श्रीलंका: आसमान छूती क़ीमतों के बीच, लाखों लोग खाद्य असुरक्षा का शिकार

6 जुलाई 2022

श्रीलंका में रिकॉर्ड स्तर पर खाद्य मुद्रास्फीति, ईंधन की आसमान छूती क़ीमतों, और बुनियादी वस्तुओं की क़िल्लत के कारण 62 लाख से अधिक नागरिक, अपना पेट भरने के लिये कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं.

विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) ने आर्थिक संकट से घिरे श्रीलंका में खाद्य असुरक्षा हालात पर नया विश्लेषण जारी किया है, जिसके अनुसार हर 10 में से तीन घर-परिवारों के लिये अपने भोजन का प्रबन्ध कर पाना भी अनिश्चितता से घिरा है.

खाद्य वस्तुओं की क़ीमतें बढ़ने से स्वस्थ आहार आम लोगों की पहुँच से दूर हो रहा है.

एक अनुमान के अनुसार, क़रीब 61 फ़ीसदी घर-परिवार अपने आहार का आकार घटा रहे हैं और कम पोषक भोजन करने के लिये मजबूर हो रहे हैं.

यूएन एजेंसी ने आशंका जताई है कि देश में आर्थिक संकट और गहराने की स्थिति में अनेक अन्य लोग, जीवन-व्यापन के लिये ऐसे क़दमों का सहारा लेने के लिये मजबूर होंगे.

दो लाख से अधिक परिवारों के लिये मध्यम से दीर्घकाल में कमाई की क्षमता के लिये जोखिम बढ़ा है.

एक महिला ने यूएन एजेंसी को बताया कि, इन दिनों हम समुचित भोजन नहीं, बस चावल और माँस के रस का सेवन करते हैं.

विश्व खाद्य कार्यक्रम ने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि पोषण के अभाव में गर्भवती महिलाओं और उनके होने वाले बच्चों के स्वास्थ्य के लिये जोखिम है.

एशिया-प्रशान्त क्षेत्र के लिये, यूएन एजेंसी की उप निदेशक एंथिया वैब ने बताया कि, गर्भवती महिलाओं को हर दिन पोषक आहार की ज़रूरत होती है, लेकिन निर्धनतम के लिये इन बुनियादी ज़रूरतों को पूरा कर पाना मुश्किल होता जा रहा है.

उन्होंने एक स्थानीय टीवी चैनल के साथ इण्टरव्यू में कहा कि दिन के किसी समय भोजन ना करके, गर्भवती महिलाएँ अपने स्वास्थ्य को ऐसे जोखिम में डाल रही हैं, जोकि उनके लिये उम्र भर जारी रह सकता है.

श्रीलंका में खाद्य संकट और कुपोषण से निपटने के लिये, यूएन एजेंसी ने निर्धनतम इलाक़ों में गर्भवती महिलाओं के लिये मासिक खाद्य वाउचर वितरित किये जाने शुरू किये हैं.

मुद्रास्फीति का दंश

श्रीलंका में मुद्रास्फीति की दर 57 प्रतिशत के आँकड़े को भी पार कर गई है, जिससे खाद्य सामग्री क़ीमतों में तेज़ उछाल आया है.

स्थानीय आबादी के लिये पर्याप्त व पोषक आहार का प्रबन्ध कर पाना कठिन होता जा रहा है - हर पाँच में से दो घर-परिवारों के लिये उपयुक्त भोजन कर पाना सम्भव नहीं है.

बताया गया है कि भूसम्पत्ति सैक्टर में रहने वाले लोगों के लिये परिस्थितियाँ, विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण हैं, जहाँ 50 फ़ीसदी से अधिक घर-परिवार, खाद्य असुरक्षा से पीड़ित हैं.

शहरी इलाक़ों में घर-परिवार अपनी बचत का इस्तेमाल करके, किसी तरह से गुज़र बसर करने की कोशिश कर रहे हैं.

लेकिन भूसम्पत्ति सैक्टर की आबादी ने भोजन व अन्य ज़रूरतों को पूरा करने के लिये अभी से कर्ज़ लेना शुरू कर दिया है.

यूएन एजेंसी की अधिकारी ने सचेत किया कि शहरों में रहने वाले निर्धन परिवारों और भूसम्पत्ति सैक्टर में कार्यरत परिवारों की आय में गिरावट आई है, जबकि बाज़ार में क़ीमतें बढ़ी हैं.

श्रीलंका में अनेक परिवारों के लिये गुज़र बसर कर पाना एक बड़ी चुनौती है.
© WFP/Josh Estey
श्रीलंका में अनेक परिवारों के लिये गुज़र बसर कर पाना एक बड़ी चुनौती है.

संकट में श्रीलंका

वर्ष 1948 में अपनी स्वाधीनता के बाद, श्रीलंका अपने इतिहास में सबसे ख़राब आर्थिक संकट से गुज़र रहा है.

कोविड-19 महामारी की संक्रमण लहरों, पर्यटन सैक्टर पर उसके प्रभावों और अन्य वजहों से देश में, दशकों की प्रगति के लिये ख़तरा उपजा है और टिकाऊ विकास लक्ष्यों को पाने की क्षमता पर असर पड़ा है.

यूएन एजेंसी का कहना है कि तेल की क़िल्लत के कारण स्कूलों और सरकारी कार्यालयों को बन्द करने के लिये मजबूर होना पड़ा है.

घरेलू कृषि उत्पादन में कमी आई है, विदेशी मुद्रा भण्डार का अभाव है, जबकि स्थानीय मुद्रा में गिरावट दर्ज की गई है.  

विश्व खाद्य कार्यक्रम ने पिछले महीने, देश में प्रभावितों तक खाद्य व पोषण राहत पहुँचाने के लिये, छह करोड़ डॉलर की एक आपात अपील जारी की, ताकि जोखिम झेल रहे 30 लाख लोगों को सहायता प्रदान की जा सके.

अब तक, यूएन एजेंसी ने उपलब्ध दो हज़ार 375 वाउचर्स में से 88 फ़ीसदी वितरित किये हैं, और आपात भोजन, पोषण व स्कूली आहार के लिये 30 लाख लोगों को चिन्हित किया गया है.

 

 

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