यूक्रेन: आम लोगों पर ‘अत्याचारों’ की निन्दा

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख मिशेल बाशेलेट ने यूक्रेन में आम लोगों पर किये जा रहे “भयावह अत्याचारों” की निन्दा की है, साथ ही विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भी आगाह करते हुए कहा है कि उसे देश के तबाह हुए पूर्वी और दक्षिणी इलाक़ों में बहुत बुरे हालात होने का डर है.
यूएन मानवाधिकार उच्चायुक्त मिशेल बाशेलेट ने शुक्रवार को युद्ध से सम्बद्ध तमाम पक्षों से, अन्तरराष्ट्रीय स्तर सहमत युद्ध के नियमों का सम्मान करने की एक अपील जारी की है.
UN Human Rights chief @mbachelet urges respect for #internationalhumanitarianlaw amid growing evidence of war crimes in #Ukraine.“International humanitarian law has not merely been ignored but seemingly tossed aside.”https://t.co/yz7AEkVeDp pic.twitter.com/Ji72UYVUey
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उन्होंने एक वक्तव्य में ये भी कहा कि अन्तरराष्ट्रीय क़ानून की ना केवल अनदेखी की गई है बल्कि उसे तार-तार कर दिया गया है.
उन्होंने कहा कि रूस के सशस्त्र बलों ने आबादी वाले इलाक़ों में अन्धाधुन्ध गोलाबारी और बमबारी की है जिनमें आम लोग मारे गए हैं, अस्पताल, स्कूल और अन्य सिविल ढाँचे बुरी तरह तबाह हुए हैं. इन घटनाओं को युद्धापराध के दायरे में रखा जा सकता है.
संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय (OHCHR) की प्रवक्ता रवीना शमदसानी ने आगाह किया है कि देश के पूर्वी क्षेत्र में सेना के भारी जमावड़े और लड़ाई में बढ़ोत्तरी के बीच, युद्ध का एक नया दौर शुरू होता नज़र आ रहा है.
रवीना शमदसानी ने कहा कि ”पहले ही रक्तपात देखा गया है. हम 2,343 लोगों – कम से कम 2,343 आम लोगों की बात कर रहे हैं जो मारे गए हैं, और हम 300 से भी ज़्यादा आम लोगों को आनन-फानन में मार दिये जाने की भी बात कर रहे हैं. हम बहुत चिन्तित हैं...कि आगे क्या होने वाला है.”
प्रवक्ता ने कहा कि युद्धापराधों को अंजाम दिये जाने के सबूत बढ़ रहे हैं, और उनमें से बड़े हिस्से को रूसी सेनाओं के हाथों अंजाम दिया गया है.
“इनमें आबादी वाले इलाक़ों में अन्धाधुन्ध गोलोबारी और बमबारी किया जाना, आम लोगों को सफ़ाई पेश करने का मौक़ा दिये बिना ही मार दिया जाना शामिल है...अगर हम हताहत हुए आम लोगों की संख्या देखें तो 92.3 प्रतिशत संख्या, सरकार नियंत्रित इलाक़ों में दर्ज की गई तो इसके लिये रूसी सशस्त्र बल ज़िम्मेदार हैं.”
संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार अधिकारियों ने 9 अप्रैल को बूचा की यात्रा के दौरान लगभग 50 आम लोगों की, ग़ैर-क़ानूनी तरीक़े से की गई हत्याओं के सबूत एकत्र किये थे, जिनमें लोगों को आनन-फानन में मार देने की घटनाएँ भी शामिल थीं.
प्रवक्ता रवीना शमदसानी ने मानवाधिकार उच्चायुक्त के हवाले से कहा, “हमारे सहयोगियों ने बूचा में जितने भी निवासियों से बातचीत की, उनमें से लगभग सभी ने अपने किसी सम्बन्धी, पड़ोसी या अन्य व्यक्ति की मौत होने के बारे में जानकारी दी.”
“हम जानते हैं कि वहाँ जो कुछ भी हुआ है उसकी सटीक और व्यापक जानकारी बाहर लाने के लिये बहुत कुछ किये जाने की ज़रूरत है, और हम ये भी जानते हैं कि बूचा ऐसे भीषण हालात का सामना करने वाला केवल एक स्थान नहीं है.”
यूक्रेन के लिये संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार निगरानी मिशन (HRMMU) को अपनी जाँच के दौरान, कीयेफ़, शेरनीहिफ़, ख़ारकियेफ़ और सूमी नगरों में, आम लोगों के मारे जाने के 300 से भी ज़्यादा आरोप सौंपे गए. ध्यान रहे कि ये सभी इलाक़े फ़रवरी के अन्तिम दिनों और मार्च के शुरुआती दिनों में रूसी सशस्त्र सेनाओं के नियंत्रण में थे.
लड़ाई में फँसे आम लोगों की बदतर होती स्थिति से, मानवीय सहायता एजेंसियाँ और उनके साझीदार संगठन और यूएन स्वास्थ्य एजेंसी WHO बहुत परेशान हैं.
यूएन स्वास्थ्य एजेंसी को, देश के पूर्वी क्षेत्र में बुरी तरह तबाह हुए कुछ इलाक़ों में पहुँचने की अभी तक इजाज़त नहीं दी गई है. एजेंसी ने शुक्रवार को ख़बर दी है कि पूर्वी क्षेत्र में स्वास्थ्य व्यवस्था लगभग बिल्कुल ढह गई है.
यूएन स्वास्थ्य एजेंसी के प्रवक्ता भानु भटनागर ने पश्चिमी इलाक़े लिविफ़ से बताया कि लूहान्स्क प्रान्त में लगभग सभी स्वास्थ्य सुविधाएँ और अस्पताल... या तो क्षतिग्रस्त हैं या पूरी तरह ध्वस्त हो चुके हैं.
प्रवक्ता का कहना था, “ये बहुत ज़रूरी है कि एक सुरक्षित गलियारा बहुत जल्द उपलब्ध कराया जाए, हमें युद्ध में कम से कम दो दिनों का विराम दिये जाने की ज़रूरत है ताकि अहम सामान की आपूर्ति की जा सके, और साथ ही स्वास्थ्य ज़रूरतों का भी आकलन किया जा सके. हमें बहुत बदतर हालात की आशंका है.”