बाली के छात्रों को यूएन उप महासचिव आमिना जे मोहम्मद से मिली सराहना

24 मई 2022

लाल रंग की स्कूली वर्दियाँ पहने हुए और किताबों से भरे अपने थैलों को, किसी मलबे से सुरक्षित बचाने की ख़ातिर अपने सिर पर रखकर, 200 से भी ज़्यादा बच्चे, बड़े धैर्य के साथ, एक होटल की तीन मंज़िला सीढ़ियाँ चढ़कर छत पर पहुँचे, जो उनके क्लासरूम्स के पास थी. ये नज़ारा था इण्डोनेशिया के बाली द्वीप में एक प्रारम्भिक शिक्षा स्कूल का, जिसे यूएन उप महासचिव आमिना जे मोहम्मद ने भी देखा.

शुक्र है कि जिस अलार्म की आवाज़ सुनकर वो स्कूली बच्चे अपनी कक्षाओं से, सुरक्षा के लिये बचकर निकले थे, वो सूनामी के हालात में सुरक्षा के लिये एक अभ्यास था, मगर उस अभ्यास के दौरान पूर्व नियोजित रास्तों पर जाते हुए, उन्हें विश्वस्त महसूस हुआ और ये भरोसा भी जागा कि वास्तविक आपात स्थिति में वो त्वरित और धैर्य के साथ सुरक्षा का रास्ता अपना सकते हैं.

उस भूकम्प और सूनामी अभ्यास के बाद, चौथी कक्षा की एक छात्रा नी पूतू अनिका देसिन्था देवी ने यूएन उप महासचिव आमिना जे मोहम्मद से कहा, “मैं अपने माता-पिता, अपने परिवार को इस घटना के बारे में बताउंगी, और उन्हें सुरक्षित रखने की पूरी कोशिश करूंगी.”

दुनिया को बताना

यूएन उप महासचिव आमिना जे मोहम्मद, बुधवार को होने वाले सातवें आपदा जोखिम न्यूनीकरण मंच (GPDRR) में शिरकत करने के लिये बाली पहुँची हुई हैं. बच्चों का ये अभ्यास देखर उन्होंने कहा कि वो भी न्यूयॉर्क सिटी में छात्रों को बताएंगी कि बाली के स्कूली बच्चों ने सुरक्षा अभ्यास के दौरान किस तरह लीडरशिप कुशलताओं का प्रदर्शन किया, और बाली में छात्र किस तरह से सहनशील हैं.

समुदायों और देशों की सहनशीलता विकसित करना, आपदा जोखिम न्यूनीकरण मंच (GPDRR) का मुख्य ध्यान बिन्दु है. आपदा जोखिम न्यूनीकरण पर ये दुनिया की अति महत्वपूर्ण बैठक है.

मेज़बान देश इण्डोनेशिया, विस्फोटक - प्रशान्त अग्नि धुरी के किनारे पर स्थित है जिसकी टैक्टॉनिक प्लेट्स अपना स्थान बदल रही हैं, इसलिये इण्डोनेशिया के लिये सहनक्षमता विकसित करना एक राष्ट्रीय अनिवार्यता है. 

इण्डोनेशिया के बाली में, स्कूली छात्र सूनामी का सामना करने की तैयारी करते हुए.
UNDRR/Antoine Tardy
इण्डोनेशिया के बाली में, स्कूली छात्र सूनामी का सामना करने की तैयारी करते हुए.

इण्डोनेशिया के 17 हज़ार द्वीपों में, वर्ष 2021 के दौरान तीन हज़ार आपदाएँ दर्ज की गईं, जिसका मतलब है प्रतिदिन आठ आपदाएँ. भूकम्प और सूनामी, इण्डोनेशिया के लिये विशेष रूप में गम्भीर जोखिम उत्पन्न करते हैं.

वर्ष 2004 में हिन्द महासागर में आई सूनामी में, देश में लगभग दो लाख 30 हज़ार लोगों की मौत हुई थी, जिनमें से ज़्यादातर मौतें, देश के पश्चिमी प्रान्त आचेह में थीं. अभी हाल ही में, वर्ष 2018 में पालू में आए भूकम्प और सूनामी में सुलावेसी में 4,300 से ज़्यादा लोग मारे गए थे.

मगर कोविड-19 महामारी ने तो उन आपदाओं को भी पीछे छोड़ दिया. कोरोनावायरस महामारी के प्रभावों ने युवाओं, महिलाओं और लड़कियों के साथ-साथ आदिवासी जन, व अन्य कमज़ोर हालात वाली आबादियों को ग़ैर-आनुपातिक स्तर पर प्रभावित किया है, जो पीछे छोड़ दिये जाने के जोखिम का सामना कर रही हैं.

जीवन के हर पहलू को प्रभावित करती आपदाएँ

ये हालात बाली में बहुत मुखर रूप में नज़र आते हैं जहाँ महामारी के कारण पर्यटन में आई मन्दी के कारण, बड़े पैमाने पर आजीविकाएँ ख़त्म हुई हैं और खाद्य असुरक्षा बढ़ी है.

यूएन उप प्रमुख आमिना जे मोहम्मद ने बाली में स्थानीय अधिकारियों और सामुदायिक नेताओं के एक समूह को सम्बोधित करते हुए कहा, “महामारी के प्रभाव ये याद दिलाते हैं कि किस तरह आपदाएँ, जीवन के हर पहलू को प्रभावित करती हैं, स्वास्थ्य से लेकर शिक्षा, कामकाज से लेकर आजीविकाओं तक, लैंगिक समानता, पोषण और शान्ति व सुरक्षा.”

यूएन उप महासचिव आमिना जे मोहम्मद, इण्डोनेशिया के बाली शहर में एक स्कूल में छात्रों से बातचीत करते हुए.
UNDRR
यूएन उप महासचिव आमिना जे मोहम्मद, इण्डोनेशिया के बाली शहर में एक स्कूल में छात्रों से बातचीत करते हुए.

“वास्तव में, आपदाएँ टिकाऊ विकास लक्ष्यों की प्राप्ति के लिये एक बड़ा जोखिम उत्पन्न करती हैं. उनमें, कुछ ही मिनटों और घण्टों में, वर्षो व दशकों के विकासात्मक कामकाज के नतीजों को ख़त्म कर देने की विध्वंसक क्षमता है.”

वैसे तो सूनामी और भूकम्प अपने आप में विनाशकारी हैं, मगर वर्ष 2021 के दौरान जिन आपदाओं ने देश में 665 लोगों की जानें लीं और 80 लाख से ज़्यादा लोगों को विस्थापित किया, उनमें ज़्यादातर बाढ़ और चरम मौसम की अन्य घटनाएँ थीं, मसलन भूस्खलन, और वनों व भूमि की आग्नियाँ.

इस तरह की आपदाओं की बारम्बारता व गम्भीरता, वैश्विक जलवायु आपदा एक परिणाम भी है.

भविष्य के लिये वृक्ष

यूएन उप महासचिव आमिना जे मोहम्मद ने बाली में प्रान्तीय राजधानी डेनपरसर में, छात्रों के साथ मिलकर, मैनग्रोव पेड़ लगाए. ये वृक्षारोपड़ देश के सभी 34 प्रान्तों में एक करोड़ मैनग्रोव पेड़ लगाने की एक इण्डोनेशियाई सरकार की पहल का हिस्सा है, जिसे संयुक्त राष्ट्र के आपदा जोखिम न्यूनीकरण (UNDRR) कार्यक्रम का भी समर्थन हासिल है.

आमिना जे मोहम्मद ने, स्थानीय वृक्षारोपड़ पहल का नेतृत्व करने वाले इण्डोनेशियाई छात्रों को सम्बोधित करते हुए कहा, “आप पहले ही नेतृत्वकर्ता हैं, इसलिये आपके बाद आने वालों को शिक्षित करें, जो आपसे आगे हैं उन्हें भी शिक्षित करें, विशेष रूप में उन नेतृत्व कर्ताओं को जिन्होंने वो सबकुछ नहीं किया, जो उन्हें पर्यावरण की ख़ातिर करना चाहिये था, ताकि वो पेरिस जलवायु समझौते की ज़रूरतों को पूरा कर सकें, ताकि वो टिकाउ विकास लक्ष्यों की प्राप्ति कर सकें.”

यूएन उप महासचिव आमिना जे मोहम्मद, इण्डोनेशिया में सभी 34 प्रान्तों में, एक करोड़ पेड़ लगाने के एक कार्यक्रम के लिये, बाली में यूएन प्रतिनिधिमण्डल का नेतृत्व करते हुए.
UNDRR/Antoine Tardy
यूएन उप महासचिव आमिना जे मोहम्मद, इण्डोनेशिया में सभी 34 प्रान्तों में, एक करोड़ पेड़ लगाने के एक कार्यक्रम के लिये, बाली में यूएन प्रतिनिधिमण्डल का नेतृत्व करते हुए.

 

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