शान्तिपूर्ण व समृद्ध विश्व के लिये, मज़बूत बहुपक्षवाद ‘एकमात्र रास्ता’

8 जुलाई 2022

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने इण्डोनेशिया के बाली शहर में जी20 विदेश मंत्रियों की बैठक को सम्बोधित करते हुए कहा है कि शान्तिपूर्ण, स्थिर व समृद्ध विश्व के निर्माण के लिये, देशों के बीच रचनात्मक सहयोग को मज़बूती प्रदान करना ही एकमात्र रास्ता है. 

यूएन प्रमुख ने सचेत किया कि यह बैठक बहुपक्षवाद और वैश्विक शासन व्यवस्था के लिये एक कठिन क्षण में हो रही है, और अन्तरराष्ट्रीय व्यवस्था के दरकने का जोखिम बढ़ रहा है.

उन्होंने मौजूदा वैश्विक चुनौतियों के रूप में जलवायु आपात स्थिति, कोविड-19 महामारी, यूक्रेन में युद्ध और हिंसक संघर्षों व टकरावों के नए रूपों का उल्लेख किया. 

एंतोनियो गुटेरेश ने बहुपक्षवाद को मज़बूती प्रदान करने की थीम पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान अपने वीडियो सन्देश में कहा, यह कोई चयन नहीं है, यह एक आवश्यकता है.

“व्यापक स्तर पर व्याप्त खाद्य क़िल्लत, गहराती जलवायु उथलपुलथल, और निर्धनता व निराश्रयता से बचने का एकमात्र रास्ता यही है, जोकि किसी देश को अछूता नहीं छोड़ेगी.” 

जलवायु संकट, शीर्ष प्राथमिकता

संयुक्त राष्ट्र के शीर्षतम अधिकारी ने तात्कालिक बहुपक्षवाद आधारित कार्रवाई के लिये तीन क्षेत्रों को चिन्हित किया है: बढ़ती जलवायु आपात स्थिति; ऊर्जा व वित्त पोषण संकट; और महामारी से असमान पुनर्बहाली.

महासचिव गुटेरेश ने जलवायु संकट को सबसे बड़ी आपात स्थिति क़रार देते हुए कहा कि जी20 समूह, 80 फ़ीसदी वैश्विक उत्सर्जनों के लिये ज़िम्मेदार है.

इसके मद्देनज़र, जलवायु संकट के सबसे ख़राब दुष्प्रभावों की रोकथाम करने की ज़िम्मेदारी भी उन्हीं की है.

‘नवीकरणीय ऊर्जा क्रांति’

यूएन प्रमुख के अनुसार, वर्ष 2010 की तुलना में, वैश्विक उत्सर्जनों में 45 फ़ीसदी की गिरावट लानी होगी, ताकि वैश्विक तापमान में वृद्धि को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित रखा जा सके.

यूएन महाचसिव ने कार्बन उत्सर्जन में कटौती के लिये, नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में क्रांति की पुकार लगाई है, और साथ ही जीवाश्म ईंधन के इस्तेमाल का अन्त करने का आग्रह किया है.

उन्होंने कहा कि, “सम्पन्न देशों को इस वर्ष से, विकासशील देशों को जलवायु वित्त पोषण के लिये 100 अरब डॉलर मुहैया कराने के अपने वादे पर खरा उतरना होगा. साथ ही, हमें अनुकूलन और समय पूर्व चेतावनी प्रणालियों में भी स्फूर्ति भरने की आवश्यकता है.”

खाद्य व ऊर्जा बाज़ारों में स्थिरता

यूक्रेन में युद्ध के कारण अन्य संकटों को हवा मिल रही है, जिसके परिणामस्वरूप खाद्य वस्तुओं व उर्वरकों की क़ीमतों में वृद्धि हुई है. 

यूएन महासचिव ने इस वर्ष अकाल की अनेक घटनाओं का जोखिम वास्तविक बताया है और वर्ष 2023 के लिये हालात और भी ख़राब होने की आशंका है.

इस बीच, ऊर्जा की ऊँची क़ीमतें से ईंधन की क़िल्लत गहरा रही है और अनेक देशों में बिजली आपूर्ति पर असर पड़ रहा है. 

उन्होंने वैश्विक खाद्य व ऊर्जा बाज़ारों में स्थिरता लाने और विकासशील देशों को समर्थन मुहैया कराने की आवश्यकता पर बल दिया है. 

इस क्रम में, यूक्रेन में होने वाले खाद्य उत्पादन और रूस में खाद्य व उर्वरक उत्पादन को, युद्ध के बावजूद विश्व बाज़ारों में फिर से वापिस लाना अहम होगा. 

संयकुत राष्ट्र, काला सागर के रास्ते, यूक्रेन में उत्पादित भोजन के सुरक्षित ढँग से निर्यात, और रूस में उपजे भोजन व उर्वरक की वैश्विक बाज़ारों में निर्बाध आपूर्ति के लिये एक योजना पर काम कर रहा है. 

नया वैश्विक समझौता

वैश्विक महामारी के कारण अनेक विकासशील देशों में विनाशकारी आर्थिक हानि हुई है और अब पुनर्बहाली के लिये उन्हें वित्तीय संसाधन उपलब्ध नहीं हैं. 

यूएन प्रमुख ने शक्ति व वित्तीय संसाधनों के फिर से सन्तुलन के इरादे से एक वैश्विक समझौते की आवश्यकता को रेखांकित किया है, ताकि ये देश टिकाऊ विकास में निवेश कर पाने में सक्षम हों. 

अफ़ग़ानिस्तान में एक स्वास्थ्य सुविधा केंद्र पर सोलर पैनल.
UNDP Afghanistan
अफ़ग़ानिस्तान में एक स्वास्थ्य सुविधा केंद्र पर सोलर पैनल.

इसे ध्यान में रखते हुए, अन्तरराष्ट्रीय कर्ज़ प्रदान करने के तंत्र में तत्काल सुधार की पुकार लगाई है, जिसमें निर्णय लेते समय देशों में सम्वेदनशील हालात पर भी विचार करना होगा. 

साथ ही, कोविड-19 वैक्सीन, परीक्षण व उपचार उपायों का उत्पादन करने वाले देशों की संख्या बढ़ाया जाना भी ज़रूरी होगा, जिसके लिये लाइसेन्स को साझा करना और तकनीकी व वित्तीय समर्थन मुहैया कराया जाना अहम है.

एकजुटता पर बल

यूएन प्रमुख ने दुनिया में एक ऐसी बहुपक्षवादी व्यवस्था पर बल दिया है, जोकि अधिक कारगर, अधिक नैटवर्क वाली, और अधिक समावेशी हो. 

उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि मौजूदा संस्थाओं के मज़बूत पहलुओं को आपस में जोड़ते हुए, मानवता के समक्ष पेश सबसे गम्भीर चुनौतियों से निपटा जाना होगा. 

संयुक्त राष्ट्र महासचिव की ‘हमारा साझा एजेण्डा’ रिपोर्ट में अनेक अनुशंसाएं प्रस्तुत की गई हैं, जिन्हें साकार करने के लिये यूएन, देशों के साथ समन्वित प्रयास कर रहा है.

इसके तहत, एक अधिक टिकाऊ, समावेशी और सहनसक्षम वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिये हर दो साल में एक शिखर बैठक आयोजित करने का सुझाव भी है. 

इस बैठक के ज़रिये, जी20, यूएन आर्थिक एवं सामाजिक परिषद, अन्तरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों और यूएन महासचिव को एक साथ एक मंच पर लाया जाएगा. 

 

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