महत्वाकाँक्षी कार्रवाई के संकल्प के साथ, यूएन महासागर सम्मेलन का समापन

लाल सागर में प्रवाल भित्ति, विश्व में सबसे लम्बे समय से जीवित भित्तियों में हैं.
© Unsplash/Francesco Ungaro
लाल सागर में प्रवाल भित्ति, विश्व में सबसे लम्बे समय से जीवित भित्तियों में हैं.

महत्वाकाँक्षी कार्रवाई के संकल्प के साथ, यूएन महासागर सम्मेलन का समापन

जलवायु और पर्यावरण

पुर्तगाल के लिस्बन शहर में एक सप्ताह तक चली चर्चाओं और कार्यक्रमों के बाद, संयुक्त राष्ट्र का दूसरा महासागर सम्मेलन शुक्रवार को समाप्त हो गया. इस अवसर पर सरकारों और राष्ट्राध्यक्षों ने महासागरों की रक्षा के लिये एक नए राजनैतिक घोषणापत्र पर सहमति जताई है और महासागर संरक्षण के लिये विज्ञान आधारित, नवाचारी समाधानों को अपनाये जाने पर बल दिया है. 

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विश्व नेताओं ने सम्मेलन के समापन पर जारी इस घोषणापत्र में, अतीत की सामूहिक विफलताओं को पहचानते हुए, महासागरों के लिये उपजे वैश्विक आपात हालात पर गहरी चिन्ता जताई है. साथ ही, मौजूदा चुनौतियों से निपटने के लिये और अधिक महत्वाकाँक्षी कार्रवाई की पुकार लगाई गई है.

क़ानूनी मामलों के लिये यूएन अवर महासचिव मिगेल डी सेरपा सोआरेस ने सम्मेलन के सफलतापूर्वक आयोजन के लिये केनया और पुर्तगाल की सराहना की.

“[इस सम्मेलन] ने हमें महत्वपूर्ण मुद्दों को परखने और नए विचार-समाधानों के सृजन का अवसर दिया है. इसने बाक़ी बचे कार्य और महासागर की पुनर्बहाली के लिये कामकाज का स्तर बढ़ने की आवश्यकता को स्पष्ट कर दिया है.” 

छह हज़ार से अधिक प्रतिभागियों ने महासागरों के समक्ष मौजूद संकट के निवारण के लिये सम्मेलन में हिस्सा लिया, जिनमें 24 राष्ट्राध्यक्ष व सरकार प्रमुखों के अलावा, दो हज़ार से अधिक नागरिक समाज के प्रतिनिधि थे.

'सामूहिक विफलता'

विश्व नेताओं ने महासागर सम्बन्धी लक्ष्यों को पाने में सामूहिक विफलता को स्वीकार करते हुए, नए सिरे से तत्काल कार्रवाई करने और सभी स्तरों पर सहयोग का संकल्प लिया है.

महासागरों के समक्ष तटीय क्षरण, बढ़ता समुद्री जलस्तर, गर्माता और अम्लीय जल, समुद्री प्रदूषण, मछली भण्डार के अत्यधिक दोहन और समुद्री जैवविविवता में कमी जैसी चुनौतियाँ उपस्थित हैं. 

वर्तमान समय की सबसे विशाल चुनौतियों के रूप में, जलवायु परिवर्तन की शिनाख़्त की गई है, जिससे निपटने के लिये निर्णायक कार्रवाई को आवश्यक बताया गया है.

साथ ही, महासागरों व उसके पारिस्थितिकी तंत्रों के स्वास्थ्य, उत्पादकता, सतत इस्तेमाल और सहनक्षमता में तत्काल बेहतरी लाये जाने पर बल दिया गया है. 

लिस्बन में जुटे शीर्ष नेताओं ने इस दिशा में विज्ञान-आधारित और नवाचारी कार्रवाई के साथ-साथ, अन्तरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा दिया जाना अहम बताया है.

रूपान्तरकारी बदलावों की पुकार लगाते हुए, विश्व नेताओं ने गर्माती पृथ्वी से महासागरों पर होने वाले असर, पारिस्थितिकी तंत्रों के क्षरण और लुप्त होती प्रजातियों की समस्या पर पार पाने का आहवान किया है. 

मानव जनित प्रदूषण, महासागरों के लिये एक बड़ा ख़तरा है.
Ocean Image Bank/Thomas Horig
मानव जनित प्रदूषण, महासागरों के लिये एक बड़ा ख़तरा है.

महासागर संरक्षण के लिये दृढ़ संकल्प

पृथ्वी पर जीवन व मानवता के भविष्य के लिये, महासागरों की बुनियादी भूमिका है. इस क्रम में, महासागर संरक्षण के लिये वर्ष 2015 के पैरिस जलवायु समझौते और 2021 के ग्लासगो जलवायु पैक्ट को लागू करने की अहमियत को रेखांकित किया गया है.

लिस्बन घोषणापत्र के अनुसार, 2020 के बाद की दुनिया के लिये, एक महत्वाकाँक्षी, सन्तुलित, व्यावहारिक, प्रभावी, स्फूर्त और रूपान्तरकारी, वैश्विक जैवविविधता फ़्रेमवर्क का आहवान किया गया है. 

सहनसक्षम और स्वस्थ समुद्री पर्यावरण को जलवायु नियामन व टिकाऊ विकास का आधार माना गया है, जिससे अरबों लोगों के लिये भोजन, ऊर्जा व आजीविका का प्रबन्ध किया जाना सम्भव है. 

सम्मेलन के दौरान 100 से अधिक सदस्य देशों ने वैश्विक महासागर के कम से कम 30 प्रतिशत हिस्से के संरक्षण व रक्षा के लिये, स्वैच्छिक रूप से संकल्प लिये हैं.

कुछ अन्य अहम संकल्प इस प्रकार हैं:

- वर्ष 2040 तक कार्बन तटस्थता हासिल करना

- प्लास्टिक प्रदूषण में कमी लाना 

- नवीकरणीऊय ऊर्जा का इस्तेमाल बढ़ाना 

- महासागर अम्लीकरण से निपटने के उपायों पर शोध, जलवायु सहनसक्षम यजोना व निगरानी के लिये निवेश करना

हेती में टिकाऊ ढँग से मछली पकड़ने पर बल देकर, आजीविकाओं को बेहतर बनाया जा रहा है.
UNDP/Pierre Michel Jean
हेती में टिकाऊ ढँग से मछली पकड़ने पर बल देकर, आजीविकाओं को बेहतर बनाया जा रहा है.

लिस्बन सम्मेलन के उपरान्त

लिस्बन घोषणापत्र में वित्त पोषण पर भी ध्यान केन्द्रित किया गया है. सात पृष्ठों के इस दस्तावेज़ के अनुसार सतत, महासागर-आधारित अर्थव्यवस्थाओं की ओर बदलाव लाने के लिये, नवाचारी वित्त पोषण समाधानों को ढूँढा जाना होगा.

साथ ही, प्रकृति-आधारित समाधानों का दायरा व स्तर बढ़ाया जाना होगा, और तटीय पारिस्थितिकी तंत्रों के संरक्षण, सहनक्षमता व पुनर्बहाली को समर्थन देने के लिये पारिस्थितिकी तंत्रों पर आधारित तौर-तरीक़ों को अपनाया जाना होगा.

महासागर पर यूएन महासचिव के विशेष दूत पीटर थॉम्पसन ने कहा कि मानवता के भविष्य के लिये सुरक्षा की दृष्टि से नील अर्थव्यवस्था (Blue Economy) अब एक अहम हिस्सा है, जिसके लिये वित्तीय संसाधनों की ज़रूरत होगी. 

उन्होंने महासागरों के भविष्य से जुड़े निर्णयों व चर्चाओं के लिये युवजन से भागीदारी करने का आग्रह किया है. 

अवर महासचिव मिगेल डी सेरपा सोआरेस ने यूएन न्यूज़ को बताया कि अगले कुछ महीनों में संकल्पों व महत्वाकाँक्षाओं को प्रदर्शित किये जाने के अनेक अवसर व कार्यक्रम होंगे, ताकि महासागरों की सततता की दिशा में बहाव को मोड़ा जा सके.

लिस्बन में सम्मेलन के बाद, राष्ट्रीय न्यायिक अधिकार क्षेत्र से बाहर स्थित इलाक़ों में समुद्री जैवविविधता के विषय पर सन्धि के लिये एक अन्तरसरकारी सम्मेलन का आयोजन होगा.

2020 के बाद की दुनिया में वैश्विक जैवविविधता फ़्रेमवर्क पर बातचीत को आगे बढ़ाया जाएगा, और मिस्र के काहिरा में यूएन के वार्षिक जलवायु सम्मेलन में जलवायु वित्त पोषण और अनुकूलन पर ध्यान केन्द्रित रहेगा. 

महासागरों की रक्षा के लिये कार्रवाई में युवजन की भागीदारी पर बल दिया गया है.
UN News/Eleuterio Guevane
महासागरों की रक्षा के लिये कार्रवाई में युवजन की भागीदारी पर बल दिया गया है.

युवजन, महिलाओं व आदिवासियों का सशक्तिकरण

विश्व नेताओं ने आदिवासी समुदायों, पारम्परिक एवं स्थानीय ज्ञान और उनकी प्रथाओं व तौर-तरीक़ों को अहम माना है. साथ ही, नियोजन, निर्णय-निर्धारण, और उन्हें लागू किये जाने में स्थानीय समुदायों की अर्थपूर्ण भागीदारी पर बल दिया है.

घोषणापत्र में महिलाओं व लड़कियों का सशक्तिकरण सुनिश्चित करने, एक टिकाऊ महासागर-आधारित अर्थव्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ने के लिये समान व अर्थपूर्ण भागीदारी को महत्वपूर्ण बताया गया है.

घोषणापत्र में कहा गया है कि युवजन को महासागरों के स्वास्थ्य में बेहतरी लाने के प्रयासों में योगदान देने के लिये प्रोत्साहित किया जाना होगा, और महासागरों के प्रति समझ विकसित करने के लिये गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, और जीवन पर्यन्त पढ़ाई-लिखाई को समर्थन देना होगा.

सम्मेलन में सभी हितधारकों से महत्वाकाँक्षी व समन्वित कार्रवाई का आहवान किया गया है, ताकि टिकाऊ विकास के 14वें लक्ष्य पर प्रगति की रफ़्तार में तेज़ी लाई जा सके.

स्वैच्छिक रूप से लिये गए संकल्प

  • पृथ्वी ग्रह की रक्षा के लिये Protecting Our Planet Challenge द्वारा वर्ष 2030 तक, समुद्री संरक्षित क्षेत्रों के सृजन, विस्तार व प्रबन्धन में कम से कम एक अरब डॉलर का निवेश किया जाएगा
  • योरोपीय निवेश बैन्क, स्वच्छ महासागर पहल के तहत, कैरीबियाई क्षेत्र में 15 करोड़ डॉलर की अतिरिक्त धनराशि मुहैया करायेगा, ताकि जलवायु सहनक्षमता, जल प्रबन्धन और ठोस कचरा निपटान में बेहतरी लाई जा सके
  • पुर्तगाल ने अपनी सम्प्रभुता या न्यायिक अधिकार क्षेत्र के तहत आने वाले 100 फ़ीसदी समुद्री क्षेत्र को अच्छी पर्यावरणीय अवस्था में लाने का संकल्प लिया है, और वर्ष 2030 तक 30 फ़ीसदी को राष्ट्रीय समुद्री क्षेत्र के रूप में वर्गीकृत किया जाएगा
  • केनया फ़िलहाल एक राष्ट्रीय नील अर्थव्यवस्था रणनैतिक योजना विकसित कर रहा है, जोकि समावेशी व बहुहितधारकों पर केन्द्रित होगी. केनया ने समुद्र-आधारित प्लास्टिक कचरे पर एक राष्ट्रीय कार्रवाई योजना तैयार करने की भी बात कही है
  • भारत ने तटीय इलाक़ो में स्वच्छ समुद्र अभियान आगे बढ़ाने का संकल्प लिया है, और एकल-प्रयोग वाली प्लास्टिक पर पाबन्दी लगाई जाएगी