करतीं.

ऐसे में, केवल शौचालय का उपयोग करने के लिये, वह आश्रय से मीलों दूर पानी में डूबे अपने घर तक जाती हैं. पन्ना के लिये हर दिन, दूषित बाढ़ के पानी से गुज़रने का मतलब होता है  - बीमारियों, डूबने और अपने परिवार से अलग होने का ख़तरा.

बहाली का लम्बा रास्ता

यह बाढ़ ऐसे समय आई जब इलाक़े के लोग पिछले महीने आई बाढ़ से उबर ही रहे थे. पानी से घर बह गए, खेतों से मिट्टी उखड़ गई और बिजली आपूर्ति बाधित हो गई.

अचानक सूचना मिलने पर, सभी परिवारों को तुरन्त अपनी सम्पत्ति पीछे छोड़कर, ऊँचे स्थानों पर जाने के लिये मजबूर होना पड़ा.

सेना के सहयोग से, 4 लाख से अधिक लोगों को सुरक्षा केन्द्रों में पहुँचाया गया. हज़ारों स्कूल क्षतिग्रस्त हो गए और अब बन्द हैं - महामारी के दौरान स्कूल बन्द होने के कारण लाखों बच्चों की शिक्षा भी बाधित हो गई है.

बाढ़ की शुरुआत से ही, यूनीसेफ़ ने प्रभावित परिवारों के बीच, दस लाख से अधिक जल शोधन गोलियाँ, हज़ारों पानी के कन्टेनर, गरिमा और स्वच्छता किट, और चिकित्सीय दूध का वितरण किया है.

यूनीसेफ़ बच्चों को दुर्व्यवहार, हिंसा, डूबने और अलग होने के जोखिम से बचाने के लिये, सरकार के साथ मिलकर, समुदायों के बीच जागरूकता सन्देश प्रसारित करने में लगा है.

लेकिन आने वाले कुछ समय के लिये प्रभावित परिवारों पर बाढ़ का असर अधिक पड़ेगा और साफ़ पानी और स्वच्छता की ज़रूरत अभी बनी रहने की उम्मीद है.

कुछ प्रभावित क्षेत्रों में पानी कम होना शुरू हो गया है, लेकिन जलजनित बीमारियों से प्रभावित लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है. पानी से ध्वस्त होने के बावजूद, स्वास्थ्य सुविधाएँ, गम्भीर बीमारियों का प्रकोप रोकने के लिये संघर्ष कर रही हैं.

क्षतिग्रस्त पानी की आपूर्ति, शौचालय, घरों, स्कूलों और अस्पतालों को पुनर्निर्माण एवं मरम्मत की सख़्त ज़रूरत है. वहीं, बाढ़ में अपना सब कुछ खो चुके परिवारों को भोजन, साफ़ पानी, शौचालय और आश्रय मुहैया करना भी बेहद आवश्यक है.

बच्चे अभी भी हिंसा, डूबने के ख़तरे व बीमारी के जोखिम के कारण सबसे सम्वेदनशील स्थिति में हैं, और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिये. जिन हालात का सामना आज बरशा और पन्ना जैसे बच्चे रहे हैं, वैसी स्थिति किसी भी बच्चे के सामने नहीं आनी चाहिये.

सरकार की आपातकालीन प्रतिक्रिया और प्रभावित आबादी की मदद के लिये यूनीसेफ़ ने, 4 करोड़ 57 लाख अमेरिकी डॉलर की रक़म की तात्कालिक मदद का आहवान किया है.

ये लेख पहले यहाँ प्रकाशित हो चुका है.

 

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