भारत: ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं के ख़िलाफ़ हिंसा से निपटने का एक व्यापक दृष्टिकोण

29 जून 2022

संयुक्त राष्ट्र महिला संस्था (UN Women) के समर्थन से भारत के असम प्रदेश के ग्रामीण समुदायों में, महिलाओं और पुरुषों ने अपने पड़ोस में महिलाओं, युवाओं और बच्चों के ख़िलाफ़ हिंसा को रोकने और उसका जवाब देने के लिये मिलकर काम करने के नए तरीक़े खोजे हैं.

असम में कई चाय बागान में UN Women के समर्थन से गठित जुगनू क्लब, महिला सशक्तिकरण समूह है, जो महिलाओं के ख़िलाफ़ हिंसा पर चुप्पी तोड़ने और सभी महिलाओं व लड़कियों की सुरक्षा एवं समानता के लिये कार्रवाई करने में मदद कर रहा है. जनवरी 2017 से, इस क्षेत्र में महिलाओं और लड़कियों के ख़िलाफ़ यौन उत्पीड़न व अन्य प्रकार की हिंसा को रोकने और जवाबी कार्रवाई के एक व्यापक दृष्टिकोण के हिस्से के रूप में ये क्लब गठित किये गए थे. यह महिलाओं के ख़िलाफ़ हिंसा की रोकथाम के लिये, असम में ग्रामीण क्षेत्रों में लागू होने वाला, UN Women का पहला कार्यक्रम था. 

कियारा देवी बताती हैं, "[क्लब की बैठकों में] हम लड़कियों और माताओं को प्रोत्साहित करते हैं कि अगर कोई महिला समुदाय में उत्पीड़न का सामना कर रही है तो चुप न रहें और हमारे पास आएँ. अब हम घरेलू हिंसा को स्वीकार नहीं करने, पुरुषों और महिलाओं के बीच भेदभाव के ख़िलाफ़ खड़े होने और इससे निपटने के तरीक़ों को लेकर अधिक जागरूक हैं - यही मैंने सीखा है."

सुरक्षित और सहायक कार्यस्थल 

एक अनुमान के मुताबिक़, असम प्रदेश के 765 चाय बागान और एक लाख छोटे बागान में लगभग 60 लाख लोग कार्यरत हैं, जो भारत की आधी से अधिक चाय और वैश्विक स्तर पर 13 प्रतिशत चाय का उत्पादन करते हैं. 

असम के चाय बागान में आधा कार्यबल महिलाओं का है, जिनमें से अधिकांश चाय की पत्तियाँ तोड़ने का काम करती हैं, और इनमें से अनेकम महिलाएँ घरों पर, कार्यस्थलों पर और सार्वजनिक स्थानों पर हिंसा का शिकार हैं. 2015 में, असम में महिलाओं के ख़िलाफ़ पतियों या रिश्तेदारों द्वारा क्रूरता के 11 हज़ार 225 मामले दर्ज किये गए थे, जिनमें पुरुषों द्वारा शराब के नशे में हिंसा की महत्वपूर्ण भूमिका थी. (“Crime in India 2015: Compendium”).

संयुक्त राष्ट्र महिला संस्थान – UN Women के महिलाओं के ख़िलाफ़ हिंसा रोकथाम कार्यक्रम के हिस्से के रूप में असम के उदलगुरी ज़िले में, सैकड़ों चाय बागान प्रबन्धकों, कल्याण अधिकारियों, श्रमिकों और जुगनू क्लब के सदस्यों ने, भारत के कार्यस्थलों पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न अधिनियम, महिलाओं के अधिकारों और घरेलू हिंसा व बाल श्रम सम्बन्धी कानूनी दायित्वों के बारे में प्रशिक्षण प्राप्त किया. 

प्रशिक्षण सत्रों में स्थानीय लोक गीतों और बोलियों, नाटकों एवं अन्य स्थान-अनुकूल शिक्षा सामग्री का उपयोग किया गया. प्रशिक्षण प्रतिभागियों में 95 प्रतिशत, प्रशिक्षण से पहले क़ानून और इसके प्रावधानों से अनजान थे; वहीं, 80 प्रतिशत प्रतिभागियों ने दर्शाया कि प्रशिक्षण ने अधिनियम की उनकी समझ में इज़ाफ़ा किया है.

कार्यक्रम में भाग लेने वाले जुगनू क्लब के प्रतिभागी अब अपने अधिकारों के प्रति जागरूक और अपनी ज़रूरतों के प्रति अधिक मुखर हैं. कार्यक्रम में, महिलाओं द्वारा सुरक्षित और असुरक्षित स्थानों की पहचान करने वाली संचालित सुरक्षा ऑडिट की एक प्रक्रिया के तहत, महिलाओं ने अन्धेरे में डूबे सार्वजनिक क्षेत्रों में स्ट्रीट लाइट लगाने और काम पर जाने के लिये सुरक्षित परिवहन की मांग की है, जिनमें आस-पास के गाँवों से महिलाओं को चाय बागान तक ले जाने के लिये दो बसें शामिल हैं. इन क़दमों ने प्रबन्धन और महिला श्रमिकों के बीच सम्बन्धों को मज़बूत बनाने में मदद की है.

जुगनू क्लब के सदस्य अब अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हैं और अपनी ज़रूरतों को लेकर अधिक मुखर हो गए हैं.
UNWOMEN
जुगनू क्लब के सदस्य अब अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हैं और अपनी ज़रूरतों को लेकर अधिक मुखर हो गए हैं.

दीर्घकालीन क़ानूनी सहायता

जून 2020 में, यूएन वीमेन के तकनीकी सहयोग से, उदलगुरी ज़िले में एक क़ानूनी सहायता केन्द्र खोला गया, जो असम में एक चाय बागान पर अपनी तरह का पहला केन्द्र था. यह समग्र सेवा केन्द्र, महिलाओं को क़ानूनी परामर्श और विभिन्न मुद्दों पर जानकारी प्रदान करता है.

एक चाय कम्पनी ने अपने छह चाय बागान में, केन्द्र की सेवाओं तक पहुँचने के लिये एक छोटी मोबाइल बस  प्रदान की. यूएन वीमेन ने इस व्यापक मॉडल के हिस्से के रूप में, इस क्षेत्र के 67 वकीलों को घरेलू हिंसा और कार्यस्थल में यौन उत्पीड़न के कानूनों के बारे में प्रशिक्षित किया ताकि वे इन समुदायों की महिलाओं को क़ानूनी सेवाएँ प्रदान कर सकें.

चाय बागान में काम करने वाले कल्याण अधिकारी रमेश पटेल* का कहना है, "यूएन वीमेन के साथ बातचीत के सकारात्मक परिणाम मिले हैं, और इसलिये इस तरह की बातचीत को और बड़े पैमाने पर आयोजित करने की आवश्यकता है. यह पहली बार है जब यूएन वीमेन की भागीदारी में संस्थागत स्तर पर इस तरह के उपाय किये गए हैं. जब एक विश्वसनीय बाहरी संस्था श्रमिकों के साथ जुड़ती है, तो यह अधिक प्रभावी होती है, क्योंकि लोग उस पर अधिक ध्यान देते हैं."

असम में, भारत में महिलाओं के ख़िलाफ़ हिंसा की रोकथाम कार्यक्रम के हिस्से के रूप में यूएनवीमेन का यह कार्यक्रम, 15 हज़ार लोगों तक पहुँच चुका है. जर्मन विकास एजेंसी (GIZ) के साथ एक नई साझेदारी के तहत, भारत में कोविड-19 के सन्दर्भ में, असम में ग्रामीण महिलाओं के स्वास्थ्य, सुरक्षा और कल्याण पर केन्द्रित कार्यक्रम अधिक विस्तृत किये गए, जोकि टिकाऊ विकास लक्ष्यों के "किसी को भी पीछे न छोड़ने" के सिद्धान्त के अनुरूप है.

*व्यक्तियों की पहचान छुपाने के लिये, नाम और व्यक्तिगत जानकारी बदल दिये गए हैं.

 

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