इराक़ में सीरियाई शरणार्थियों के सामने खाद्य क़िल्लत, सहायता राशि की ज़रूरत

इराक़ के कुर्दिस्तान क्षेत्र में, अरबील गवर्नरेट में, सीरियाई शरणार्थियों के लिये बनाए गए एक शिविर में, एक परिवार को राहत सामग्री वितरित किये जाने के बाद का दृश्य.
© UNICEF/Wathiq Khuzaie
इराक़ के कुर्दिस्तान क्षेत्र में, अरबील गवर्नरेट में, सीरियाई शरणार्थियों के लिये बनाए गए एक शिविर में, एक परिवार को राहत सामग्री वितरित किये जाने के बाद का दृश्य.

इराक़ में सीरियाई शरणार्थियों के सामने खाद्य क़िल्लत, सहायता राशि की ज़रूरत

प्रवासी और शरणार्थी

संयुक्त राष्ट्र के विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) और शरणार्थी एजेंसी – UNHCR ने मंगलवार को ताज़ा आँकड़े जारी किये हैं जिनमें बताया गया है कि इराक़ के शरणार्थी शिविरों में रहने वाले सीरियाई परिवार, खाद्य असुरक्षा के नए और चिन्ताजनक स्तर का सामना कर रहे हैं.

यूएन एजेंसियों के ताज़ा आँकड़ों के अनुसार, परिवारों की दैनिक आवश्यकताओं वाली बुनियादी चीज़ों में मदद के लिये भी धन ख़त्म हो रहा है, जबकि दशक से भी ज़्यादा लम्बे समय से जारी सीरिया संघर्ष से उत्पन्न कठिन आर्थिक हालात में, शरणार्थी लोग अक्सर क़र्ज़ के बोझ में दब रहे हैं, जबकि उनके पास उस क़र्ज़ को अदा करने के कोई साधन भी नज़र नहीं आ रहे हैं.

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इराक़ में, लगभग दो लाख 60 हज़ार सीरियाई शरणार्थी रहते हैं, जिनमें ज़्यादातर संख्या कुर्दिस्तान क्षेत्र में स्थित है. 

इन शरणार्थियों को विश्व खाद्य एजेंसी WFP और शरणार्थी एजेंसी – UNHCR से अनेक तरह की मदद मिलती है जिसमें खाद्य सहायता, नक़दी सहायता, शिक्षा सहायता और क़ानूनी सहायता भी शामिल हैं.

शिविरों में संकट

यूएन एजेंसियों का कहना है कि अनेक सामाजिक-आर्थिक झटकों के बाद के माहौल में, शिविरों में रहने वाले शरणार्थियों में से 86 प्रतिशत, खाद्य असुरक्षित हैं, या खाद्य असुरक्षा के बहुत निकट हैं.

वर्ष 2020 में रोज़गार क्षेत्र पर कोविड-19 महामारी और तत्पश्चात इराक़ी दिनार के अवमूल्यन के प्रभाव महसूस किये जा रहे हैं और यूक्रेन युद्ध के कारण क़ीमतों में आए उछाल ने, बुनियादी खाद्य सामग्री तक लोगों की पहुँच मुश्किल बना दी है.

अनौपचारिक अर्थव्यवस्था में अनियमित और अप्रत्याशित नक़दी रोज़गार व कामकाज पर परिवारों की निर्भरता, खाद्य असुरक्षा का एक प्रमुख कारक है.

क़र्ज़ का कुचक्र

जब आय अर्जित करने के अवसर सूखते हैं तो शरणार्थी जन, नकारात्मक तरीक़े अपनाते हैं जिनमें उधार पर खाद्य सामग्री ख़रीदना, बुनियादी आवश्यकताएँ पूरी करने के लिये ख़र्च कम करना, अपना सामान या सम्पदा बेचना, बाल श्रम, और बच्चों को स्कूली शिक्षा से हटा लेना तक शामिल हैं ताकि वो भी आय अर्जित करने में कुछ मदद कर सकें.

यूएन एजेंसियों का कहना है कि इराक़ में शिविरों में रहने वाले बेहद कमज़ोर हालात वाले 72 हज़ार सीरियाई शरणार्थियों की मदद जारी रखने के लिये, तत्काल अतिरिक्त धनराशि की आवश्यकता है.

विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) को मासिक स्तर पर खाद्य और नक़दी सहायता, निर्बाध रूप में जारी रखने के लिये एक करोड़ 11 लाख डॉलर की रक़म की ज़रूरत है.

विश्व खाद्य कार्यक्रम और शरणार्थी एजेंसी, संकट के शुरू से ही सीरियाई शरणार्थियों की मदद करती रही हैं और अब भी कर रही हैं, मगर खाद्य पदार्थों की बढ़ती क़ीमतों और लोगों की कम होती आमदनी से घटती क्रय शक्ति ने, उन्हें खाद्य असुरक्षा के जोखिम के बहुत निकट पहुँचा दिया है.